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तालीम के बिना अंधेरी है जिंदगी: असलम मियां
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बरेली। दरगाह आले रसूल खानकाह वामिकिया निशातिया में उर्स के तीसरे रोज हजरत सैय्यद वामिक मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर अकीदत का इजहार किया।
इस मौके पर हुए जलसे को खिताब करते हुए नायब सज्जादा मौलाना सैय्यद असलम मियां वामिकी ने कहा कि तालीम के बिना इंसान की जिंदगी अधूरी है। तालीम रोशनी और जिहालत अंधेरा है। उन्होंने कुरान का दर्स देते हुए कहा कि मोमिन वही होगा, जिसके हाथ और जुबान से दूसरे इंसान को तकलीफ न पहुंचे। जिस इंसान से दूसरे लोग महफूज नहीं वो न मोमिन है न मुरीद है। इससे पहले प्रोफेसर डॉ. महमूद हुसैन ने हजरत वामिक मियां की जिंदगी पर रोशनी डाली। साथ ही उनके कलाम और मजमुए पर तफसील से चर्चा की।
पूर्व में खानकाह में कुरान की तिलावत की गई और नातो मनकबत का नजराना पेश किया गया। इसमें सुनहरी मस्जिद के इमाम कारी गुलाम यासीन, सैय्यद अनस, सैय्यद जीशान, मौलाना यूनुस बरकाती और तमाम शोअरा ने कलाम पेश किए। तकरीब के आखिर में पीरे तरीकत अल्हाज सैय्यद मोहम्मद मियां वामिकी जिलानी ने कुल की रस्म अदा की। इसके बाद नायब सज्जादा असलम मियां ने दुआ की। यह उर्स वामिकिया एजुेकशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी की ओर से मनाया गया।
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इस मौके पर हुए जलसे को खिताब करते हुए नायब सज्जादा मौलाना सैय्यद असलम मियां वामिकी ने कहा कि तालीम के बिना इंसान की जिंदगी अधूरी है। तालीम रोशनी और जिहालत अंधेरा है। उन्होंने कुरान का दर्स देते हुए कहा कि मोमिन वही होगा, जिसके हाथ और जुबान से दूसरे इंसान को तकलीफ न पहुंचे। जिस इंसान से दूसरे लोग महफूज नहीं वो न मोमिन है न मुरीद है। इससे पहले प्रोफेसर डॉ. महमूद हुसैन ने हजरत वामिक मियां की जिंदगी पर रोशनी डाली। साथ ही उनके कलाम और मजमुए पर तफसील से चर्चा की।
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पूर्व में खानकाह में कुरान की तिलावत की गई और नातो मनकबत का नजराना पेश किया गया। इसमें सुनहरी मस्जिद के इमाम कारी गुलाम यासीन, सैय्यद अनस, सैय्यद जीशान, मौलाना यूनुस बरकाती और तमाम शोअरा ने कलाम पेश किए। तकरीब के आखिर में पीरे तरीकत अल्हाज सैय्यद मोहम्मद मियां वामिकी जिलानी ने कुल की रस्म अदा की। इसके बाद नायब सज्जादा असलम मियां ने दुआ की। यह उर्स वामिकिया एजुेकशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी की ओर से मनाया गया।
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