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शोध : प्रत्येक खाद्य सामग्री में मिलाकर न खाएं कड़वी दवा, हो सकती है बेअसर

Mon, 26 Feb 2024 01:43 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 26 Feb 2024 01:43 AM IST
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Research: Do not eat bitter medicine by mixing it with every food item, it may be ineffective.
बरेली। इंसान और पशुओं को कई जीवाणुनाशक हर्बल दवाएं दी जाती हैं, जिन्हें प्रत्येक खाद्य सामग्री में मिलाकर सेवन करने से उनकी क्षमता कम हो जाती है। यह दावा आईवीआरआई (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान) के महामारी विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने किया है।
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विभाग प्रमुख डॉ. भोजराज सिंह के मुताबिक अक्सर पशुओं और बच्चों को कड़वी दवाएं खाने-पीने की दूसरी चीजों के साथ मिलाकर दी जाती हैं। जीवाणुओं को समाप्त करने में सक्षम तीन हर्बल तेल (दालचीनी, अजवाइन और थाइम) पर अध्ययन किया। ये जलन पैदा करते हैं। बतौर लेप या निगलने के लिए अक्सर दूसरे तेलों के साथ मिलाकर इनका प्रयोग किया जाता है। पता चला कि जलन को कम करने वाले कई तेल इन तेलों का असर काफी हद तक खत्म कर देते हैं।
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गाय-भैंस में अफारा, डायरिया, त्वचा संबंधित जीवाणुजनित बीमारियों के इलाज में भी अजवाइन और दालचीनी का तेल या चूरन खिलाया जाता है। यहां भी शोध में जो नतीजे मिले, उनमें असर बहुत कम रहा। कई जीवाणुओं पर तेल का कोई असर नहीं हुआ। कई जीवाणु कम हुए पर उनके बढ़ने की गति बरकरार रही।
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डॉ. भोजराज के मुताबिक बीते वर्षों में शोध के बाद संस्थान के वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि दालचीनी, अजवाइन, थाइम के तेल में रोगकारक जीवाणुओं को समाप्त करने की क्षमता अन्य हर्बल तेल के मुकाबले ज्यादा रही। यहां तक कि कई एंटीबायोटिक भी जीवाणुनाशक के तौर पर इनका मुकाबला नहीं कर सकते।

जैतून के तेल व ग्लिसरीन के साथ मलहम का असर बरकरार

बाजार में मिलने वाले मलहम अक्सर सॉफ्ट पैराफिन में बनते हैं। पशुपालक, घर में मौजूद किसी भी तेल में इसे मिलाकर पशुओं को लगाते हैं। लिहाजा जैतून, सरसों, सूरजमुखी, राइस ब्रान पाम, मूंगफली, तिल, अवाकाडो, जोजोबा, अरंडी, अलसी, सोयाबीन के तेलों व लिक्विड पैराफिन, ग्लिसरीन पर अध्ययन किया गया। जीवाणुनाशक अजवाइन, दालचीनी और थाइम के तेल अगर जैतून के तेल या ग्लिसरीन के साथ प्रयोग किए जाएं तो प्रभावी रहते हैं। अन्य पैराफिन में जीवाणुनाशक गुण लगभग समाप्त हो जाता है।

ये रहा परिणाम

डाइमिथाइल सल्फोक्साइड और ग्लिसरीन के साथ तनुकरण के बाद भी थाइम तेल ने अपनी रोगाणुरोधी गतिविधि को बनाए रखा। अजवाइन तेल ने डाइमिथाइल सल्फोक्साइड के अलावा अन्य सभी मंदक में अपनी जीवाणुरोधी गतिविधि को खो दिया। दालचीनी का तेल डाइमिथाइल सल्फोक्साइड की तुलना में ग्लिसरीन, वनस्पति और खनिज तेलों में आंशिक रूप से रोगाणुरोधी क्षमता खो देता है। अरंडी के तेल में दालचीनी का तेल मिलाने पर असर शून्य रहा।
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