UP: बरेली की सेंट्रल जेल में कैदी ने फंदे से लटककर दी जान, दुष्कर्म के मामले में मिली थी उम्रकैद की सजा
बरेली सेंट्रल जेल में सजायाफ्ता कैदी ने आत्महत्या कर ली। उसका शव फंदे से लटका मिला। वह अवसाद व अन्य मानसिक रोग से जूझ रहा था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बरेली के इज्जतनगर थाना क्षेत्र स्थित केंद्रीय कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी मुकेश कुमार ने बृहस्पतिवार दोपहर बैरक के बरामदे में एंगल से गमछे के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। वह लखीमपुर खीरी जिले के गोला इलाके का निवासी था और चार साल से जेल में बंद था, जेल प्रशासन ने उसके परिजनों को बुला लिया। शाम ढले तक कैदी के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
गोला के गांव जगन्नाथपुर निवासी 32 वर्षीय मुकेश कुमार के लिए 23 सितंबर 2021 को लखीमपुर खीरी में एडीजे स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह कुछ समय लखीमपुर खीरी जेल में रहा। वर्ष 2022 से उसे केंद्रीय कारागार बरेली शिफ्ट कर दिया गया। जेल प्रशासन के मुताबिक जेल के अस्पताल चक्र परिसर में छह व सात नंबर बैरक में मानसिक रोगियों को रखा जाता है। इन्हीं में मुकेश कुमार भी बंद था। जेल आने के बाद से वह अवसाद से जूझ रहा था। इसलिए उसकी मानसिक रोग की दवा चल रही थी।
यह भी पढ़ें- UP: किसान ने खोदी जमीन निकला घड़ा... खजाने का मचा शोर, अंदर थी ऐसी चीज, देखकर दंग रह गए लोग
सुबह साढ़े दस बजे करीब मुकेश सुरक्षाकर्मियों की नजर बचाकर बैरक के पिछले हिस्से में चला गया। वहां वह गमछे के सहारे लोहे के एंगल से फंदे से लटक गया और उसकी मौत हो गई। करीब आधा घंटा बाद सुरक्षाकर्मियों की नजर पड़ी तो उन्होंने उसे फंदे से उतारकर जेल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके शव को जिला अस्पताल की मोरचरी में रखवा दिया गया। इज्जतनगर पुलिस ने शव का पंचनामा भरवाया, पोस्टमार्टम शुक्रवार को होने की उम्मीद है।
जेल से छूटने की नहीं थी उम्मीद
यौन उत्पीड़न और पॉक्सो एक्ट के केस में उम्रकैद की सजा पाने वाले कैदियों को अपील से पेरोल व रिहाई की गुंजाइश बेहद कम होती है। माना जा रहा है कि मुकेश भी यह बात मन ही मन मान बैठा था कि उसका जीवन जेल की कोठरी के भीतर ही खत्म हो जाएगा। जेल प्रशासन स्थानीय चिकित्सकों के साथ ही मानसिक अस्पताल के विशेष चिकित्सकों से उसका उपचार करवा रहा था।