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Bareilly News: सलाखों के पीछे दम तोड़ रहे बंदी, कठघरे में व्यवस्था और अफसर
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बरेली। जिला और सेंट्रल जेल में बंदियों की मौत के आंकड़े बढ़ रहे हैं। कुछ महीनों के अंदर जिला जेल में बंदियों की आत्महत्या के मामले भी बढ़े हैं। लगातार हो रही बंदियों की मौत से जेल की व्यवस्था और अफसरों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
हत्या के मामले में जिला जेल में सजा काट रहे क्योलड़िया निवासी प्रताप सिंह की सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट में जहर के लक्षण मिले हैं। विसरा सुरक्षित किया गया है। प्रताप के परिवार ने जेल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। अब मजिस्टि्रयल जांच के दौरान साक्ष्य पेश कर वे जेल अफसरों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। इससे पहले सेंट्रल जेल में बंदी इकबाल की मौत हो गई थी। कुछ दिन पहले जिला जेल में मेरठ निवासी अंकित गूजर ने आत्महत्या कर ली थी। अंकित के परिजनों ने भी आरोप लगाए थे। इसके बाद बंदी रक्षकों को निलंबित कर जेल अफसरों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था।
जेलों में समृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों के साथ आमतौर पर असमान व्यवहार होता है। खास लोगों को सुविधाएं मिलने से आम बंदियों में हीन भावना पनपती है। जेल के अंदर कैंटीन और बढि़या खाने की व्यवस्था है, लेकिन गरीब बंदी इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। जिला जेल में आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों से काम कराए जाने की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं। परिजनों से दूर होने के कारण बंदियों में तनाव व अवसाद बढ़ जाता है। इस कारण कई बंदी गंभीर बीमारियों का शिकार होते हैं या फिर आत्महत्या का रास्ता अपना लेते हैं।
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बीमारी व उम्र का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार
जेल के अधिकारियों ने मौतों की बढ़ती संख्या को बीमारी व उम्र से जुड़ा बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। जिला जेल के वरिष्ठ अधीक्षक विपिन मिश्रा ने बताया कि उनके यहां रामपुर, मुरादाबाद, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर व मेरठ के सजायाफ्ता बंदी भी आते हैं। इनमें कई बीमार व वृद्ध होते हैं, इसलिए भी यह आंकड़ा बढ़ा हुआ लगता है। आत्महत्या के मामले बढ़ने पर कहा कि कई बार विचाराधीन बंदियों की जमानत से सजायाफ्ता कैदी ये सोचकर मायूस होता है कि उसे इस चहारदीवारी से छुटकारा नहीं मिल सकेगा। मेरठ निवासी एक युवा कैदी ने पिछले दिनों जेल में आत्महत्या की थी। जांच के दौरान दूसरे बंदियों ने इसी तरह की बातें बताईं जो वह अक्सर कहता था। सेंट्रल जेल के अधीक्षक अविनाश गौतम ने बताया कि उनके यहां मरने वाले ज्यादातर कैदी बीमारी से जूझ रहे थे। ब्यूरो
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हत्या के मामले में जिला जेल में सजा काट रहे क्योलड़िया निवासी प्रताप सिंह की सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट में जहर के लक्षण मिले हैं। विसरा सुरक्षित किया गया है। प्रताप के परिवार ने जेल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। अब मजिस्टि्रयल जांच के दौरान साक्ष्य पेश कर वे जेल अफसरों के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। इससे पहले सेंट्रल जेल में बंदी इकबाल की मौत हो गई थी। कुछ दिन पहले जिला जेल में मेरठ निवासी अंकित गूजर ने आत्महत्या कर ली थी। अंकित के परिजनों ने भी आरोप लगाए थे। इसके बाद बंदी रक्षकों को निलंबित कर जेल अफसरों ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था।
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जेलों में समृद्ध और आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों के साथ आमतौर पर असमान व्यवहार होता है। खास लोगों को सुविधाएं मिलने से आम बंदियों में हीन भावना पनपती है। जेल के अंदर कैंटीन और बढि़या खाने की व्यवस्था है, लेकिन गरीब बंदी इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। जिला जेल में आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों से काम कराए जाने की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं। परिजनों से दूर होने के कारण बंदियों में तनाव व अवसाद बढ़ जाता है। इस कारण कई बंदी गंभीर बीमारियों का शिकार होते हैं या फिर आत्महत्या का रास्ता अपना लेते हैं।
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बीमारी व उम्र का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार
जेल के अधिकारियों ने मौतों की बढ़ती संख्या को बीमारी व उम्र से जुड़ा बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। जिला जेल के वरिष्ठ अधीक्षक विपिन मिश्रा ने बताया कि उनके यहां रामपुर, मुरादाबाद, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर व मेरठ के सजायाफ्ता बंदी भी आते हैं। इनमें कई बीमार व वृद्ध होते हैं, इसलिए भी यह आंकड़ा बढ़ा हुआ लगता है। आत्महत्या के मामले बढ़ने पर कहा कि कई बार विचाराधीन बंदियों की जमानत से सजायाफ्ता कैदी ये सोचकर मायूस होता है कि उसे इस चहारदीवारी से छुटकारा नहीं मिल सकेगा। मेरठ निवासी एक युवा कैदी ने पिछले दिनों जेल में आत्महत्या की थी। जांच के दौरान दूसरे बंदियों ने इसी तरह की बातें बताईं जो वह अक्सर कहता था। सेंट्रल जेल के अधीक्षक अविनाश गौतम ने बताया कि उनके यहां मरने वाले ज्यादातर कैदी बीमारी से जूझ रहे थे। ब्यूरो