फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Power knocked out by storm; city left parched.

Bareilly News: आंधी में उड़ी बिजली, पानी के लिए तरसा शहर

Fri, 12 Jun 2026 01:56 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Fri, 12 Jun 2026 01:56 AM IST
विज्ञापन
Power knocked out by storm; city left parched.
बरेली। जिले में बुधवार रात आई तेज आंधी व बारिश ने बिजली व्यवस्था चरमरा गई। दौ सौ खंभे और इतने ही पेड़ गिरने से जिला रातभर अंधेरे में डूबा रहा। जिले के 8.25 लाख उपभोक्ताओं की बिजली गुल रही। शहरवासियों ने जागकर रात बिताई तो बृहस्पतिवार सुबह उनका सामना जल संकट से हुआ। लोगों ने पानी खरीदकर प्यास बुझाई। कुछ इलाकों में नगर निगम ने टैंकर लगाकर जलापूर्ति की। सुबह धीरे-धीरे विद्युत आपूर्ति को चालू करने का प्रयास किया गया, लेकिन देर शाम तक कई इलाकों में संकट बरकरार रहा।
विज्ञापन

जगतपुर चुंगी में पेड़ व खंभा गिरने, सिविल लाइंस प्रथम, हेलन रोड, बेसू वन, बेसू टू फीडर की लाइनों पर पेड़ गिरने से फॉल्ट हुए। किला उपकेंद्र के फीडर एक व पांच पेड़ गिरने से ब्रेकडाउन में चले गए। यहां लाइन नीचे लटक गई। लोहिया विहार उपकेंद्र के सीबीगंज टाउन, बरेली-2 फीडर की लाइनों पर पेड़ गिरने से आपूर्ति प्रभावित रही। परसाखेड़ा, सुभाषनगर, मढ़ीनाथ, दुर्गानगर, महानगर, सनसिटी, पवन विहार, शाहदाना, सीबीगंज, लोहिया विहार, किला, कुतुबखाना आदि क्षेत्रों में खंभे गिर गए।
विज्ञापन

आंधी के दौरान शहर के सभी 27 उपकेंद्रों को बंद कर दिया गया था। बृहस्पतिवार सुबह नौ बजे तक डीडीपुरम, इज्जतनगर, सीबीगंज, सदर कैंट, पवन विहार, महानगर, दुर्गानगर, सन सिटी उपकेंद्र से बिजली आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी। पेड़ व खंभे गिरने से ट्रांसमिशन से आने वाली 33 केवी लाइन ही क्षतिग्रस्त हो गई थी। इन क्षेत्रों के 138 फीडरों की आपूर्ति ठप रही। अन्य उपकेंद्रों के 200 फीडरों पर लोकल फॉल्ट के चलते उपभोक्ता रातभर बिजली संकट से जूझते रहे। डीडीपुरम, सदर कैंट व कोहाड़ापीर उपकेंद्र को शाम छह बजे के बाद भी चालू नहीं किया जा सका।
विज्ञापन
विज्ञापन

