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Bareilly News: बरेली में गढ़े आभूषणों से हुआ रामलला का दिव्य शृंगार

Tue, 23 Jan 2024 04:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jan 2024 04:23 AM IST
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Ramlala's divine adornment with jewelery made in Bareilly
बरेली। अयोध्या में विराजे रामलला के नए मनमोहक विग्रह का शृंगार बरेली में गढ़े गए आभूषणों से किया गया है। आभूषणों को तैयार करने में सोना, हीरा, माणिक्य और पन्ना का इस्तेमाल हुआ है। इन्हें तैयार करने में 14 दिन का समय लगा। भगवान के मुकुट और हार पर सूर्य की छवि सूर्यवंश के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित है।
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आभूषणों को बनाने की जिम्मेदारी बरेली के हरसहायमल श्यामलाल ज्वेलर्स को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सौंपी थी। निदेशक मोहित आनंद के मुताबिक दो जनवरी को लखनऊ शोरूम की जिम्मेदारी संभाल रहे भाई अंकुर आनंद के पास ट्रस्ट से कॉल आया। 16 जनवरी तक आभूषण बनाकर देने की शर्त रखी। भाई ने शाम 4 बजे कॉल करके इसकी जानकारी दी। महज 14 दिन में आभूषण बनाना आसान नहीं था, लेकिन प्रभु श्रीराम कृपा से हामी भर दी। इसके बाद 70 कुशल कारीगरों की टीम तैनात करके शिफ्टवार 24 घंटे कार्य किया और 16 जनवरी को आभूषण ट्रस्ट को सौंप दिए। उन्होंने बताया कि गर्भगृह में विराजित मूर्ति का चुनाव ट्रस्ट ने 28 दिसंबर 2023 काे किया था, इसीलिए आभूषण बनाने के लिए मात्र 14 दिन का समय मिला।
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मोहित के मुताबिक प्रभु के आभूषणों में क्या प्रतीक होंगे, कौन से रत्न जड़े जाएंगे, कितनी लंबाई, चाैड़ाई व वजन होगा? ये सब ट्रस्ट के मार्गदर्शन में हुआ। ट्रस्ट से जारी बयान के अनुसार आभूषणों का निर्माण अध्यात्म रामायण, श्रीमद्वाल्मीकि रामायण, श्रीरामचरित मानस और आलवंदार स्त्रोत के अध्ययन और उनमें वर्णित श्रीराम की शास्त्र सम्मत शोभा के अनुरूप शोध व अध्ययन के बाद किया गया है। मोहित के मुताबिक आभूषण बनाने के दौरान कड़ी निगरानी रही। सीसीटीवी कैमरे से परिसर लैस रहा।
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रामलला के नेत्र गढ़ने के लिए सोने की छेनी और चांदी की हथौड़ी का प्रयोग हुआ। विग्रह का शृंगार तिलक, मुकुट, धनुष, तीर, छोटा हार, पंचलड़ा, विजय हार, करधनी, बाजूबंध, दोनों हाथ और पांव के कड़े, नूपुर पायल, मुद्रिका, कमल की बेल से हुआ है। रामलला के लिए गले का हार भी बनाया गया है।

मोहित ने बताया कि सभी आभूषण हस्तनिर्मित हैं। इनका वजन और गुणवत्ता हालमार्क से प्रमाणित है। ट्रस्ट को आभूषण सौंपे जाने के बाद सोना, हीरा, माणिक्य और पन्ना की जांच इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (आईजीआई) से भी कराई गई। फिर इन्हें रामलला को धारण कराया गया।
मोहित के अनुसार प्रभु कृपा से ये कार्य संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि आभूषणों की लागत नहीं बता सकते। क्योंकि प्रभु को अर्पित होने पर वह अनमोल हो गए हैं। वहीं प्रमुख आभूषणों में रामलला को पहनाई गई विजयमाला का वजन दो किलो है। इसके अलावा 17 सौ ग्राम का मुकुट, 16 ग्राम का तिलक, 65 ग्राम की मुद्रिका, 500 ग्राम का कंठ हार, 660 ग्राम का पंचलड़ा, 750 ग्राम की करधनी, 850 ग्राम के हाथ के कड़े और 560 ग्राम के पैर के कड़े प्रमुख हैं।
मुकुट: उत्तर भारतीय परंपरा में स्वर्ण निर्मित मुकुट माणिक्य, पन्ना, हीरों से अलंकृत है। मुकुट के मध्य सूर्य चिह्न बना है, जो सूर्यवंश का प्रतीक है। दायीं ओर मोतियों की लड़ियां पिरोई गई हैं।


कुंडल: भगवान के कुंडल पर मयूर आकृतियां बनी हैं। ये सोने, हीरे, माणिक्य और पन्ने से सुशोभित हैं।



कंठा : अर्द्धचंद्राकार रत्नों से जड़ित कंठा है। इसमें फूल और सूर्य देव बने हैं। ये सोने, हीरे, माणिक्य जड़ा है। पन्ने की लड़ी लगी है।



ह्दय: ह्दय पर कौस्तुभमणि है, जो बड़े माणिक्य और हीरों से अलंकृत है।



पदिक: कंठ से नीचे, नाभिकमल से ऊपर तक का हार है। ये हीरे और पन्ने का पंचलड़ा है। नीचे एक बड़ा पेंडेंट लगा है। पैरों में सोने के कड़े और पैजनियां पहनाए गए हैं।



बायां हाथ : प्रभु राम के बाएं हाथ में 5.5 फुट का साेने का धनुष है। मोती, माणिक्य, पन्ने की लटकनें हैं। दाएं हाथ में दो फुट का सोने का बाण (तीर) है।



वनमाला : गले में फूलों की आकृति की वनमाला है। मस्तक पर पारंपरिक मंगल-तिलक को हीरे और माणिक्य से बनाया गया है।



चरण : प्रभु के चरणों में कमल है। नीचे एक स्वर्णमाला सजाई गई है। सामने की ओर खेलने के लिए चांदी के खिलौने बनाए गए हैं। इसमें झुनझुना, हाथी, घोड़ा, ऊंट, खिलौना गाड़ी है।



प्रभा मंडल : प्रभु राम के प्रभा-मंडल पर सोने का छत्र लगा है।



विजयहार : विजय की प्रतीक माला पांच फुट लंबी है और सोने से बनी है। इसमें कई माणिक्य लगे हैं। वैष्णव परंपरा के तहत मंगल चिह्न, सुदर्शन चक्र, पद्मपुष्प, शंख, मंगल-कलश दर्शाया गया है। इस पर पांच प्रकार के पुष्प कमल, चम्पा, पारिजात, कुंद और तुलसी काे उकेरा गया है।



करधनी : इसमें सोने से प्राकृतिक छटा उकेरी गई है। ये हीरे, माणिक्य, मोती, पन्ने से अलंकृत है। छोटी-छोटी पांच घंटियां लगी हैं। साथ ही, मोती, माणिक्य, पन्ने की लड़ियां लटक रही हैं।




बाजूबंध, कंगन, मुद्रिका: दोनों भुजाओं में स्वर्ण और रत्नों से जड़ित बाजूबंध पहनाए गए हैं। हाथों में रत्न जड़ित कंगन और मुद्रिकाएं हैं। इनमें मोती लटक रहे हैं।
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