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पटाखों से फूटा प्रदूषणः खतरनाक स्तर तक प्रदूषित शहर में और जहरीली हुई फिजा

Mon, 16 Nov 2020 12:42 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 16 Nov 2020 12:42 AM IST
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Pollution caused by firecrackers: toxic poisoning in dangerous city to dangerous level
दिवाली के दिन कुछ एेसा दिखा शहर का नजारा। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

खतरनाक स्तर तक प्रदूषित शहर में और जहरीली हुई फिजा, एक सप्ताह तक वातावरण में असर रहने की आशंका
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आईवीआरआई, चौपुला, सिविल लाइंस में सर्वाधिक प्रदूषण बढ़ने की आशंका

बरेली। इस दिवाली पर भी पटाखों से निकली गैसों ने शहर की फिजा को और जहरीला कर दिया। कई इलाकों में निर्माण कार्यों की वजह से पहले से ही स्थिति खराब थी, पटाखों की वजह से आबादी वाले इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ गया। इज्जतनगर, चौपुला, सिविल लाइंस और राजेंद्रनगर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब रिकॉर्ड हुई है जहां वातावरण में तीन से चार गुना तक प्रदूषण मिला है। वायुमंडल में जहरीली गैसों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई। विशेषज्ञों ने अनुमान जताया है कि प्रदूषण की यह स्थिति वातावरण में सप्ताह भर तक रह सकती है और बच्चों-बुजुर्गों में इसका दुष्प्रभाव ज्यादा दिख सकता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के मुताबिक दिवाली की रात तक इज्जतनगर रेलवे क्रॉसिंग क्षेत्र में पार्टिकुलेट मैटर यानी पीएम 2.5 की मात्रा 297 सबसे ज्यादा माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मिली। चौपुला इलाके में पीएम 2.5 की मात्रा 281 और राजेंद्रनगर में 278 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही। दिवाली पर पटाखे चलने के बाद अब तक क्रमिक तीन बार एक्यूआई रिकॉर्ड नहीं हो सका है लिहाजा पर्यावरणविद प्रदूषण का सही स्तर बता पाने में असमर्थता जता रहे हैं, हालांकि आशंका जता रहे हैं कि शहर में न्यूनतम डेढ़ से दोगुना तक पीएम 2.5 और पीएम बढ़ा है।
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बरेली कॉलेज के एमिरेट प्रो. डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक शहर के सभी हिस्सों में नाइट्रेट्स, सल्फर डाई ऑक्साइड, मोनो कार्बन डाई ऑक्साइड आदि जहरीली गैंसें बढ़ी हैं जो लोगों के स्वास्थ के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक हो सकता है। मौसम ठंडा होने के साथ कोहरे और धुंध की वजह से ये जहरीली गैसें वातावरण में सप्ताह भर से ज्यादा समय तक मौजूद रह सकती हैं। तेज हवा चलने या बारिश होने तक शहर पर प्रदूषण का असर हावी रहेगा।
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जागरूक हुए शहरी, पिछले साल से कम पटाखे चलाए

पर्यावरणविद और बरेली कॉलेज बॉटनी विभाग के विभागध्यक्ष डॉ. आलोक खरे के मुताबिक पिछले साल की अपेक्षा इस बार शहर के लोगों ने 25 से 30 फीसदी कम पटाखे चलाए। यह कमी और ज्यादा हो सकती थी मगर तमाम लोग दिवाली पर आतिशबाजी करना शुभ मानते हैं। हालांकि पिछले सालों जैसी स्थिति इस बार नहीं दिखाई दी। उन्होंने इस बदलाव को बरकरार रखने की अपील लोगों से की है ताकि पर्यावरण को प्रदूषण से बचाया जा सके।

आशंका: शहर में सात दिन बढ़ा रहेगा प्रदूषण स्तर

वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. वागीश वैश्य के मुताबिक इस समय मौसम में नमी है और हवा भी नहीं चल रही है इसलिए पटाखों से उत्सर्जित प्रदूषण सप्ताह भर तक बुजुर्ग और बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। बुजुर्गों को इस दौरान कुछ दिन के लिए सुबह टहलना बंद कर देना चाहिए। बाहर निकलते समय मुंह पर मास्क लगा लें तो और बेहतर रहेगा। आंखों को हानिकारक गैसों से बचाने के लिए चश्मा पहनना ठीक रहेगा। तबीयत खराब हो तो खुद दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना अच्छा रहेगा।

24 घंटे बाद सेंसर मॉनिटरिंग सिस्टम बता पाता है कि वायु की गुणवत्ता

डॉ. सक्सेना के मुताबिक किसी भी जगह का एक्यूआई मापने में करीब 24 घंटे तक का समय लगता है। इसके लिए वहां सेंसर मॉनीटरिंग सिस्टम लगाया जाता है जिस पर तीन बार आठ-आठ घंटे के अंतराल पर पीएम 2.5 और पीएम 10 का आंकड़ा दर्ज किया जाता है। तीनों आंकड़ों के तुलनात्मक अध्ययन के बाद ही सही निष्कर्ष मिलता है। दिवाली पर शहर कितना प्रदूषित हुआ इसका सटीक रिकॉर्ड सोमवार की सुबह पता चल सकेगा। उन्होंने बताया कि इस बार चौपुला, पीलीभीत बाईपास, आईवीआरआई, सिविल लाइंस इलाके में मशीनें लगाई गई हैं।
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