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प्रोटोकॉल ही संक्रमण से बचाव का विकल्प: विशेषज्ञ बोले- एहतियाती डोज के बगैर कमजोर हो जाएगा ‘सुरक्षा कवच’

Sun, 10 Jul 2022 02:29 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली।
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली। Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 10 Jul 2022 02:29 PM IST
सार

बूस्टर डोज के प्रति जागरूकता अभी भी कम है। विशेषज्ञ के मुताबिक यह स्थिति आने वाले दिनों में खतरे के संकेत दे सकती है। उन्होंने लोगों से बूस्टर डोज लगवाने की अपील की है।

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precautionary booster dose is necessary Protocol is only option to prevent infection said experts
बूस्टर खुराक - फोटो : Istock

विस्तार

टीकाकरण और कोविड प्रोटोकॉल ही संक्रमण से बचाव के विकल्प हैं। फिर भी बड़ी तादाद में लोग पिछले दिनों वैक्सीन लगवाने केंद्रों तक ही नहीं पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संगठन, स्कूल व अन्य संस्थाएं लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसका असर रहा कि पिछले करीब दो महीने में बुजुर्ग, युवा, किशोर और बच्चे सभी के टीकाकरण ने रफ्तार पकड़ी है। बूस्टर डोज के प्रति जागरूकता अभी भी कम है। विशेषज्ञ के मुताबिक यह स्थिति आने वाले दिनों में खतरे के संकेत दे सकती है। उन्होंने लोगों से बूस्टर डोज लगवाने की अपील की है।

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टीसी समेत मांग रहे वैक्सिनेशन का प्रमाण पत्र
कोरोना वैक्सीनेशन के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए स्कूलों की ओर से अनूठी मुहिम चलाई जा रही है। कक्षा 8 और कक्षा 10 पास करने वाले विद्यार्थियों से नए स्कूल में प्रवेश से पहले चरित्र प्रमाण पत्र, ट्रांसफर सर्टिफिकेट समेत वैक्सीनेशन का प्रमाण पत्र भी मांगा जा रहा है। लिहाजा बड़ी तादाद में विद्यार्थी टीका लगवा रहे हैं। सामाजिक संगठन लोगों को अलग-अलग कार्यक्रम के जरिए जागरूक कर रहे हैं। इसके अलावा धार्मिक और व्यापारिक संगठन भी कोरोना से सुरक्षा के लिए अपील कर रहे हैं। 

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स्वास्थ्य विभाग भेज रहा बूस्टर डोज का मैसेज
शासनादेश के तहत बूस्टर डोज निजी अस्पताल पर एक निर्धारित राशि का भुगतान कर लगवाई जा सकती है। बरेली में करीब 6 लाख लोगों को अब तक बूस्टर डोज नहीं लग सकी है। चंद लोग ही टीकाकरण केंद्र तक पहुंचे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग चौथी लहर की आशंका के चलते 18 साल से अधिक वे लोग जिन्हें दूसरी डोज लगे नौ माह बीत चुके हैं। उन्हें मैसेज भेजकर अलर्ट किया जा रहा है। बावजूद इसके अब तक सकारात्मक बदलाव नहीं हो रहा। विशेषज्ञ आगामी दिनों में इस लापरवाही के भारी परिणाम सामने आने की आशंका जता रहे हैं। क्योंकि नौ माह बीतने के बाद एंटीबॉडी स्तर कम होने लगी है।

दूसरी डोज के लक्ष्य से भी दो ज्यादा वैक्सिनेटेड
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 18 साल से अधिक आयु के सरकार द्वारा प्राप्त लक्ष्य के सापेक्ष 104.32 फीसदी अब तक वैक्सिनेटेड हो चुके हैं। दूसरी डोज भी 102.21 फीसदी लोगों को लग चुकी है। 15 से 17 वषज़् के 100.23 फीसदी किशोर को पहली और करीब 81 फीसदी को दोनों डोज लग चुकी है। इसी तरह 12 से 14 वर्ष आयुवर्ग के 99.33 फीसदी को पहली और 70.81 फीसदी बच्चों को दूसरी डोज लग चुकी है। रिकॉर्ड के तहत अब बच्चों को दूसरी डोज लगवाने के लिए अभिभावक केंद्र पर पहुंच रहे हैं। लिहाजा, लक्ष्य जल्द पूरी होने की उम्मीद है।

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संक्रमित हुए तो गम्भीर हो सकते हैं हालात
माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. राहुल गोयल के मुताबिक कोरोना वैक्सीन एटिनएटेड न होकर किल्ड वैक्सीन है। इसमें मृत वायरस या बैक्टीरिया होता है। एक निर्धारित समय पर वह वायरस से लड़ने क्षमता खो देता है, इसलिए इम्यून सिस्टम को फर सक्रिय करने बूस्टर डोज जरूरी है। ताकि एंटीबॉडी बनी रहे और कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर हालत गंभीर न हो सके। जिन्होंने बूस्टर डोज नहीं लगवाई, उनके संक्रमित होने पर हालत गंभीर होने की आशंका है। उन्होंने लोगों से बूस्टर डोज लगवाने की अपील की है। साथ ही कोविड प्रोटोकॉल अपनाने का सुझाव दिया है।

आयुवर्ग             पहली           दूसरी
18 से अधिक     3349760   3282083
15 से 17 वर्ष     312698     252445
12 से 14 वर्ष     187169     133420



बूस्टर डोज

  • 60 से अधिक आयुवर्ग का लक्ष्य 458496 के सापेक्ष 74483 लोगों को लगी बूस्टर डोज
  • 18 साल से अधिक आयुवर्ग के 25 लाख लोग, 10 हजार लोगों ने लगवाई पर छह लाख लोग छूटे
  • रिकॉर्ड के तहत 505340 लोग अब तक दूसरी डोज से भी दूर, नहीं पहुंचे टीकाकरण केंद्र तक
  • नोट : सभी आयुवर्ग को मिलाकर करीब दो हजार लोग प्रतिदिन हो रहे हैं प्रतिरक्षित।


युवाओं के टीकाकरण का लक्ष्य सौ फीसदी से अधिक पहुंच रहा है। किशोर और बच्चों के टीकाकरण में भी गति है। शासन की ओर से बूस्टर डोज लगवाने के लिए मैसेज भेजे जा रहे हैं। हमारी सभी टीमें सक्रिय हैं। स्कूल, संगठन, संस्थान, एनजीओ सभी का सहयोग मिल रहा है। लोगों से अपील है कि वह भी बूस्टर डोज लगवाने के लिए निजी अस्पताल के टीकाकरण केंद्र तक पहुंचे। - डॉ. बलवीर सिंह, सीएमओ

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