फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   religious

प्रशासन की ऐसी ही चूक से दस साल पहले बिगड़े थे हालात

Tue, 09 Jul 2019 02:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jul 2019 02:09 AM IST
विज्ञापन
religious
बरेली। दस साल बाद एक बार फिर वही हालात हैं जब शहर में अचानक दंगे की आग भड़क गई थी। फर्क इतना ही है कि मार्च 2010 में बारावफात के जुलूस पर विवाद हुआ था और इस बार उर्स का स्थान बदलने और परमिशन रद करने से माहौल गरमा गया है। हालांकि इस बार प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। अपनी इस चूक को समझने के बाद अफसर पूरे दमखम से सुरक्षा व्यवस्था और शांति का माहौल बनाए रखने के लिए जुटे हुए हैं।
विज्ञापन

दो मार्च 2010 की शाम का खौफनाक मंजर आज भी कोहाड़ापीर और उसके आसपास के लोग नहीं भूल पाएं हैं। इस शाम को यहां आगजनी और लूटपाट के साथ जमकर हिंसा हुई थी। दंगाई कोहाड़ापीर से राजेंद्रनगर तक हमला करते हुए निकले और इसके बाद कई जगह उपद्रव हुआ था। तत्कालीन डीएम और एसएसपी भी एक गली में फंस गए थे। जिला प्रशासन ने स्थिति ज्यादा खराब होने पर कर्फ्यू लगा दिया। पांच दिन बाद मौलाना तौकीर रजा खां की गिरफ्तारी और रिहाई के बाद हालात और खराब हो गए। तत्कालीन कमिश्नर माजिद अली की शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इस स्थिति के लिए जिला प्रशासन की चूक को जिम्मेदार बताया गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि जिला प्रशासन ने दो मार्च को बारावफात के जुलूस की परमिशन देना ही विवाद की वजह बना क्योंकि इसी कारण बारावफात पर दो जुलूस निकले। इस पर बसपा सरकार ने तत्कालीन डीएम आशीष गोयल को रात में ही हटाकर पीलीभीत के डीएम अनिल गर्ग ने बरेली तैनात कर दिया। इसके साथ प्रशासन ने 42 मुकदमे दर्ज किए थे।
विज्ञापन

इस बार फिर जिला प्रशासन ने इस्लामिया ग्राउंड पर पहले उर्स की अनुमति दी और फिर हिंदूवादी संगठनों के विरोध पर उसे रद्द कर दिया। अब मथुरापुर में बरसी के कार्यक्रम की अनुमति दी गई है, लेकिन वहां भी इसका विरोध हो रहा है। आयोजक भी प्रशासन के इस फैसले से नाराज हैं। मामला शासन तक पहुंचने के बाद अफसर बेचैन हैं। शहर में अफवाहों का माहौल है। हाल ही में नगर निगम में धारा 144 लगाकर भी अफसरों ने ऐसी ही चूक की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


अफसर बोले- नो टेंशन
प्रशासनिक अफसर अपनी गलती मानने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि फोर्स पर्याप्त तादाद में तैनात रहेगी। एक अफसर ने बताया कि 2010 और आज की स्थिति में बहुत फर्क है। उस समय बसपा सरकार थी और अब भाजपा की है। बसपा सरकार में वोट बैंक के लिए कुछ भी करने के लिए कानून से अलग काम होते थे लेकिन मौजूद सरकार ऐसा नहीं करती है, इसलिए कोई टेंशन नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed