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शोध: नमी और तापमान में गिरावट से बढ़ती है वायरस की सक्रियता

Sun, 09 May 2021 11:54 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 09 May 2021 11:54 PM IST
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Research: Increased virus activity due to drop in humidity and temperature
बरेली। नमी के साथ तापमान में गिरावट का होना कोरोना वायरस के लिए अनुकूल माहौल बना सकता है। आईआईटी भुवनेश्वर और एम्स दिल्ली की ओर से किए गए संयुक्त शोध से यह निष्कर्ष हासिल किया गया है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि तापमान में उतार-चढ़ाव इसलिए भी कोरोना संक्रमण के लिए अनुकूल है क्योंकि इससे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और ऐसे में वे अपेक्षाकृत आसानी से बीमारियों के शिकार हो जाते हैं।
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नए शोध के मुताबिक बारिश को भी कोरोना संक्रमण के फैलाव के लिए अनुकूल माना जा रहा है। क्योंकि इससे न सिर्फ तापमान में उतार-चढ़ाव होता है बल्कि वातावरण में नमी भी बढ़ती है। विशेषज्ञों के मुताबिक नम हवा में वायरस लंबे समय तक बने रहकर तेजी से संक्रमण फैलाने की वजह बन सकता है। आईआईटी भुवनेश्वर और दिल्ली एम्स के शोध में दावा किया गया है कि 24 घंटे में औसतन 25 मिलीमीटर तक बारिश होने पर वातावरण में नमी का स्तर 95 फीसदी तक पहुंच जाता है। अनुमान जताया गया है कि इससे तापमान गिरता है तो वायरस को सक्रिय रहने के लिए अनुकूल माहौल मिल जाता है। ऐसी स्थिति में लोगों को घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाए रहना चाहिए और उसे बार-बार चेहरे से हटाने या छूने से बचना चाहिए।
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मानसून में ही पीक पर पहुंचा था संक्रमण
शहर में कोरोना संक्रमण के पिछले साल के आंकड़ों पर गौर करें तो मार्च में संक्रमण के छह ही केस थे जो अप्रैल में 12 हुए और मई में दौ सौ से ज्यादा पहुंच गए थे। पिछले साल मई में ही करीब 69 एमएम बारिश हुई थी जिसके बाद जून में कोरोना संक्रमण के हर दिन 50 से ज्यादा मामले सामने आने लगे थे। जुलाई में प्रतिदिन दौ सौ से ज्यादा केस मिले और मृत्युदर भी बढ़ गई थी। माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल का कहना है कि नमी का प्रतिशत सौ फीसदी के करीब पहुंचने पर ही वायरस की सक्रियता बढ़ी होगी। इसके साथ लोगों ने कोविड प्रोटोकॉल का भी ठीक से पालन नहीं किया लिहाजा ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आए।
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पानी के छींटों के जरिए भी फैल सकता है वायरस
विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस पानी की फुहारों के जरिए भी हवा में फैल सकता है जिसे शॉवरहेड्स एयरोसॉल ट्रांसमिशन कहते हैं। संक्रमित पानी या सीवेज की लीकेज से इकट्ठे पानी के छींटे हवा में तैरते हुए संक्रमण का कारण बन सकते हैं। माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. गोयल का कहना है कि बरेली में जलभराव एक बड़ी समस्या है। लीकेज की भी दिक्कत है। ऐसे में अगर किसी संक्रमित ने सड़क पर इकट्ठे पानी में थूक दिया है और किसी पर उस पानी के छींटे पड़ते हैं तो वायरस उस तक पहुंच सकता है। इसलिए लीकेज, अशुद्ध पानी, जलभराव की समस्या को भी तत्काल खत्म करना जरूरी है।

एक डिग्री तापमान घटने पर 0.9 फीसदी बढ़ती है वायरस की सक्रियता
माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल ने बताया कि वायरस के संक्रमण पर तापमान का क्या असर होता है, इस पर शोध जारी है। अब तक हुए शोधों में दावा किया गया है कि तापमान के सामान्य से एक डिग्री नीचे गिरते ही वायरस की सक्रियता 0.9 फीसदी तक बढ़ जाती है। हालांकि एक डिग्री तापमान बढ़ने का वायरस की सक्रियता पर 0.6 फीसदी ही असर होता है। ये शोध बारिश से पहले किए गए थे लिहाजा अंतिम निष्कर्ष अब मानसून आने पर ही निकाला जा सकता है।


तापमान का असर सभी जीवों पर
आईएमए अध्यक्ष डॉ. मनोज अग्रवाल के मुताबिक वातावरण में मौजूद प्रत्येक वस्तु पर तापमान का असर होता है। चाहे वह सजीव हो या निर्जीव। जीवों की शारीरिक क्रियाओं को भी तापमान प्रभावित करता है। बारिश या नमी ज्यादा होने पर ही बैक्टीरिया सक्रिय होते हैं जिनसे मलेरिया, डायरिया, निमोनिया, खांसी, जुकाम, बुखार, टायफाइड आदि संक्रामक रोगों को फैलने में मदद मिलती है।
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