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Bareilly News: 300 बेड अस्पताल में हुई रैबीज क्लीनिक की शुरुआत
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बरेली। राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत तीन सौ बेड अस्पताल में बुधवार को पहली रैबीज क्लीनिक का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के उत्तर प्रदेश राज्य नोडल अधिकारी डॉ. प्रदीप सक्सेना, वेटरनरी कंसल्टेंट डॉ. विपिन वर्मा, सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने संयुक्त रूप से फीता काटकर उद्घाटन किया। उन्होंने प्रभारी डॉ. वैभव को जरूरी दिशानिर्देश दिए।
जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ.मीसम अब्बास के मुताबिक पिछले साल राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। कुत्ता-बिल्ली, बंदर, सियार आदि जानवरों के काटने पर मरीजों को एआरवी लगाने के साथ उनकी निगरानी की जा रही है। रैबीज से हुई मौतों का ऑडिट भी हो रहा है। क्लीनिक में एआरवी के साथ ही इमिनोग्लोबिन भी मरीजों को लगेगी। भविष्य में गंभीर जख्मी मरीजों को भर्ती कर इलाज भी हो सकेगा। इस दौरान डॉ. अखिलेश्वर सिंह, एसीएमओ डॉ. भानु प्रकाश आदि मौजूद रहे।
आईडीएसपी की ओर से हो रही है निगरानी
डॉ. अब्बास के मुताबिक आईडीएसपी की ओर से जानवर काटने के मामलों की पहले निगरानी न होने से मरीज और मौतों की जानकारी नहीं मिलती थी। अब लगातार निगरानी हो रही है। क्लीनिक में एआरवी यानी एंटी रैबिज वैक्सीन लगने के साथ ही, गंभीर जख्मी मरीजों के घाव में रैबीज इम्यूनोग्लोबिन भी लगेगी। मरीजों को घाव प्रबंधन, इलाज और उन्हें मानसिक तनाव से बचाव के लिए काउंसलिंग भी की जाएगी। कहा कि जानवरों के काटने के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। साल 2022 में करीब 40 हजार एआरवी लगवाने वालों में 60 फीसदी से ज्यादा कुत्ता काटने के केस थे। बीते साल 11 लोगों की रैबीज से मौत भी हो चुकी है।
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जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ.मीसम अब्बास के मुताबिक पिछले साल राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। कुत्ता-बिल्ली, बंदर, सियार आदि जानवरों के काटने पर मरीजों को एआरवी लगाने के साथ उनकी निगरानी की जा रही है। रैबीज से हुई मौतों का ऑडिट भी हो रहा है। क्लीनिक में एआरवी के साथ ही इमिनोग्लोबिन भी मरीजों को लगेगी। भविष्य में गंभीर जख्मी मरीजों को भर्ती कर इलाज भी हो सकेगा। इस दौरान डॉ. अखिलेश्वर सिंह, एसीएमओ डॉ. भानु प्रकाश आदि मौजूद रहे।
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आईडीएसपी की ओर से हो रही है निगरानी
डॉ. अब्बास के मुताबिक आईडीएसपी की ओर से जानवर काटने के मामलों की पहले निगरानी न होने से मरीज और मौतों की जानकारी नहीं मिलती थी। अब लगातार निगरानी हो रही है। क्लीनिक में एआरवी यानी एंटी रैबिज वैक्सीन लगने के साथ ही, गंभीर जख्मी मरीजों के घाव में रैबीज इम्यूनोग्लोबिन भी लगेगी। मरीजों को घाव प्रबंधन, इलाज और उन्हें मानसिक तनाव से बचाव के लिए काउंसलिंग भी की जाएगी। कहा कि जानवरों के काटने के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। साल 2022 में करीब 40 हजार एआरवी लगवाने वालों में 60 फीसदी से ज्यादा कुत्ता काटने के केस थे। बीते साल 11 लोगों की रैबीज से मौत भी हो चुकी है।
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