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Bareilly News: नवजात को स्तनपान कराने में शहरियों से आगे हैं ग्रामीण महिलाएं

Thu, 08 Aug 2024 03:22 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Thu, 08 Aug 2024 03:22 AM IST
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Rural women are ahead of urban women in breastfeeding their newborns.
बरेली। मां का दूध नवजात के लिए अमृत समान है, पर 12 माह की आयु पूरी होने तक बच्चों को इस अमृत का सेवन कराने में शहरी महिलाओं के सापेक्ष ग्रामीण महिलाएं 20 फीसदी ज्यादा जागरूक हैं। स्वास्थ्य विभाग की डाटा वैलिडेशन रिपोर्ट के आंकड़े इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक जन्म के घंटेभर के भीतर नवजात को मां का पीला गाढ़ा दूध पिलाना चाहिए। यह बच्चे के लिए संजीवनी होता है। वहीं, अगर बच्चे दो वर्ष की आयु तक मां के दूध का सेवन करें तो उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी बेहतर होती है। शारीरिक और मानसिक विकास में भी योगदान देता है। कम से कम छह माह तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध देना चाहिए।
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डॉ. प्रसाद ने कहा कि गांवों में पले-बढ़े ज्यादातर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता शहरियों से ज्यादा होती है, क्योंकि गांव की महिलाएं स्तनपान का महत्व समझती हैं। शहरी भी इसके प्रति जागरूक हैं, पर वे विभिन्न वजहों से स्तनपान कराने से बचती हैं। आंकड़ाें की मानें तो शहरी क्षेत्र में 59.1 फीसदी जबकि गांवों में करीब 80 फीसदी महिलाएं बच्चों को 12 माह तक स्तनपान कराती हैं।
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छह माह बाद 52 फीसदी बच्चे हो जाते हैं वंचित
रिपोर्ट के अनुसार छह माह की आयु पूरी होने तक शहरी क्षेत्र के 52.6 फीसदी बच्चे मां के दूध से वंचित हो जाते हैं। जबकि, गांवों में सिर्फ 25.3 फीसदी ही इस अमृत से दूर होते हैं। शहर में छह से आठ माह के भीतर 42.4 फीसदी बच्चे ही दूध के साथ पोषक आहार ग्रहण करते हैं। वहीं, गांवों में यह आंकड़ा 72.6 फीसदी है। हालांकि, 12 माह के बाद पोषक आहार सेवन में ग्रामीण महिलाएं, शहरियों से 18.8 फीसदी पीछे हैं।

ज्यादातर शहरी महिलाओं में नहीं बन पाता है दूध
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रगति अग्रवाल के मुताबिक कई प्रसूताओं में दुग्धनलिका ठीक से न बनने पर दूध की आपूर्ति नहीं हो पाती। हार्मोनल उतार-चढ़ाव, डायबिटीज व थायराइड की चपेट में होने पर भी दूध बनने में अड़चन होती है। निप्पल पियर्सिंग कराने, फाइब्रॉएड बनने से भी दूध नलिका प्रभावित होती है। स्तनपान कराने के दौरान गर्भनिरोधक के सेवन का भी दुष्प्रभाव होता है।


स्तनपान कराने से मां को भी मिलती है सुरक्षा
गायनेकोलॉजिस्ट के मुताबिक एक वर्ष से ज्यादा समय तक स्तनपान कराने से बच्चों के साथ ही मां को भी कई सेहत संबंधी लाभ होते हैं। हृदय रोग, स्तन कैंसर, डिंबग्रंथि के कैंसर, गर्भाशय, उच्च रक्तचाप और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कम होता है।
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