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270 फिल्मों के बराबर हुई एमएलसी चुनाव की रिकॉर्डिंग
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बरेली। हाल ही में बरेली में हुए शिक्षक एमएलसी चुनाव के मतदान और मतगणना की वीडियो कवरेज 270 जीबी यानी करीब इतनी ही फिल्मों के बराबर रिकॉर्ड हुई है। इतनी भारी रिकॉर्डिंग कंप्यूटर में सेव कर आयोग को सौंपना जिला पंचायती राज विभाग के लिए भारी पड़ रहा है। वीडियो फुटेज को सेव करने में विभाग के सभी कंप्यूटर के स्टोरेज कम पड़ गए हैं। ऐसे में करीब 70 से अधिक डीवीडी में बर्न कर (लोड कर) चुनाव आयोग को भेजना भी काफी कठिन है। इसलिए अब विभाग की ओर से डाटा पैन ड्राइव के जरिये आयोग को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
एक दिसंबर को 23 केंद्रों पर शिक्षकों ने मतदान किया और तीन दिसंबर को संजय कम्यूनिटी हॉल में मतगणना हुई। दोनों ही गतिविधियों के कवरेज की जिम्मेदारी जिला पंचायती राज विभाग को दी गई थी। आदेश के क्रम में स्टूडियो संचालक को जिम्मा दिया गया। 23 केंद्रों के साथ ही, कंट्रोल रूम व अन्य गतिवधियों के हिसाब से 33 कैमरापर्सन लगे। साथ ही, दस अतिरिक्त में रखे गए थे। पूरी कवरेज के दौरान जब उसे चुनाव आयोग को भेजने की बारी आई तो विभाग में खलबली मच गई। इतनी बड़ी फाइल कहां और किस तरह से भेजा जाए को लेकर मंथन शुरू हो गया। उच्चाधिकारियों को भी परेशानी की जानकारी दी गई। जिस पर डीवीडी के जरिए हार्ड कॉपी भेजने का सुझाव दिया गया। मगर, 70 डीवीडी को बर्न कराना भी आसान नहीं था। मामले पर अफसरों ने पैन ड्राइव के जरिए ही वीडियोग्राफी की रिकॉर्डिंग देेने को कह रहे हैं।
टूटने या बर्न करने की नहीं होगी समस्या
जिला पंचायती राज अधिकारी धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक डीवीडी के जरिए कवरेज भेजने से किन्हीं कारणों के चलते खराब होने का डर था। डीवीडी के स्क्रैच होने का भी डर है। कंप्यूटर पर मेल के जरिए भेजना असंभव है। ऐसे में विचार के बाद पैन ड्राइव के जरिए ही रिकॉर्डिंग आयोग को मुहैया कराने का निर्णय लिया गया है। इससे वीडियो फाइल में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं रहेगी। कार्य तेजी से होगा।
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निकाय चुनाव में बर्न हुई थी 12 सौ डीवीडी
बता दें कि निकाय चुनाव के दौरान 4768 जीबी डाटा रिकॉर्ड किया गया था। उस दौरान पैन ड्राइव के बजाय डीवीडी में ही डाटा सौंपने के सख्त निर्देश थे। जिसके चलते 12 सौ से अधिक डीवीडी बर्न की गई थी। उस दौरान भी जिला पंचायत राज अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बताते हैं कि कई डीवीडी सही तरीके से बर्न नहीं हो सकी थी। यह दिक्कत न हो इसलिए पैन ड्राइव को ही प्राथमिकता दी गई है।
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एक दिसंबर को 23 केंद्रों पर शिक्षकों ने मतदान किया और तीन दिसंबर को संजय कम्यूनिटी हॉल में मतगणना हुई। दोनों ही गतिविधियों के कवरेज की जिम्मेदारी जिला पंचायती राज विभाग को दी गई थी। आदेश के क्रम में स्टूडियो संचालक को जिम्मा दिया गया। 23 केंद्रों के साथ ही, कंट्रोल रूम व अन्य गतिवधियों के हिसाब से 33 कैमरापर्सन लगे। साथ ही, दस अतिरिक्त में रखे गए थे। पूरी कवरेज के दौरान जब उसे चुनाव आयोग को भेजने की बारी आई तो विभाग में खलबली मच गई। इतनी बड़ी फाइल कहां और किस तरह से भेजा जाए को लेकर मंथन शुरू हो गया। उच्चाधिकारियों को भी परेशानी की जानकारी दी गई। जिस पर डीवीडी के जरिए हार्ड कॉपी भेजने का सुझाव दिया गया। मगर, 70 डीवीडी को बर्न कराना भी आसान नहीं था। मामले पर अफसरों ने पैन ड्राइव के जरिए ही वीडियोग्राफी की रिकॉर्डिंग देेने को कह रहे हैं।
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टूटने या बर्न करने की नहीं होगी समस्या
जिला पंचायती राज अधिकारी धर्मेंद्र कुमार के मुताबिक डीवीडी के जरिए कवरेज भेजने से किन्हीं कारणों के चलते खराब होने का डर था। डीवीडी के स्क्रैच होने का भी डर है। कंप्यूटर पर मेल के जरिए भेजना असंभव है। ऐसे में विचार के बाद पैन ड्राइव के जरिए ही रिकॉर्डिंग आयोग को मुहैया कराने का निर्णय लिया गया है। इससे वीडियो फाइल में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं रहेगी। कार्य तेजी से होगा।
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निकाय चुनाव में बर्न हुई थी 12 सौ डीवीडी
बता दें कि निकाय चुनाव के दौरान 4768 जीबी डाटा रिकॉर्ड किया गया था। उस दौरान पैन ड्राइव के बजाय डीवीडी में ही डाटा सौंपने के सख्त निर्देश थे। जिसके चलते 12 सौ से अधिक डीवीडी बर्न की गई थी। उस दौरान भी जिला पंचायत राज अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बताते हैं कि कई डीवीडी सही तरीके से बर्न नहीं हो सकी थी। यह दिक्कत न हो इसलिए पैन ड्राइव को ही प्राथमिकता दी गई है।