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दिल्ली में धरने पर बैठीं महिलाओं के समर्थन में आईं बरेली की महिलाएं
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नागरिकता कानून का किया पुरजोर विरोध, कहा- सभी जिलों में किया जाएगा प्रदर्शन
बरेली। नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में धरने पर बैठी महिलाओं के समर्थन में बरेली की महिलाएं भी आ गईं हैं। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्राओं के साथ हो रही अभद्रता और मारपीट का कड़ा विरोध जताया है। सबका हक आर्गेनाइजेशन की ओर यहां मालियों की पुलिया स्थित एक शादी हाल में बैठक के दौरान नागरिकता कानून का खुले तौर पर विरोध किया गया।
आर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष रफिया शबनम ने कहा कि एक तरफ सरकार सबका साथ-सबका विकास की बात करती है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ नागरिकों के साथ भेदभाव करती है। महिलाओं की बात नहीं सुनी जा रही है। उन पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। ऐसे में आवश्यक हो गया है कि सभी महिलाएं एक स्वर से इसका विरोध करें। कहा, यहां से महिलाओं का एक प्रतिनिधिमंडल शाहीन बाग में धरने पर बैठीं महिलाओं का समर्थन करने दिल्ली जाएगा। प्रोफेसर डॉ. चारू मेहरोत्रा ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं के साथ अभद्रता किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डॉ. साधना अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली में धरना दे रहीं महिलाएं किसी एक जाति या धर्म की नहीं हैं, इसलिए हम सबका कर्तव्य बनता है कि उनका समर्थन करें। मुस्लिम मजलिस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वसी अहमद ने एनआरसी और एनआरपी को गैर जरूरी बताया। कहा, बेहतर होगा कि सरकार देश के विकास और युवाओं को रोजगार देने पर ध्यान दे। इस दौरान नादिरा, श्रुति सक्सेना, लक्ष्मी श्रीवास्तव, जमील अहमद राज, फरहान अली, रविंद्र सहारा, अंचल जी अहेरी, बुशरा, शहनाज बी, आरफीन, तहरीमा, शबाना, फरहाना आदि मौजूद रहीं।
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बरेली। नागरिकता कानून के विरोध में दिल्ली के शाहीन बाग में धरने पर बैठी महिलाओं के समर्थन में बरेली की महिलाएं भी आ गईं हैं। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्राओं के साथ हो रही अभद्रता और मारपीट का कड़ा विरोध जताया है। सबका हक आर्गेनाइजेशन की ओर यहां मालियों की पुलिया स्थित एक शादी हाल में बैठक के दौरान नागरिकता कानून का खुले तौर पर विरोध किया गया।
आर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष रफिया शबनम ने कहा कि एक तरफ सरकार सबका साथ-सबका विकास की बात करती है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ नागरिकों के साथ भेदभाव करती है। महिलाओं की बात नहीं सुनी जा रही है। उन पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। ऐसे में आवश्यक हो गया है कि सभी महिलाएं एक स्वर से इसका विरोध करें। कहा, यहां से महिलाओं का एक प्रतिनिधिमंडल शाहीन बाग में धरने पर बैठीं महिलाओं का समर्थन करने दिल्ली जाएगा। प्रोफेसर डॉ. चारू मेहरोत्रा ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं के साथ अभद्रता किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डॉ. साधना अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली में धरना दे रहीं महिलाएं किसी एक जाति या धर्म की नहीं हैं, इसलिए हम सबका कर्तव्य बनता है कि उनका समर्थन करें। मुस्लिम मजलिस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता वसी अहमद ने एनआरसी और एनआरपी को गैर जरूरी बताया। कहा, बेहतर होगा कि सरकार देश के विकास और युवाओं को रोजगार देने पर ध्यान दे। इस दौरान नादिरा, श्रुति सक्सेना, लक्ष्मी श्रीवास्तव, जमील अहमद राज, फरहान अली, रविंद्र सहारा, अंचल जी अहेरी, बुशरा, शहनाज बी, आरफीन, तहरीमा, शबाना, फरहाना आदि मौजूद रहीं।
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