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जत्थों से लेकर सभा तक फहरा तिरंगा, भाईचारे के लगे नारे
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शांति बनाए रखने के लिए आयोजकों के साथ अफसरों ने भी बरती सावधानी, एक-दूसरे की तारीफ की
मंच पर डॉ. आंबेडकर की तस्वीर भी दिखी, कानून को देश के सेक्युलर ढांचे के खिलाफ बताया
बरेली। जुमे की नमाज के बाद इस्लामिया ग्राउंड में ज्ञापन देने का कार्यक्रम था। शहर भर से लोग इस्लामिया मैदान में इकट्ठे हुए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों से लेकर अफसरों तक ने अपनी भूमिका ठीक से निभाई। हर कदम फूंककर रखा ताकि टकराव की कोई गुंजाइश न रहे। सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे की तारीफ भी की गई।
देश के माहौल और पुलिस प्रशासन की सख्ती भांपकर आईएमसी के कार्यक्रम को सांप्रदायिक सौहार्द और देशभक्ति का रंग देने की कोशिश की गई। अपने-अपने इलाकों की मस्जिदों में जुमा की नमाज पढ़ने के बाद लोग जत्थों में इस्लामिया ग्राउंड की ओर निकले। पुलिस ने रास्ते में रोका तो बताया गया कि नौ महला मस्जिद में नमाज पढ़ने जा रहे हैं, जबकि उन्हें इस्लामिया कॉलेज ग्राउंड में एकत्र होना था। बरेली के इतिहास में पहली बार देखने को मिला कि इस तरह के कार्यक्रम में लोग धार्मिक या राजनीतिक झंडों के बजाय तिरंगा लेकर निकले। जत्थों में शामिल लोगों की जुबां पर हिंदुस्तान जिंदाबाद और मजहबी एकता संबंधी नारे थे। इसे हर जाति वर्ग के लोगों ने सराहा।
जनसभा में भी आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर से लेकर दूसरे वक्ताओं का जोर इस बात पर था कि नागरिकता कानून केवल मुस्लिमों के विरोध में नहीं बल्कि देश के संविधान और सेक्युलर ढांचे के खिलाफ है। बार-बार कहा गया कि मंच पर कई हिंदू भाई और भीम सेना के लोग भी मौजूद हैं। कुछ लोग बाबा साहब की तस्वीर भी लोग हाथ में उठाए थे। भीम सेना की टुकड़ी आई तो उनके हाथों में डॉ. आंबेडकर के साथ सरदार भगत सिंह, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम की तस्वीरें भी थीं। वक्ताओं का कहना था कि सीएए के मुद्दे पर बरेली का पुलिस प्रशासन भी हमारे साथ खड़ा है। डीएम के आने पर मौलाना तौकीर ने मंच से ही उनकी तारीफ की। ज्ञापन देने के बाद माइक भी डीएम को पकड़ा दिया। डीएम ने कहा कि बरेली हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है। इसे ऐसे ही बनाए रखना है और पूरे देश को यह संदेश देना है कि सांप्रदायिक सद्भाव की हिफाजत कैसे होती है, यह बरेली वासियों से सीखें।
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मंच पर डॉ. आंबेडकर की तस्वीर भी दिखी, कानून को देश के सेक्युलर ढांचे के खिलाफ बताया
बरेली। जुमे की नमाज के बाद इस्लामिया ग्राउंड में ज्ञापन देने का कार्यक्रम था। शहर भर से लोग इस्लामिया मैदान में इकट्ठे हुए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों से लेकर अफसरों तक ने अपनी भूमिका ठीक से निभाई। हर कदम फूंककर रखा ताकि टकराव की कोई गुंजाइश न रहे। सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे की तारीफ भी की गई।
देश के माहौल और पुलिस प्रशासन की सख्ती भांपकर आईएमसी के कार्यक्रम को सांप्रदायिक सौहार्द और देशभक्ति का रंग देने की कोशिश की गई। अपने-अपने इलाकों की मस्जिदों में जुमा की नमाज पढ़ने के बाद लोग जत्थों में इस्लामिया ग्राउंड की ओर निकले। पुलिस ने रास्ते में रोका तो बताया गया कि नौ महला मस्जिद में नमाज पढ़ने जा रहे हैं, जबकि उन्हें इस्लामिया कॉलेज ग्राउंड में एकत्र होना था। बरेली के इतिहास में पहली बार देखने को मिला कि इस तरह के कार्यक्रम में लोग धार्मिक या राजनीतिक झंडों के बजाय तिरंगा लेकर निकले। जत्थों में शामिल लोगों की जुबां पर हिंदुस्तान जिंदाबाद और मजहबी एकता संबंधी नारे थे। इसे हर जाति वर्ग के लोगों ने सराहा।
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जनसभा में भी आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर से लेकर दूसरे वक्ताओं का जोर इस बात पर था कि नागरिकता कानून केवल मुस्लिमों के विरोध में नहीं बल्कि देश के संविधान और सेक्युलर ढांचे के खिलाफ है। बार-बार कहा गया कि मंच पर कई हिंदू भाई और भीम सेना के लोग भी मौजूद हैं। कुछ लोग बाबा साहब की तस्वीर भी लोग हाथ में उठाए थे। भीम सेना की टुकड़ी आई तो उनके हाथों में डॉ. आंबेडकर के साथ सरदार भगत सिंह, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम की तस्वीरें भी थीं। वक्ताओं का कहना था कि सीएए के मुद्दे पर बरेली का पुलिस प्रशासन भी हमारे साथ खड़ा है। डीएम के आने पर मौलाना तौकीर ने मंच से ही उनकी तारीफ की। ज्ञापन देने के बाद माइक भी डीएम को पकड़ा दिया। डीएम ने कहा कि बरेली हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल रहा है। इसे ऐसे ही बनाए रखना है और पूरे देश को यह संदेश देना है कि सांप्रदायिक सद्भाव की हिफाजत कैसे होती है, यह बरेली वासियों से सीखें।
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