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पिता की आज्ञा पाकर प्रभु श्रीराम गए वन, भरत ने ठुकरा दी राजगद्दी
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बरेली। संजय कम्युनिटी हाल में चल रहे पं. राधेश्याम कथावाचक स्मृति समारोह के दूसरे दिन दो नाटकों का मंचन किया गया। पहला नाटक गवाह बना मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श का तो दूसरा भाई के अटल त्याग और प्रेम का। मंगलवार को कार्यक्रम का शुभारंभ जयपुर के प्रसिद्ध लेखक हरिशंकर शर्मा ने किया। इस मौके पर ‘राधेश्याम डायरी का व्याकरण’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
‘दशरथ-कैकेयी संवाद’ नाटक के मंचन में दर्शाया कि भगवान श्रीराम को जब पता चलता है कि माता कैकेयी चाहती हैं कि वह भरत को राजगद्दी सौंपकर खुद 14 वर्ष के वनवास के लिए चले जाएं तो वह तत्काल राजपाट छोड़कर वनगमन को राजी हो गए। कलाकारों के शानदान अभिनय और पं. राधेश्याम कथावाचक की मार्मिक पंक्तियों ने मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। वहीं, मानव सेवा योग संस्थान की ओर से मंचित ‘भरत मिलाप’ नाटक में दर्शाया गया कि जब भरत को पता चलता है कि प्रभु श्रीराम वन को चले गए हैं तो वह माता कैकेयी से नाराज होते हैं। भाई राम को वन से वापस लेने जाते हैं लेकिन श्रीराम के आदेश से वापस आते समय चरण पादुकायें ले आते हैं। इस प्रसंग ने लोगों को भारत की सनातन संस्कृति से परिचित कराकर गौरवान्वित होने का अवसर दिया। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष एडवोकेट घनश्याम शर्मा, सचिव कुलभूषण शर्मा, गिरधर गोपाल खंडेलवाल, राजेश गुप्ता, समयून खान, मोहित, आशीष गुप्ता, दानिश जमाल व अन्य समिति के सदस्य मौजूद रहे।
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‘दशरथ-कैकेयी संवाद’ नाटक के मंचन में दर्शाया कि भगवान श्रीराम को जब पता चलता है कि माता कैकेयी चाहती हैं कि वह भरत को राजगद्दी सौंपकर खुद 14 वर्ष के वनवास के लिए चले जाएं तो वह तत्काल राजपाट छोड़कर वनगमन को राजी हो गए। कलाकारों के शानदान अभिनय और पं. राधेश्याम कथावाचक की मार्मिक पंक्तियों ने मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। वहीं, मानव सेवा योग संस्थान की ओर से मंचित ‘भरत मिलाप’ नाटक में दर्शाया गया कि जब भरत को पता चलता है कि प्रभु श्रीराम वन को चले गए हैं तो वह माता कैकेयी से नाराज होते हैं। भाई राम को वन से वापस लेने जाते हैं लेकिन श्रीराम के आदेश से वापस आते समय चरण पादुकायें ले आते हैं। इस प्रसंग ने लोगों को भारत की सनातन संस्कृति से परिचित कराकर गौरवान्वित होने का अवसर दिया। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष एडवोकेट घनश्याम शर्मा, सचिव कुलभूषण शर्मा, गिरधर गोपाल खंडेलवाल, राजेश गुप्ता, समयून खान, मोहित, आशीष गुप्ता, दानिश जमाल व अन्य समिति के सदस्य मौजूद रहे।
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