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पुल की डिजाइन में बदलाव करने का मतलब है सरकारी धन की लूटखसोट..

Fri, 20 Sep 2019 01:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2019 01:52 AM IST
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बरेली। ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म करने के लिए शहर में बन रहे चारों पुलों के निर्माण में बार-बार कोई न कोई अड़ंगा लगने, प्लानिंग के बगैर काम शुरू करने से पब्लिक की दुश्वारियां असहनीय स्तर तक बढ़ने और फिर अफसरों की ओर से पुलों के डिजाइन में बदलाव की पहल किए जाने पर जिले के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बृहस्पतिवार को अपना नजरिया बयां किया तो तमाम अफसरों को सांप सूंघ गया। प्रभारी मंत्री ने अफसरों के मुंह पर ही कहा कि निर्माणाधीन परियोजनाओं का डिजाइन बदलना अफसरों का पुराना हथकंडा है जो सरकारी पैसे की लूट के लिए इस्तेमाल किया जाता है। एस्टीमेट रिवाइज कर काम की लागत बढ़ाने का खेल होता है। उन्होंने कहा कि अब यह सब नहीं चलने वाला। अगर नक्शे में कोई बदलाव हुआ तो अफसरों को यह भी बताना होगा कि उन्होंने पहले ठीक नक्शा क्यों नहीं बनाया।
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विकास भवन सभागार में पत्रकारों के मुखातिब प्रभारी मंत्री के सामने जब यह मुद्दा उठा कि सेतु निगम शहर में कई जगहों पर फ्लाईओवर और ओवरब्रिज बना रहा है। काम शुरू करने से पहले से कोई प्लानिंग न किए जाने से लगातार अड़चनें पैदा हो रही है। अधूरे पड़े आईवीआरआई ओवरब्रिज पर काई जमनी शुरू हो गई है। चौपुला फ्लाईओवर पर अचानक कभी काम शुरू हो जाता है तो अचानक कभी बंद। पिलर बनाने के लिए कहीं अंडरग्राउंड गैस पाइप लाइन तो कभी सीवर लाइन शिफ्ट न होने से अड़ंगा लग जाता है। सेटेलाइट समेत दूसरे पुलों को डिजाइन में कभी वाईशेप तो कभी टीशेप बनाने की बात कहते हुए लटका दिया जाता है। सेटेलाइट फ्लाईओवर बनाने के लिए बिजली की लाइन महीनों बाद भी नहीं हटाई जा सकी है। इस पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि इस मामले की उन्हें जानकारी है। पहले पुलों के काम शुरू हो जाते हैं। बाद में डिजाइन बदलने के नाम पर लूट होती है। एस्टीमेट के संशोधित होने पर सरकारी रकम की बर्बादी तो होती ही है। प्रोजेक्ट में ज्यादा समय लगने से पब्लिक भी परेशान होती है। अब मनमाने तरीके से काम शुरू करना और बाद में डिजाइन बदलना का खेल बंद होगा।
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जिसकी शिकायत उसी को जांच, अब नहीं चलेगा
प्रभारी मंत्री के सामने यह भी मामला उठा कि सरकार को की जानी वाली ऑनलाइन शिकायतों में भी गड़बड़ी हो रही है। जिसके खिलाफ शिकायत की जाती है, अफसर उसी को जांच सौंप देते हैं। जांच में लीपापोती होने से पब्लिक को न्याय नहीं मिल पाता। प्रभारी मंत्री ने कहा कि शासन अब इस पर कड़ी निगरानी करेगा।
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मीडिया से लिया फीडबैक, अफसरों को बाहर निकाला
प्रेस कांफ्रेंस के बाद प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा कई मामलों पर मीडिया से फीडबैक लेना चाहते थे, लेकिन इससे पहले मीडिया कर्मियों के कहने पर डीएम, एसएसपी, सीडीओ सहित दूसरे कई अफसरों को सभागार से बाहर जाने के लिए कह दिया गया। मंत्री ने इसके बाद मंत्री ने अफसरों की कार्यशैली और जनता की परेशानी को लेकर जानकारियां लीं। इस मौके पर जिलाध्यक्ष रवींद्र सिंह राठौर, मेयर उमेश गौतम, विधायक केसर सिंह, डॉ. अरुण, डीसी वर्मा, बहोरनलाल मौर्या मौजूद रहे।
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