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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Ramganga to be rescued, will be built in Faridpur

रामगंगा को बचाया, फरीदपुर में बनेगा ट्रंचिंग ग्राउंड

Sat, 14 Oct 2017 12:55 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Sat, 14 Oct 2017 12:55 AM IST
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आखिर अमर उजाला की मुहिम रंग लाई। रामगंगा किनारे ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने पर तुले प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। रामगंगा के बजाय अब नेशनल हाईवे के किनारे फरीदपुर में ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने के साथ सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। यहां दो गांवों के किसानों की 100 बीमा जमीन खरीद ली गई है। डीएम के आदेश पर शुक्रवार रात को दफ्तर खोलकर फरीदपुर के सब रजिस्ट्रार ने जमीन का बैनामा कराया। 300 बीघा जमीन और इसी के आसपास खरीदी जानी है। इसके लिए किसानों से बात हो गई है। 
शाहजहांपुर रोड के गांव रजऊ परसपुर गांव के पास पर नगर निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेन्ट प्लान्ट बनवाकर 31 मार्च 2013 को चालू कराया था। कुछ महीने बाद ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस पर रोक लगा दी। फिर यह प्लांट दोबारा नहीं चल पाया। प्लांट को शिफ्ट करने के लिए नगर निगम के पास कोई और जमीन भी नहीं थी। नगर निगम और प्रशासन के अधिकारियों ने रामगंगा के किनारे गुरुऊ गांव में प्लांट और ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए जमीन की तलाश शुरू की, लेकिन इससे नदी और आसपास के माहौल में प्रदूषण फैलने की बात कहते हुए किसानों ने विरोध करना शुरू कर दिया। 
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किसानों का विरोध जायज था, लिहाजा अमर उजाला ने रामगंगा नदी को गंदगी से बचाने के लिए लंबी मुहिम चलाई। आखिर प्रशासन ने रामगंगा का पीछा छोड़कर गोपनीय ढंग से दूसरे विकल्प तलाश करने शुरू किए। फरीदपुर के दो गांवों में जमीन फाइनल होने के बाद शुक्रवार को यहां 35 किसानों की करीब 100 बीघा भूमि जमीन खरीद ली। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी राजेश कुमार सोनकर की उपस्थिति में राज्यपाल के पक्ष में जमीन का बैनामा हुआ। जिलाधिकारी के आदेश पर रात को दफ्तर खोलकर सब रजिस्ट्रार ने जमीन का बैनामा कराया। इसी जमीन के आसपास 300 बीघा जमीन और खरीदी जानी है। 
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फरीदपुर में सौ बीघा जमीन अभी खरीदी गई है, 300 बीघा जमीन अभी और चाहिए। यह जमीन आबादी से दूर है और उपजाऊ भी नहीं है। शहर से जमीन की दूरी 18 किमी है। इसके लिए सभी विभागाें की मौखिक सहमति भी मिल गई है। -आरके श्रीवास्तव, नगर आयुक्त 

अब बाकरगंज को मिल सकेगी राहत
बरेली।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए जमीन की तलाश पूरी होने से बाकरगंज के लोगों को सबसे अधिक राहत मिलेगी। कई सालाें से गंदगी में रहने को मजबूर बाकरगंज को दुर्दशा से मुक्ति दिलाने के लिए समाज सेवा मंच ने एनजीटी में याचिका दायर की थी। 25 अक्तूबर को एनजीटी में बाकरगंज मामले की सुनवाई भी है। इसके बाद नगर निगम ने पहले बभिया में जमीन देखी थी, लेकिन वेटलैंड होने के चलते दो जिलाधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में इस जमीन को रिजेक्ट कर दिया। इसके बाद अखा-ढका और गुरऊ गांव की जमीन को खरीदने की कोशिश की गई लेकिन यह जमीन रामगंगा नदी के पास होने के कारण गांव वाले विरोध करने लगे। अमर उजाला ने भी इसे मुद्दा बनाया था। आखिर यह मुहिम कामयाब रही।


 सफल हुई गरऊ के किसानों की मुहिम
बरेली। इससे पहले प्रशासन ने ट्रंचिंग ग्राउंड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने के लिए रामगंगा किनारे के गांव गरऊ में सवा सौ बीघा जमीन देखी गई थी। यहां किसानों के हस्ताक्षर से लिखा प्रार्थना पत्र प्रशासन को सौंपा गया था जिसमें उन्होंने जमीन ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए देने पर सहमति जताई थी। हालांकि जांच में किसानोें के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। किसानों ने रामगंगा किनारे ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने के लिए जमीन देेने से इनकार कर दिया। इसके बाद किसान आंदोलित हो गए। किसानों की इस मुहिम में अमर उजाला ने भी उनका साथ दिया। फरीदपुर में ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए जमीन खरीदने के साथ रामगंगा किनारे के किसानों की मुहिम सफल हो गई। इससे पहले बभिया में ट्रंचिंग ग्राउंड बनाने के लिए तत्कालीन नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव ने जमीन देखी थी। ग्रामीणों के विरोध में वजह से यहां भी नगर निगम की जमीन खरीदने की रणनीति सफल नहीं हो पाई थी। 
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