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बरेली: मासूम की मौत के बाद भी घंटों वेंटिलेटर पर रखा शव, अस्पताल पर बिल बढ़ाने के लिए अमानवीयता का आरोप
Tue, 14 Jun 2022 03:12 PM IST
प्राची प्रियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Tue, 14 Jun 2022 03:12 PM IST
सार
तीन दिन तक बच्चे की हालत ठीक रही। आदित्य का आरोप है कि रविवार रात 10 बजे वह बच्चे को देखकर लौट आए थे, लेकिन जब सोमवार सुबह अस्पताल पहुंचे तो उनसे वेंटिलेटर के दस हजार रुपये और नर्सरी के छह हजार रुपये जमा करने को कहा गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
बरेली में बच्चे की मौत के बाद भी वेंटिलेटर पर उसके शव को रखकर बिल बढ़ाने का आरोप एक निजी अस्पताल पर लगा है। परिजन करीब आठ घंटे बाद अस्पताल से बच्चे की मौत की जानकारी मिलने पर आक्रोशित हो गए। उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, देर रात तक परिजन ने पुलिस को तहरीर नहीं दी।
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बीडीए कॉलोनी के रहने वाले आदित्य सक्सेना के मुताबिक 10 जून को उनकी पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया था। जन्म के बाद संबंधित निजी नर्सिंग होम के चिकित्सक ने बच्चे की हालत गंभीर बताते हुए धर्मकांटा स्थित डॉ. अमित अग्रवाल के अस्पताल में इलाज के लिए रेफर किया था। बच्चे को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। आरोप है कि जब उन्होंने किसी भी अस्पताल में बच्चे को दिखाने की बात कही तो नर्सिंग होम के चिकित्सक ने डॉ. अमित को ही रेफर किए जाने के निर्णय को सही ठहराया।
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आखिर में वह बच्चे को एंबुलेंस से लेकर अस्पताल पहुंचे। तीन दिन तक बच्चे की हालत ठीक रही। आदित्य का आरोप है कि रविवार रात 10 बजे वह बच्चे को देखकर लौट आए थे, लेकिन जब सोमवार सुबह अस्पताल पहुंचे तो उनसे वेंटिलेटर के दस हजार रुपये और नर्सरी के छह हजार रुपये जमा करने को कहा गया। वेंटिलेटर का जिक्र सुनकर वह स्तब्ध रह गए। चिकित्सक ने बताया कि रात ढाई बजे बच्चे की हालत बिगड़ गई थी, इसलिए उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। सुबह करीब 11 बजे बच्चे की मौत की सूचना मिली।
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सूचना न देने पर बिफरे परिजन, हंगामा किया
आदित्य का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन जबरन मोटी फीस वसूलने के लिए बच्चे को वेंटिलेटर पर रखे था। बेहतर इलाज न होने से बच्चे की मौत हुई थी। इसे छिपाने के लिए यह खेल किया गया। हंगामा बढ़ने पर मौके पर पुलिस भी पहुंची पर परिजन ने कोई तहरीर नहीं दी।
डॉ. अमित अग्रवाल का कहना है कि रात में बच्चे की तबीयत बिगड़ने की सूचना पर वह वार्ड में पहुंचे। करीब दो घंटे तक स्थिति सामान्य करने का प्रयास करते रहे पर हालत बिगड़ती रही। बच्चा भर्ती करने के दौरान ही गंभीर था। सुबह उन्होंने परिजन को सूचना दी थी। कहीं और ले जाने को कहा था पर वे टालमटोल करते रहे।
सुबह 11 बजे मौत होने पर बेवजह अस्पताल प्रशासन के खिलाफ आरोप लगा रहे हैं। जब उन्हें बच्चे के इलाज संबंधी रिपोर्ट दिखाई और पास में मौजूद अन्य तीमारदारों से सामना कराया तो चुप होकर लौट गए।
आदित्य का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन जबरन मोटी फीस वसूलने के लिए बच्चे को वेंटिलेटर पर रखे था। बेहतर इलाज न होने से बच्चे की मौत हुई थी। इसे छिपाने के लिए यह खेल किया गया। हंगामा बढ़ने पर मौके पर पुलिस भी पहुंची पर परिजन ने कोई तहरीर नहीं दी।
डॉ. अमित अग्रवाल का कहना है कि रात में बच्चे की तबीयत बिगड़ने की सूचना पर वह वार्ड में पहुंचे। करीब दो घंटे तक स्थिति सामान्य करने का प्रयास करते रहे पर हालत बिगड़ती रही। बच्चा भर्ती करने के दौरान ही गंभीर था। सुबह उन्होंने परिजन को सूचना दी थी। कहीं और ले जाने को कहा था पर वे टालमटोल करते रहे।
सुबह 11 बजे मौत होने पर बेवजह अस्पताल प्रशासन के खिलाफ आरोप लगा रहे हैं। जब उन्हें बच्चे के इलाज संबंधी रिपोर्ट दिखाई और पास में मौजूद अन्य तीमारदारों से सामना कराया तो चुप होकर लौट गए।