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आरएफसी सिस्टम को बढ़िया बताते रहे... किसानों की शिकायतों पर योगी जांच कराते रहे

Fri, 23 Oct 2020 02:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2020 02:28 AM IST
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Revealed the RFC system as good ... Yogis used to conduct complaints on farmers' complaints
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : demo photo

22 साल बाद हुई ऐसी कार्रवाई, इसके पहले कल्याण सिंह ने लिया था एक्शन
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क्रय केंद्रों के टेंडरों में गड़बड़ी के लगे थे आरोप, सीएम तक पहुंचा था मामला

बरेली। पहली अक्तूबर से शुरू हुई धान खरीद प्रक्रिया पर मंडल में पूरी तरह बिचौलिए हावी हो चुके हैं। सरकारी क्रय केंद्रों से किसानों को अलग - अलग बहानों से टरकाने और बिचौलियों से धान खरीद की शिकायतें आए दिन अखबारों की सुर्खियां बनती रहीं लेकिन आरएफसी हर बार धान खरीद सिस्टम को बढ़िया बताते रहे। उधर, किसानों की शिकायतें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची तो गोपनीय ढंग से धान खरीद की निगहबानी शुरू हो गई। पीलीभीत डीएम को वायरल वीडियो भी मंडल में धान खरीद प्रक्रिया का सच उजागर करता रहा।
मंडल में सरकारी धान क्रय केंद्रों पर बिचौलियों के हावी होने और किसानों द्वारा मजबूरन अपना धान 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल मंडी में बेचने की हकीकत मुख्यमंत्री तक पहुंची तो आखिरकार आरएफसी को निलंबित कर दिया गया। 22 साल बाद ऐसा एक्शन हुआ है। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने तत्कालीन आरएफसी को निलंबित किया था। पिछले दिनों डीएम पीलीभीत ने अचानक क्रय केंद्रों का जायजा लिया था तब उन्होंने तमाम खामियां पकड़ी थीं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को फटकार लगाते हुए डीएम का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस वीडियो के जरिए भी मंडल में धान क्रय केंद्रों पर अनियमितताओं और बिचौलियों के हावी होने की जानकारी सीएम तक पहुंची थी। शासन को पता चला था कि मंडल में संचालित सरकारी क्रय केंद्रों पर मनमानी और बिचौलियों के हावी होने की वजह से किसान अपना धान औने पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं। सिर्फ प्रभावशाली लोगों का धान तौले जाने की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही थीं।
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टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे थे सवाल

पिछले दिनों पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए धान खरीद की समीक्षा की थी। मंडल में खराब प्रदर्शन पर उन्होंने आरएफसी पीके श्रीवास्तव को चेतावनी दी थी। इसके बाद उन्होंने मंडल में चुनिंदा क्रय केंद्रों पर विभागीय विजिलेंस जांच भी कराई। विजिलेंस ने बरेली समेत चारों जिलों के कुछ केंद्रों की स्थिति देखी और रिपोर्ट सौंप दी। सूत्रों ने बताया कि इसमें मंडल में किसानों को सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलना बताया गया था। खाद्य आयुक्त मनीष चौहान को भी स्थिति देखने बरेली रवाना किया था। उन्होंने केंद्रों की स्थित का जायजा सर्किट हाउस से ले लिया था। प्रभावित किसान उनसे मिलने गए थे लेकिन उन्होंने उनकी समस्या नहीं सुनी और कार में बैठकर लखनऊ रवाना हो गए। उधर, जनप्रतिनिधि लगातार क्रय केंद्रों पर हो रही मनमानी और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिलने की शिकायतें कर रहे थे।
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22 साल में दूसरे आरएफसी निलंबित

करीब 22 वर्ष पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने विभिन्न आरोपों के चलते आरएफसी एसपीएस सोलंकी का निलंबित किया था। उनके साथ आरएमओ समेत चार और अधिकारियों पर भी गाज गिरी थी। आरएफसी एससी गुप्ता को विजिलेंस ने रिश्वतखोरी में ट्रेप किया था। भ्रष्टाचार और गड़बड़ियों के चलते आरएफसी कार्यालय हमेशा चर्चित रहा है।

विधायक ने पीसीएफ धान क्रय केंद्र पर पकड़ी गड़बड़ी, डीएम से शिकायत

बरेली। नगर विधायक डॉ. अरुण कुमार धान क्रय केंद्रों पर हो रही गड़बड़ी और मनमानी की शिकायतों का जायजा लेने सीबी गंज पहुंचे। वहां पर जौहरपुर में पीसीएफ द्वारा संचालित क्रय केंद्र पर धान की धीमी खरीद और अन्य गड़गड़ी पर नाराजगी जताई। उन्होंने वहीं से फोन पर डीएम नीतीश कुमार से बात कर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने को कहा।

गुरुवार दोपहर विधायक डॉ. अरुण ने नगर निगम सभासद सुखदीप सिंह, वेदराम मौर्य, मुकेश देवल, धर्मवीर आदि के साथ जौहर पुर क्रय केंद्र पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने आरएफसी कार्यालय से अधिकारी भी निरीक्षण के लिए नामित करा लिए थे। इसके तहत डिप्टी आरएमओ सुनील भारती ने क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी ज्ञान चंद वर्मा को नामित कर दिया था। विभागीय अधिकारी की मौजूदगी में पीसीएफ द्वारा संचालित केंद्र पर खरीद नाममात्र को हो रही थी। किसानों को केंद्र और सरकारी योजना की जानकारी तक नहीं दी गई। उन्होंने मौके पर स्टाफ से सवाल किए तो कर्मचारी सही जवाब नहीं दे पाया। विधायक ने इसकी शिकायत डीएम से फोन पर की। विधायक ने डीएम से कहा कि कार्रवाई कराएं और बिचौलिओं को हावी नहीं होने दिया जाए।
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