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विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र सितंबर से शुरू करने की सिफारिश
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MJP Rohilkhand university
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बरेली। कोरोना संकट और लॉकडाउन के बीच विश्वविद्यालयों की वार्षिक परीक्षा और नए सत्र को लेकर यूजीसी ने राष्ट्रीय-प्रदेश स्तर पर कमेटियों का गठन किया है। इनमें राष्ट्रीय स्तर पर गठित दो कमेटियों ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक सत्र जुलाई के बजाय सितंबर से शुरू करने की सिफारिश की है। वहीं, उत्तर राज्य स्तर पर गठित स्टेट यूनिवर्सिटी कमेटी ने अब तक अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। 30 अप्रैल तक कमेटी के रिपोर्ट सौंपने की बात कही जा रही है।
कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में लॉकडाउन के मद्देनजर शैक्षणिक सत्र के नुकसान और ऑनलाइन शिक्षा के मुद्दों की जांच के लिए यूजीसी ने राष्ट्रीय स्तर पर दो कमेटियों का गठन किया था। हरियाणा विश्वविद्यालय के कुलपति आरसी कुहाड़ के नेतृत्व में गठित समिति ने लॉकडाउन के बीच विश्वविद्यालयों में परीक्षा कराने के तरीकों की जांच व वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर की रूपरेखा को लेकर रिपोर्ट बनाई। ऑनलाइन शिक्षा में सुधार के उपाय सुझाने वाली दूसरी समिति का नेतृत्व इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के वीसी नागेश्वर राव ने किया। दोनों पैनलों ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट पेश की।
इन पैनलों ने सिफारिश की कि विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक सत्र जुलाई से सितंबर कर दिया जाना चाहिए। दूसरे पैनल ने सुझाव दिया कि यदि विश्वविद्यालयों के पास बुनियादी सुविधाएं हैं तो उन्हें ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करनी चाहिए। वहीं, जिन विश्वविद्यालयों में सुविधाओं का अभाव है, वह अपने यहां लाकडाउन खत्म होने का इंतजार करें। उम्मीद है कि एक सप्ताह के अंदर यूजीसी कोई गाइड लाइन जारी कर सकता है। उधर, उत्तर प्रदेश के राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र को लेकर गठित कमेटी आगामी 30 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के वाइस चांसलर प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। इस रिपोर्ट के आने के बाद यूजीसी और राज्य सरकार की ओर से जरूरी निर्देश जारी होंगे। इसी के अनुरूप आगे नए सत्र को शुरू करने को लेकर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।’ - डॉ. सुनीता पांडेय , कुलसचिव रुहेलखंड विश्वविद्यालय
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कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में लॉकडाउन के मद्देनजर शैक्षणिक सत्र के नुकसान और ऑनलाइन शिक्षा के मुद्दों की जांच के लिए यूजीसी ने राष्ट्रीय स्तर पर दो कमेटियों का गठन किया था। हरियाणा विश्वविद्यालय के कुलपति आरसी कुहाड़ के नेतृत्व में गठित समिति ने लॉकडाउन के बीच विश्वविद्यालयों में परीक्षा कराने के तरीकों की जांच व वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर की रूपरेखा को लेकर रिपोर्ट बनाई। ऑनलाइन शिक्षा में सुधार के उपाय सुझाने वाली दूसरी समिति का नेतृत्व इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के वीसी नागेश्वर राव ने किया। दोनों पैनलों ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट पेश की।
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इन पैनलों ने सिफारिश की कि विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक सत्र जुलाई से सितंबर कर दिया जाना चाहिए। दूसरे पैनल ने सुझाव दिया कि यदि विश्वविद्यालयों के पास बुनियादी सुविधाएं हैं तो उन्हें ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करनी चाहिए। वहीं, जिन विश्वविद्यालयों में सुविधाओं का अभाव है, वह अपने यहां लाकडाउन खत्म होने का इंतजार करें। उम्मीद है कि एक सप्ताह के अंदर यूजीसी कोई गाइड लाइन जारी कर सकता है। उधर, उत्तर प्रदेश के राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र को लेकर गठित कमेटी आगामी 30 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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‘डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी लखनऊ के वाइस चांसलर प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। इस रिपोर्ट के आने के बाद यूजीसी और राज्य सरकार की ओर से जरूरी निर्देश जारी होंगे। इसी के अनुरूप आगे नए सत्र को शुरू करने को लेकर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।’ - डॉ. सुनीता पांडेय , कुलसचिव रुहेलखंड विश्वविद्यालय