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प्रधानमंत्री आवास योजना: बरेली के 2344 बेघरों को नौ साल से छत मिलने का इंतजार, बिल्डर कर रहे लेटलतीफी

Sat, 12 Sep 2026 11:50 AM IST
Mukesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: Mukesh Kumar Updated Sat, 12 Sep 2026 11:50 AM IST
सार

बरेली में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बरेली के 2,344 गरीब परिवारों को नौ साल बाद भी अपने घर नहीं मिले हैं। वर्ष 2018 में शुरू हुई इस योजना में तीन बिल्डरों की लेटलतीफी के कारण लाभार्थी किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं।

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Pradhan Mantri Awas Yojana 2344 homeless people in Bareilly have been waiting nine years
घघोरा पिपरिया में धनराज बिल्डर्स का अधूरा प्रोजेक्ट - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

 प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बरेली जिले के 2,344 गरीब परिवारों को नौ साल से अपनी छत का इंतजार है। वर्ष 2018 में शुरू हुई योजना में तीन बिल्डरों को आवास बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। करोड़ों रुपये का सरकारी अनुदान लेने के बावजूद बिल्डर लेटलतीफी कर रहे हैं। एक ने आवास बना दिए हैं, लेकिन लाभार्थियों को अब तक कब्जा नहीं मिल सका। दो अन्य बिल्डरों का काम 65 फीसदी पर अटका है, जबकि लाभार्थी किराये के मकान, झोपड़ी और अस्थायी ठिकानों पर जिंदगी गुजार रहे हैं।

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बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) क्षेत्र में निजी बिल्डरों को बड़ी हाउसिंग सोसाइटियों के निर्माण के साथ गरीबों के लिए आवास उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बदले केंद्र और राज्य सरकार की ओर से प्रति आवास 2.50 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है। योजना का उद्देश्य था कि गरीब परिवारों को कम कीमत पर पक्का घर मिल सके, लेकिन बिल्डरों की सुस्ती ने इन परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीसलपुर रोड निवासी कैलाश और श्यामलाल जैसे कई लाभार्थी अब भी अपने आशियाने के लिए अधिकारियों और बिल्डर के चक्कर लगा रहे हैं।
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एक बिल्डर ने बनाए 1500 फ्लैट, फिर भी कब्जा नहीं 
मेगा इंफ्रा ड्रीम को कुआंडांडा पुरनापुर में 1500 फ्लैट बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। बिल्डर ने भवन तैयार कर दिए, लेकिन अब तक लाभार्थियों को कब्जा नहीं मिल सका है। धनराज बिल्डर्स को घंघोरा पिपरिया में 480 और मोहन बिल्डर्स को हमीरपुर में 364 फ्लैट बनाने हैं। दोनों परियोजनाओं का करीब 65 फीसदी काम ही पूरा हो सका है।

लाभार्थियों का पैसा अटका 
योजना के तहत एक आवास की कीमत 4.50 लाख रुपये निर्धारित है। इसमें केंद्रांश 1.50 लाख व राज्यांश एक लाख रुपये यानी कुल 2.50 लाख रुपये का अनुदान बिल्डर को मिलता है। शेष दो लाख रुपये के लिए बिल्डर बिडिंग करते हैं। मेगा इंफ्रा ड्रीम ने 1500 आवासों के लिए 64.50 करोड़ रुपये का काम किया। उसे 37.50 करोड़ रुपये का अनुदान मिल चुका है, जबकि लाभार्थियों से 27 करोड़ रुपये मिलने हैं। इसमें अब तक करीब नौ करोड़ रुपये ही जमा हो सके हैं। भुगतान पूरा करने वाले लाभार्थियों को आवास पर कब्जा देने की बात कही जा रही है।

पांच बार नोटिस जारी कर चुका बीडीए 
बीडीए की ओर से बिल्डरों की अब तक पांच बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बैठकों में काम जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन परियोजनाएं रफ्तार नहीं पकड़ सकीं। बिल्डर कभी कोरोना तो कभी दूसरे कारणों का हवाला देते रहे।

24 माह में पूरा होना था काम 
रेरा पंजीयन के तहत परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा किया जाना था। 24 माह में फ्लैट तैयार कर लाभार्थियों को दिए जाने थे, लेकिन आठ-नौ साल बाद भी बड़ी संख्या में परिवार अपने घर से दूर हैं। बिल्डरों की दूरी का खामियाजा गरीब परिवार भुगत रहे हैं।

बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत एक बिल्डर ने आवास बनाकर दे दिए हैं, जबकि दो बिल्डरों के आवास अभी पूरे नहीं हुए हैं। काम पूरा कराने के लिए बिल्डरों को पांच बार नोटिस दिए जा चुके हैं।
 
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