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Bareilly News: भू उपयोग बदलने में राजस्व अधिकारियों की भी तय होगी जिम्मेदारी
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बरेली। भू अधिग्रहण घोटाले में शामिल राजस्व अधिकारियों को चिह्नित किया जाएगा। भू उपयोग बदलने में उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। अब तक सिर्फ दो-दो लेखपाल और अमीन ही निलंबित हुए हैं। सात और लेखपाल निलंबित हो सकते हैं, क्योंकि इनके नाम कमिश्नर की ओर से भेजी गई 23 अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची में शामिल हैं। इसमें किसी तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कानूनगो का नाम नहीं है।
अब तक इन पर कोई आंच नहीं आई, जबकि अधिग्रहण की अधिसूचना के बाद भू-उपयोग बदले जाने पर तमाम सवाल उठे हैं। भूमि की श्रेणी में परिवर्तन अधिकारियों के हस्ताक्षर के बगैर नहीं होता है। जानकारों का कहना है कि जांच के दौरान राजस्व अधिकारियों ने यह कहते हुए अपना बचाव किया है कि अधिग्रहण की अधिसूचना के बारे में उन्हें एनएचएआई और भूमि अध्याप्ति अधिकारी की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। कमिश्नर और डीएम की जांच रिपोर्ट में इसका उल्लेख भी है, लेकिन शासन इस बिंदु पर विस्तृत जांच कराने की तैयारी में है।
स्थानीय अधिकारी इस सवाल पर बोलने से बच रहे हैं। वह शासन के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। अगर शासन के आदेश आते हैं तो स्थानीय स्तर पर भी छानबीन हो सकती है, वरना एसआईटी या किसी अन्य एजेंसी की ओर से होने वाली जांच में भी इस मामले में सभी पक्षों को खंगालकर हकीकत की तह तक पहुंचा जा सकता है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, भ्रष्टाचार की परतें खुलती जाएंगी।
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मुख्यमंत्री की ओर से मंगलवार को जब पांच अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए गए तो यह भी कहा गया कि इसमें जो भी राजस्व अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कानूनगो शामिल रहे हैं, उन्हें भी चिह्नित किया जाए। अमर उजाला ब्यूरो
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अब तक इन पर कोई आंच नहीं आई, जबकि अधिग्रहण की अधिसूचना के बाद भू-उपयोग बदले जाने पर तमाम सवाल उठे हैं। भूमि की श्रेणी में परिवर्तन अधिकारियों के हस्ताक्षर के बगैर नहीं होता है। जानकारों का कहना है कि जांच के दौरान राजस्व अधिकारियों ने यह कहते हुए अपना बचाव किया है कि अधिग्रहण की अधिसूचना के बारे में उन्हें एनएचएआई और भूमि अध्याप्ति अधिकारी की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। कमिश्नर और डीएम की जांच रिपोर्ट में इसका उल्लेख भी है, लेकिन शासन इस बिंदु पर विस्तृत जांच कराने की तैयारी में है।
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स्थानीय अधिकारी इस सवाल पर बोलने से बच रहे हैं। वह शासन के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। अगर शासन के आदेश आते हैं तो स्थानीय स्तर पर भी छानबीन हो सकती है, वरना एसआईटी या किसी अन्य एजेंसी की ओर से होने वाली जांच में भी इस मामले में सभी पक्षों को खंगालकर हकीकत की तह तक पहुंचा जा सकता है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, भ्रष्टाचार की परतें खुलती जाएंगी।
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मुख्यमंत्री की ओर से मंगलवार को जब पांच अधिकारियों-कर्मचारियों को निलंबित करने के निर्देश दिए गए तो यह भी कहा गया कि इसमें जो भी राजस्व अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और कानूनगो शामिल रहे हैं, उन्हें भी चिह्नित किया जाए। अमर उजाला ब्यूरो