रामपुर रोड व शाहजहांपुर रोड और आसपास के इलाकों में आंधी के कारण भारी क्षति हुई। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की आपूर्ति भी प्रभावित रही। इन क्षेत्रों में अब भी मरम्मत कार्य जारी है। कोहाड़ापीर की सैनिक कॉलोनी, पवन विहार की सनराइज कॉलोनी, संजयनगर, हरूनगला उपकेंद्र से पोषित डोहरा रोड की शिव गार्डन कॉलोनी में 24 घंटे बाद भी आपूर्ति आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी।
फतेहगंज पश्चिमी इलाके के 250 गांवों में भी बिजली गुल
फतेहगंज पश्चिमी। बुधवार देर रात आई आंधी के दौरान बिजली के खंभे व तार टूटने से कस्बे के साथ ही आसपास के 250 गांवों की बिजली गुल हो गई। बृहस्पतिवार को देर शाम तक ज्यादातर इलाकों में आपूर्ति बहाल नहीं हुई। दिनभर गर्मी के चलते लोग परेशान रहे। विद्युत कर्मियों ने बताया कि 33 केवी लाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई। अन्य कई जगहों पर भी लोकल फॉल्ट हुए हैं। संवाद
वर्जन
आंधी से हुई क्षति का आकलन किया जा रहा है। 11 केवी विद्युत लाइनों की पेट्रोलिंग की जा रही है। क्षतिग्रस्त लाइनों और उपकरणों को दुरुस्त कर बिजली आपूर्ति को जल्द सुचारु कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। - ज्ञान प्रकाश, मुख्य अभियंता, विद्युत वितरण खंड प्रथम
------
पानी के लिए हैंडपंपों पर लगी कतार
संवाद न्यूज एजेंसी
बरेली। आंधी-बारिश के बीच शहर की बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने से बृहस्पतिवार सुबह पेयजल संकट उत्पन्न हो गया। सुबह-सुबह लोग पानी भरने हैंडपंपों पर पहुंचे। वहां कतार लगानी पड़ी। जिनके घरों में सबमर्सिबल पंप लगे हैं, उन लोगों ने जनरेटर का सहारा लेकर जैसे-तैसे अपनी जरूरत का पानी जुटाया।
सीबीगंज, किला, पुराना शहर, जगतपुर, जोगी नवादा और सुभाषनगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में जल संकट रहा। इससे स्थानीय निवासियों में नगर निगम और बिजली निगम के खिलाफ आक्रोश रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जरा सी आंधी-बारिश आते ही पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है।
इन इलाकों में टैंकर से पहुंचाया पानी
राजेंद्रनगर, पवन विहार, डीडीपुरम, सिविल लाइंस समेत शहर के कई इलाकों में नगर निगम ने टैंकर से पानी पहुंचाया। जलकल के एई अजीत सिंह ने बताया कि पानी की सप्लाई बाधित होने के चलते शहर के अलग-अलग इलाकों में 15 से अधिक टैंकर भेजे गए हैं। शाम को कई इलाकों में आपूर्ति सामान्य हो गई।
---
औद्योगिक क्षेत्रों की भी बत्ती गुल, फैक्टरियों में जनरेटर का सहारा
फोटो
आंधी-बारिश से गिरे पेड़, खंभे और तार टूटने से बाधित हुई आपूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। आंधी-बारिश की वजह से बुधवार रात औद्योगिक क्षेत्रों की बिजली आपूर्ति चरमरा गई। पेड़ गिरने से बिजली के तार और खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। बृहस्पतिवार रात तक आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी। फैक्टरियों का उत्पादन जनरेटर के भरोसे रहा।
मेंथॉल निर्यातक गौरव मित्तल के मुताबिक, बिजली आपूर्ति बाधित होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। जनरेटर चलाने पर डीजल के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है, जबकि मेंथॉल उद्योग के लिए लंबे समय तक जनरेटर के सहारे उत्पादन जारी रखना आसान नहीं है। आईआईए के चैप्टर चेयरमैन मयूर धीरवानी ने बताया कि परसाखेड़ा और सीबीगंज क्षेत्र में गिरे हुए पेड़ों को हटाने और क्षतिग्रस्त लाइनों को दुरुस्त करने के लिए सिर्फ दो लाइनमैन हैं। लिहाजा, फैक्टरी संचालकों ने अपने खर्च पर दिहाड़ी मजदूरों से कार्य करवाया। बावजूद इसके दिनभर में बिजली आपूर्ति सुचारू नहीं हुई। अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। कहा कि उद्योगों की निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। बिजली के भरोसे संचालित कई उद्योगों में उत्पादन ठप भी रहा।

भूमिगत केबल ही स्थायी विकल्प
चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजेश गुप्ता के मुताबिक, वर्षों से औद्योगिक क्षेत्रों में अंडरग्राउंड केबल बिछाने की मांग की जा रही है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अगर अंडरग्राउंड व्यवस्था होती तो आंधी-बारिश में उद्योगों को संकट का सामना नहीं करना पड़ता। बिजली संकट से उत्पादन पर असर से ऑर्डर पूरे नहीं होते। जनरेटर का खर्च बढ़ता है। छोटे उद्योगों को खासा नुकसान होता है। स्टाफ कम है तो आपदा की स्थिति में त्वरित मरम्मत, उद्योगों के लिए अलग कंट्रोल रूम, हेल्पलाइन व्यवस्था हो ताकि समय पर निदान हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed