पशु आहार के नाम पर मंगाते हैं बड़ी कंपनियों की खराब हो चुकी नमकीन, मिक्सचर बनाकर बेचते हैं
हल्दीराम, बीकानेरी, बीकाजी, पारले, बालाजी, क्रेक्स जैसी बड़ी कंपनियां जांच में गुणवत्ता कम होने पर माल करती हैं रिजेक्ट, मिलावटखोर नीलामी से पशुआहार के नाम पर लॉट लाकर नई पैकिंग में खपा रहे।
विस्तार
सिस्टम की सरपरस्ती में ये मिलावटखोर हम-आपको क्या-क्या खिला रहे हैं, इसकी तो कभी कल्पना भी नहीं की गई होगी। बड़ी कंपनियां उत्पाद में जरा भी कमी पाते ही नमकीन रिजेक्ट कर देती हैं। मिलावटखोर यही रिजेक्ट नमकीन सस्ते दामों पर नीलामी में पशु आहार के नाम पर खरीद लेते हैं और फिर लोकल ब्रांड में बदलकर हम-आपको खिला देते हैं। हर दिन बड़े स्तर पर घटिया नमकीन बनाकर बाजार में खपाई जा रही है। उपभोक्ताओं को यही पता नहीं कि वह क्या खा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक रिजेक्ट नमकीन से बने उत्पाद स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं।
होली पर आप खानपान के प्रति सावधान रहें, वरना इन मिलावटखोरों ने तो अपने मुनाफे के लिए आपको बीमार करने का इंतजाम कर ही दिया है। चूंकि होली पर सबसे ज्यादा खपत नमकीन की होती है, सो मिलावट खोर इसी में मुनाफे के रास्ते तलाश रहे हैं। हर कोई चाय के साथ नमकीन-बिस्कुट ऑफर करता है, लेकिन आपको परोसी गई नमकीन का ब्रांड क्या है और उसकी गुणवत्ता क्या है, यह सब खाने के बाद ही पता चलेगी।
हालांकि घटिया और मिलावटी नमकीन का स्वाद बदला होता है। उसमें अजीब से चिकनाई महसूस होती है। सस्ती नमकीन होने से इसकी खपत में कोई कमी नहीं होती है, जबकि ब्रांडेड बड़ी कंपनियों का उत्पाद ऐसा महसूस नहीं होने देता है। जिले भर में हर दिन एक करोड़ रुपये से ज्यादा का नमकीन का कारोबार होता है। गांव-मोहल्लों तक अखाद्य मिश्रण से तैयार नमकीन के घटिया उत्पाद पहुंच बना चुके हैं। इनमें कई उत्पाद हूबहू नामीगिरामी कंपनी जैसे नकल से तैयार होते हैं।
रिजेक्ट नमकीन यानी पशुआहार
बाजार सूत्रों ने बताया कि हल्दीराम, बीकानेरी, बीकाजी, पारले, बालाजी, क्रेक्स आदि बड़ी कंपनियां गुणवत्ता के प्रति काफी संवेदनशील रहती हैं। नामीगिरामी कंपनियां हाईटेक उपकरणों से अपने उत्पादों की टेस्टिंग करती हैं। निर्धारित गुणवत्ता में जरा सी खामी मिलने पर पूरी लॉट ही रिजेक्ट कर दी जाती है। सूत्रोें ने बताया कि रिजेक्ट नमकीन के स्टॉक को पशु आहार घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद इसकी सार्वजनिक नीलामी होती हैं। मिलावटखोर इस नीलामी की लॉटें खरीद लेते हैं। इसका इस्तेमाल लोकल ब्रांड और लूज नमकीन निर्माता करते हैं। यानी पशुआहार के साथ अपना लोकल उत्पाद तैयार कर नया ब्रांड बनाकर बाजार में उतारा जाता है। सस्ता होने से गांव-मोहल्लों में इसकी खपत ब्रांडेड नमकीन से ज्यादा है, क्योंकि एक किलो लोकल ब्रांड मिलावटी नमकीन 50 से 70 रुपये में उपलब्ध हो जाती है। शहर में आधा दर्जन कारखानों में मिलावट का खेल होता है।
दिवाली से पहले पकड़ा गया था खेल
दिवाली से पहले रिजेक्ट नमकीन यानी पशुआहार के नाम पर नीलामी में ली गई नमकीन को प्रशासन टीम ने पकडा था, लेकिन उसका लैब में परीक्षण नहीं हो पाने से कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। बताया जाता है कि यह रिजेक्ट नमकीन दिल्ली से बरेली में मिलावट के लिए ही लाई जा रही थी। पूछताछ में मिलावट करने वाले कारखाने और कारोबारी का नाम भी खुला था। इसके बावजूद एफएसडीए विभाग सक्रिय नहीं हो पाया था। ब्रह्मपुरा स्थित कारखाने पर छापा मारा गया था और वहां करीब ढाई क्विंटल से ज्यादा घटिया नमकीन नष्ट कराने का दावा किया गया था। विभाग ने इसे गुडवर्क दिखाकर मामला रफादफा कर दिया था।
हर दिन 100 टन की खपत
बाजार सूत्रों ने बताया कि जिले में करीब सौ टन नमकीन का रोजाना कारोबार होता है। होली पर ज्यादा मांग होने से लोकल स्तर पर निर्माण तेजी से हो रहा है। रोजाना करीब 25 टन रिजेक्ट घटिया नमकीन बाजार में खपाई जा रही है। सूत्रों ने बताया कि प्रतिदिन एक करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार गांव-मोहल्लों तक फैला है।
रिजेक्ट नमकीन भी हुई महंगी
तीन-चार साल पहले ब्रांडेड कंपनियां रिजेक्ट नमकीन यानी पशुआहार दस रुपये किलो की दर से नीलाम कर देती थीं, लेकिन मिलावटखोरों के खेल और प्रतिस्पर्धा ने इसकी कीमत तीन तक गुना बढ़ा दी। त्योहार विशेष और ज्यादा मांग होने पर रिजेक्ट नमकीन की नीलामी कीमतें भी बढ़ जाती हैं। बताया जाता है कि होली को देखते हुए रिजेक्ट नमकीन 35 से 37 रुपये किलो तक सप्लाई हो रही है। इसलिए मिलावटखोरों ने लोकल ब्रांड और लूज नमकीन पांच से दस रुपये प्रति किलो महंगी कर दी है।
सस्ती नमकीन के लिए सस्ते सामान का बाजार भी
रिजेक्ट माल और लोकलमेड नमकीन में मिलावटखोर नमक, खटाई, मिर्च आदि भी घटिया ही मिलाते हैं। लोकल और मिलावटी नमकीन में इस्तेमाल होने वाले मसालों आदि का बाजार भी अलग है। कारोबारी पांच रुपये प्रति किलो के हिसाब से खास नमक खरीदते हैं, जबकि खुले बाजार में ऐसा नमक नहीं मिलता है। मिर्च पाउडर भी रिजेक्ट श्रेणी यानी सेकंड मिर्च मिलाते हैं। खटास लाने के लिए टाटरी आदि मिलाकर स्वादिष्ट बना देते हैं।
मिलावटखोरी रोकने के लिए विभाग सक्रिय रहता है। नमकीन में पशुआहार के नाम पर रिजेक्ट उत्पाद मिलाकर नया ब्रांड बनाने की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी।
- धर्मराज मिश्रा, जिला अभिहित अधिकारी