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पुष्प ज्ञान, शांति और त्रिशूल विनाश का द्योतक

Mon, 30 Sep 2019 02:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 30 Sep 2019 02:08 AM IST
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बरेली। दीदी पुष्पांजलि ने कहा कि संपूर्ण जगत मातेश्वरी की रचना है, जिसका पहला स्वरूप मां शैलपुत्री के रूप में है। यह पूर्व जन्म में प्रजापति दक्षराज की कन्या थीं, उनका नाम सती था। एक बार दक्षराज ने यज्ञ में शिवजी को न बुलाकर उनका अपमान किया, जिससे क्रोधित होकर सती ने उसी यज्ञ वेदी में आत्मदाह कर लिया। अगले जन्म में देवी सती ने शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री के नाम से जानी गईं। पार्वती उनका ही उपनाम है। इससे पहले महाराजा अग्रसेन पार्क से कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा को केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
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आनंद आश्रम में श्री नवदुर्गा महोत्सव आयोजन समिति के तत्वावधान में हुई श्रीमद्भागवत के पहले सत्र का का उद्घाटन प्रदेश सरकार के जल शक्ति राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओखल ने किया। इसके बाद कथा शुरू हुई। दीदी पुष्पांजलि ने मां शैलपुत्री के दिव्य रूप का वर्णन करते हुए कहा कि माता के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल पुष्प होता है। त्रिशूल जहां पापियों के विनाश का घोतक है वहीं कमल पुष्प ज्ञान और शांति का प्रतीक है।
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वह कहती कहती हैं कोई आयु से बड़ा तो कोई शरीर से बड़ा पर लेकिन ज्ञान से बड़ा वो ही सबसे बड़ा है। उन्होंने एक बार महिषासुर दैत्य ने जब स्वर्ग में उत्पात मचाया तो देवताओं ने मां की आराधना की माँ ने अपने दुर्गा रूप के पूर्ण स्वरूप में प्रकट होकर उसका संहार किया तबसे मां को महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। कार्यक्रम में नबाबगंज विधायक केसर सिंह गंगवार, शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार, संतोष अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, आयुष अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
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