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Bareilly News: स्कूल बस्ते का बोझ करें कम, गुणवत्ता पर दिया जोर
Wed, 08 Apr 2026 03:39 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Wed, 08 Apr 2026 03:39 AM IST
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बरेली। नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) के शुरू होते ही अभिभावकों पर पड़ रहे किताबों, स्कूल ड्रेस और बढ़ती फीस के बोझ को लेकर अमर उजाला की ओर से चलाई जा रही मुहिम का बड़ा असर देखने को मिला है। इस गंभीर विषय पर चर्चा के लिए मंगलवार को अमर उजाला कार्यालय में एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें अभिभावक संघ और स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान अभिभावक संघ ने कहा कि स्कूल बस्ते का बोझ कम करें। वहीं स्कूल एसोसिएशन ने पढ़ाई की गुणवत्ता पर जोर दिया।
अभिभावक संघ के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन चुनिंदा दुकानों से ही किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव बना रहे हैं। एनसीईआरटी की जगह महंगी प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें थोपी जा रही हैं, जिससे बजट तीन से चार गुना बढ़ गया है। अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना ने बताया कि निजी स्कूलों में आरटीई के माध्यम से प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है। एनसीईआरटी की किताबें अभिभावकों को कम दामों पर उपलब्ध हो सकती है, लेकिन स्कूलों की ओर से निजी प्रकाशन की किताबों को लगाकर अभिभावकों की जेब पर बेवजहा बोेझ बनाया जाता है। वहीं इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दिए जाने पर जोर दिया। इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष निर्भय बेनीवाल ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबों में पर्याप्त कंटेंट नहीं है, जिसके कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में समस्या आती है। बिल्डिंग का किराया, बिजली और स्टाफ की बढ़ती सेलरी के कारण फीस में मामूली बढ़ोतरी अनिवार्य है। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को जहां से मन करे वहां से खरीदने की बात कहीं। कहा कि स्कूल प्रबंधन शासन की शुल्क नियमावली के अनुसार ही फीस वृद्धि करते हैं। अगर किसी स्कूल की फीस नियमों से ज्यादा हो तो अभिभावक सबसे पहले स्कूल के प्रधानाचार्य से इसकी शिकायत करें। निस्तारण नहीं होने पर वह डीएम की अध्यक्षता में बनाई गई जिला शुल्क निर्धारण समिति से इसकी शिकायत कर सकते हैं।संवाद में अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना, प्रतिनिधि राहुल यादव, समन्वयक संजय अरोरा, सचिव सुनील कुमार सक्सेना और इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के सचिव अंकित बग्गा, सोबती पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य गुरदीप सिंह, पद्मावती स्कूल के प्रबंधक पारुष अरोड़ा, जीडी गोयंका के जितेंद्र नाथ श्रीवास्तव, हरित पब्लिक स्कूल से सौभाग्य चौधरी, बेदी इंटरनेशनल की प्रधानाचार्य जसमीत कौर सहानी आदि मौजूद रहे।
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अभिभावक संघ के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन चुनिंदा दुकानों से ही किताबें और ड्रेस खरीदने का दबाव बना रहे हैं। एनसीईआरटी की जगह महंगी प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें थोपी जा रही हैं, जिससे बजट तीन से चार गुना बढ़ गया है। अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना ने बताया कि निजी स्कूलों में आरटीई के माध्यम से प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता है। एनसीईआरटी की किताबें अभिभावकों को कम दामों पर उपलब्ध हो सकती है, लेकिन स्कूलों की ओर से निजी प्रकाशन की किताबों को लगाकर अभिभावकों की जेब पर बेवजहा बोेझ बनाया जाता है। वहीं इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा दिए जाने पर जोर दिया। इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष निर्भय बेनीवाल ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबों में पर्याप्त कंटेंट नहीं है, जिसके कारण बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में समस्या आती है। बिल्डिंग का किराया, बिजली और स्टाफ की बढ़ती सेलरी के कारण फीस में मामूली बढ़ोतरी अनिवार्य है। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों को जहां से मन करे वहां से खरीदने की बात कहीं। कहा कि स्कूल प्रबंधन शासन की शुल्क नियमावली के अनुसार ही फीस वृद्धि करते हैं। अगर किसी स्कूल की फीस नियमों से ज्यादा हो तो अभिभावक सबसे पहले स्कूल के प्रधानाचार्य से इसकी शिकायत करें। निस्तारण नहीं होने पर वह डीएम की अध्यक्षता में बनाई गई जिला शुल्क निर्धारण समिति से इसकी शिकायत कर सकते हैं।संवाद में अभिभावक संघ के अध्यक्ष अंकुर सक्सेना, प्रतिनिधि राहुल यादव, समन्वयक संजय अरोरा, सचिव सुनील कुमार सक्सेना और इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन के सचिव अंकित बग्गा, सोबती पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य गुरदीप सिंह, पद्मावती स्कूल के प्रबंधक पारुष अरोड़ा, जीडी गोयंका के जितेंद्र नाथ श्रीवास्तव, हरित पब्लिक स्कूल से सौभाग्य चौधरी, बेदी इंटरनेशनल की प्रधानाचार्य जसमीत कौर सहानी आदि मौजूद रहे।
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