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हजरत अली असगर की शहादत को किया याद
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बरेली। मोहर्रम की छह तारीख हजरत अली की शहादत से मंसूब है। उन्हीं की याद में शुक्रवार को जगह-जगह मजलिसें, मातम और नौहा ख्वानी हुई।
इस मौके पर इमामबाड़ा छिद्दी हुसैन में बाराबंकी से आए मौलाना जैनुल हसन ने जनाबे असगर के मसायब पढ़े। इसमें छह माह के नन्हें असगर अली की इस्लाम पर कुर्बानी का किरदार पेश किया गया।
रात में इमामबाड़ा सुरूर रिजवी मोती मियां के फाटक में अंजुमन आल इंडिया गुलदस्ते हैदरी ने मातम किया। इसमें नौहा ख्वानी अली हाशिम जैदी, गुलरेज तुराबी, हानी बरेलवी और जमाल जैदी ने की। एक अशरे का मातम अंजुमन गुलदस्ते हैदरी ने हसनैन रजा आब्दी के इमामबाडे़ पर हुआ। इस मौैके पर सफदर अली काजमी, असद जैदी, हसन मियां आदि मौजूद रहे।
इससे पहले शुक्रवार को पहली मजलिस सुबह इमामबाड़ मोहम्मद शाह में हुई, उसके बाद इमामबाड़ा हकीम आगा साहब, वसी हैदर, छिद्दी मोहम्मद जैदी, मुहम्मद हुसैन में मजलिसें आयोजित की गईं। दिन भर चले मजलिसों के सिलसिले में जफर अब्बास नकवी, महमूद हसन, सरवर जैदी, एजाज नकवी, शकील हैदर, जमाल जैदी, अली आलिम जैदी आदि मौजूद रहे।
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इस मौके पर इमामबाड़ा छिद्दी हुसैन में बाराबंकी से आए मौलाना जैनुल हसन ने जनाबे असगर के मसायब पढ़े। इसमें छह माह के नन्हें असगर अली की इस्लाम पर कुर्बानी का किरदार पेश किया गया।
रात में इमामबाड़ा सुरूर रिजवी मोती मियां के फाटक में अंजुमन आल इंडिया गुलदस्ते हैदरी ने मातम किया। इसमें नौहा ख्वानी अली हाशिम जैदी, गुलरेज तुराबी, हानी बरेलवी और जमाल जैदी ने की। एक अशरे का मातम अंजुमन गुलदस्ते हैदरी ने हसनैन रजा आब्दी के इमामबाडे़ पर हुआ। इस मौैके पर सफदर अली काजमी, असद जैदी, हसन मियां आदि मौजूद रहे।
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इससे पहले शुक्रवार को पहली मजलिस सुबह इमामबाड़ मोहम्मद शाह में हुई, उसके बाद इमामबाड़ा हकीम आगा साहब, वसी हैदर, छिद्दी मोहम्मद जैदी, मुहम्मद हुसैन में मजलिसें आयोजित की गईं। दिन भर चले मजलिसों के सिलसिले में जफर अब्बास नकवी, महमूद हसन, सरवर जैदी, एजाज नकवी, शकील हैदर, जमाल जैदी, अली आलिम जैदी आदि मौजूद रहे।
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