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Bareilly News: रुविवि का सख्त आदेश, पूरी फीस होगी वापस
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की फीस वापसी नीति का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश उत्तर प्रदेश राजभवन सचिवालय के पत्र के क्रम में जारी किया गया है। विश्वविद्यालय ने सभी विभागों और संबद्ध महाविद्यालयों को इस संबंध में एक महत्वपूर्ण पत्र भेजा है। यूजीसी की नीति के अनुसार, प्रवेश की अंतिम तिथि से पंद्रह दिन या उससे पूर्व प्रवेश रद्द करने या स्थानांतरण कराने पर सौ फीसदी फीस वापस की जाएगी।
कुलसचिव महेंद्र कुमार के अनुसार, कई सरकारी और निजी महाविद्यालय यूजीसी के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे छात्रों की बकाया या आंशिक फीस अभी तक लंबित है। उन्होंने कहा कि यूजीसी की ओर से बार-बार अनुस्मारक भेजने के बावजूद ऐसा होना अत्यंत खेदजनक है। इन नियमों की अनदेखी से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को मानसिक एवं आर्थिक परेशानी होती है। यह उच्च शिक्षा व्यवस्था की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। विश्वविद्यालय ने सभी विभागाध्यक्षों और महाविद्यालयों के प्राचार्यों से अनुरोध किया है। उन्हें यूजीसी की फीस वापसी नीति का अक्षरशः एवं कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
31 अक्तूबर तक प्रवेश वापस लेने पर अधिकतम एक हजार रुपये का प्रसंस्करण शुल्क काटा जा सकता है। प्रवेश की घोषित अंतिम तिथि से पंद्रह दिन से कम समय पूर्व प्रवेश रद करने पर नब्बे फीसदी फीस वापसी होगी। घोषित अंतिम तिथि के पंद्रह दिन बाद तक अस्सी फीसदी फीस वापस की जाएगी। पंद्रह से तीस दिन के भीतर पचास फीसदी फीस वापसी का प्रावधान है। तीस दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद नाम वापस लेने पर कोई फीस वापसी देय नहीं होगी।
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विश्वविद्यालय ने सभी लंबित फीस वापसी प्रकरणों और शिकायतों की तत्काल समीक्षा करने को कहा है। पात्र विद्यार्थियों की बकाया राशि का भुगतान यथाशीघ्र सुनिश्चित किया जाए। इसकी अनुपालन आख्या तुरंत विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई जानी है। यह आख्या राजभवन, उत्तर प्रदेश को भेजी जाएगी।
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कुलसचिव महेंद्र कुमार के अनुसार, कई सरकारी और निजी महाविद्यालय यूजीसी के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे छात्रों की बकाया या आंशिक फीस अभी तक लंबित है। उन्होंने कहा कि यूजीसी की ओर से बार-बार अनुस्मारक भेजने के बावजूद ऐसा होना अत्यंत खेदजनक है। इन नियमों की अनदेखी से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को मानसिक एवं आर्थिक परेशानी होती है। यह उच्च शिक्षा व्यवस्था की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। विश्वविद्यालय ने सभी विभागाध्यक्षों और महाविद्यालयों के प्राचार्यों से अनुरोध किया है। उन्हें यूजीसी की फीस वापसी नीति का अक्षरशः एवं कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
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31 अक्तूबर तक प्रवेश वापस लेने पर अधिकतम एक हजार रुपये का प्रसंस्करण शुल्क काटा जा सकता है। प्रवेश की घोषित अंतिम तिथि से पंद्रह दिन से कम समय पूर्व प्रवेश रद करने पर नब्बे फीसदी फीस वापसी होगी। घोषित अंतिम तिथि के पंद्रह दिन बाद तक अस्सी फीसदी फीस वापस की जाएगी। पंद्रह से तीस दिन के भीतर पचास फीसदी फीस वापसी का प्रावधान है। तीस दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद नाम वापस लेने पर कोई फीस वापसी देय नहीं होगी।
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विश्वविद्यालय ने सभी लंबित फीस वापसी प्रकरणों और शिकायतों की तत्काल समीक्षा करने को कहा है। पात्र विद्यार्थियों की बकाया राशि का भुगतान यथाशीघ्र सुनिश्चित किया जाए। इसकी अनुपालन आख्या तुरंत विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराई जानी है। यह आख्या राजभवन, उत्तर प्रदेश को भेजी जाएगी।