फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Reasons for the defeat of SP supported candidate Dr IS Tomar in Bareilly

Bareilly News: डॉ. आईएस तोमर बिना सिंबल लड़े चुनाव, सपा के बड़े नेताओं ने भी बनाई दूरी... कैसे मिलती जीत

Tue, 16 May 2023 10:38 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 16 May 2023 10:38 AM IST
सार

सपाइयों का मानना है कि पार्टी का सिंबल न लेना हार की सबसे बड़ी वजह रही। इसके अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को एक चुनावी सभा करनी चाहिए थी जो नहीं हुई। 

विज्ञापन
Reasons for the defeat of SP supported candidate Dr IS Tomar in Bareilly
बरेली के पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बरेली में सपा समर्थित प्रत्याशी डॉ. आईएस तोमर को नगर निगम के चुनाव में 56 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। यह अब तक मेयर पद पर हार-जीत का सबसे बड़ा अंतर है। सपा नेता और कार्यकर्ता इतनी बड़ी हार की समीक्षा में जुट गए हैं। सपाइयों का मानना है कि पार्टी का सिंबल न लेना हार की सबसे बड़ी वजह रही। इसके अलावा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को एक चुनावी सभा करनी चाहिए थी जो नहीं हुई। चुनाव में सेक्टर प्रभारी व संगठन पदाधिकारियों के बीच तालमेल भी अंत तक नहीं बैठ पाना हार का प्रमुख कारण रहा।

विज्ञापन


दरअसल, सपा के नेता इस मेयर के चुनाव में शुरू से ही यह मानकर चल रहे थे कि भाजपा के उमेश गौतम के खिलाफ शहर में लहर चल रही है। वह आसानी से चुनाव जीत लेंगे। यह सोच चुनाव की घोषणा के बाद से नामांकन और जनसंपर्क से लेकर मतदान के दिन तक दिखाई भी दी। टिकट बंटवारे को लेकर चले नाटकीय घटनाक्रम को इस हार का आधार माना जा रहा है। 

विज्ञापन

दो खेमे में बंट गई थी सपा 

टिकट बंटवारे की इसी रस्साकसी को सत्तापक्ष के नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान मुद्दा बनाया कि जिस पार्टी को प्रत्याशी ही नहीं मिल रहा है, वह चुनाव कैसे लड़ेगी। इससे पार्टी कार्यकर्ता भी अलग-अलग खेमे में दिखाई दिए और चुनाव तक सक्रिय नहीं हो सके। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने फोन पर संजीव सक्सेना से बात की, उसके बाद तक सपा के पदाधिकारी दो खेमे में बंटे थे। एक खेमा संजीव सक्सेना के साथ खड़ा था और एक खेमा डॉ. आईएस तोमर के आवास पर बैठकें कर रहा था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

संजीव सक्सेना के नामांकन वापसी के बाद सपा संगठन के सभी पदाधिकारियों ने डॉ. आईएस तोमर के कार्यालय पर बैठना शुरू किया। इसके बाद चुनाव प्रचार शुरू हुआ। सपा मुखिया के आने की चर्चाएं तेज हुईं मगर वह अंत तक नहीं आए। सपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पहले तो बिना सिंबल उतरे और दूसरा अखिलेश यादव भी नहीं आए। इससे कार्यकर्ताओं में अच्छा संदेश नहीं गया तो पार्टी को जीत कैसे मिलती।

प्रचार के तरीके से भी हुआ नुकसान 

सपा ने जिस तरह जनसंपर्क किया, वह भी इस हार का मुख्य कारण बनी। डॉ. आईएस तोमर के साथ कम मौकों पर ही सपा के बड़े नेता प्रचार में दिखाई दे रहे थे। सपा के बड़े नेता पूरी टीम के साथ अलग-अलग वार्डों में प्रचार कर रहे थे तो डॉ. तोमर टीम के साथ अलग वार्डों में शुरुआत करते थे। कई बार साथ भी होते थे। सपा के नेता प्रचार के दौरान सपा का झंडा साथ रखते थे जबकि डॉ. तोमर पीले रंग का झंडा लेकर चल रहे थे, जिस पर जीप बनी हुई थी। इससे भी मतदाताओं में भ्रम की स्थिति रही। 

मतदान से ठीक एक सप्ताह पहले तक लड़ाई भाजपा बनाम सपा रही ही नहीं। यह लड़ाई उमेश गौतम और डॉ. आईएस तोमर की हो गई। इससे सपा का कैडर वोट भी छिटका और मुस्लिम मतों में भी बिखराव हो गया। सपा के एक प्रदेश स्तरीय नेता ने माना कि डॉ. तोमर प्रचार में सपा का झंडा साथ लेकर नहीं चले, यह नुकसान का प्रमुख कारण रहा।

प्रदेश अध्यक्ष ने नहीं की समीक्षा

सपा के जो बड़े नेता आए, वह भी पार्टी की लाइन पर नहीं चले। सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल बरेली पहुंचे तो उन्होंने चुनाव की कोई समीक्षा बैठक नहीं की। प्रत्याशी को लेकर कोई प्रेसवार्ता नहीं की। लोहिया वाहिनी के निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप तिवारी, छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह देव और पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नेहा यादव चुनाव में जब तक बरेली रहीं, सिर्फ पार्टी नेताओं के साथ जनसंपर्क किया। इन लोगों की ओर से भी कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं दिखाई दिए। जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष कमेटियां तक नहीं बना सके।

मुस्लिम मतदाताओं को साधने के नहीं हुए प्रयास

सपा मुस्लिम मतदाताओं को अपना मानकर चल रही थी। पूरे चुनाव में इस वर्ग को साधने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए। किसी भी मुस्लिम नेता को प्रचार में नहीं भेजा गया। इसके अलावा अलग-अलग बिरादरी के नेताओं को बुलाकर कोई नुक्कड़ सभा नहीं कराई गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed