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24 पर घूमा था रडार पर अंत में चार पर हुआ वार
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बरेली। हालांकि आखिरकार योगी मंत्रिमंडल से चार मंत्रियों का ही पत्ता कटा और बदकिस्मती से बरेली के दोनों ही मंत्री भी नप गए लेकिन दरअसल संगठन ने इस्तीफा लेने के लिए 24 मंत्रियों को चिह्नित किया था और उनसे इस्तीफे भी ले लिए गए थे। मंगलवार शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन मंत्री सुनील बंसल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच मंगलवार को देर शाम तक चले मंथन के बाद 20 मंत्रियों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने का एक और मौका देने का फैसला लिया गया। बरेली के राजेश अग्रवाल और धर्मपाल सिंह समेत सिर्फ चार मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार कर लेने की सहमति इस मंथन में शामिल ज्यादातर पदाधिकारियों की रही। इस फैसले से योगी की कैबिनेट से बरेली पूरी तरह साफ हो गया।
श्रमिक कल्याण परिषद अध्यक्ष/राज्यमंत्री पंडित सुनील भराला ने सर्किट हाउस में अमर उजाला से बातचीत के दौरान खुलासा किया कि भाजपा नेतृत्व ने काफी मंथन करने के बाद 24 मंत्रियों से इस्तीफे मांगे थे। इन सभी मंत्रियों को संगठन की खुफिया रिपोर्ट के आधार पर चिह्नित किया गया था। पार्टी के पास इन मंत्रियों को बर्खास्त करने का भी विकल्प था, लेकिन वह किसी भी मंत्री को सार्वजनिक रूप से शर्मसार भी नहीं करना चाहती थी। इसी कारण इन सभी 24 मंत्रियों से इस्तीफे मांग लिए गए थे। भराला ने बताया कि पार्टी के सारे फैसले जनहित के मद्देनजर होते हैं। लिहाजा जो कुछ हुआ है उसमें कोई बेहतरी जरूर होगी।
बता दें कि मंगलवार शाम तक मीडिया में छह मंत्रियों के इस्तीफे लेने की चर्चा चलती रही थी जबकि देर शाम सिर्फ चार मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार होने की बात सामने आई। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह का इस्तीफा स्वीकार होने का खुलासा देर रात हुआ। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कुछ मंत्री अपने बचाव के लिए अंत तक कोशिश करते रहे। दिल्ली तक दौड़ भी लगाई मगर सबकुछ व्यर्थ गया।
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अफसरों की पेशानी पर खिंचीं चिंता की लकीरें
धर्मपाल सिंह के इस्तीफे के बाद सिंचाई विभाग में अफरातफरी का माहौल है। धर्मपाल के बूते पोस्टिंग पाने वाले बेचैन हैं कि नया मंत्री न जाने उनका बिस्तर कहां लाद दे। इस फेरबदल का असर यह भी दिखा कि अक्सर नदारद रहने वाले चर्चित एक्सईएन सुरेंद्र यादव और सीपी सिंह भी बुधवार को अपने कार्यालय में नजर आए। बिजनौर ट्रांसफर होने के बाद भी यही चीफ इंजीनियर पद पर जमे बैठे प्रवीण कुमार भी बेचैन दिखे। प्रवीण का मूलपद अधीक्षण अभियंता का है। नहरों की फर्जी सफाई करने वाले ठेकेदार भी परेशान दिखे क्योंकि नहरों की सफाई पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च के बावजूद किसी नहर में पानी नहीं पहुंचा है। बारिश कम होने के कारण किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं।
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श्रमिक कल्याण परिषद अध्यक्ष/राज्यमंत्री पंडित सुनील भराला ने सर्किट हाउस में अमर उजाला से बातचीत के दौरान खुलासा किया कि भाजपा नेतृत्व ने काफी मंथन करने के बाद 24 मंत्रियों से इस्तीफे मांगे थे। इन सभी मंत्रियों को संगठन की खुफिया रिपोर्ट के आधार पर चिह्नित किया गया था। पार्टी के पास इन मंत्रियों को बर्खास्त करने का भी विकल्प था, लेकिन वह किसी भी मंत्री को सार्वजनिक रूप से शर्मसार भी नहीं करना चाहती थी। इसी कारण इन सभी 24 मंत्रियों से इस्तीफे मांग लिए गए थे। भराला ने बताया कि पार्टी के सारे फैसले जनहित के मद्देनजर होते हैं। लिहाजा जो कुछ हुआ है उसमें कोई बेहतरी जरूर होगी।
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बता दें कि मंगलवार शाम तक मीडिया में छह मंत्रियों के इस्तीफे लेने की चर्चा चलती रही थी जबकि देर शाम सिर्फ चार मंत्रियों के इस्तीफे स्वीकार होने की बात सामने आई। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह का इस्तीफा स्वीकार होने का खुलासा देर रात हुआ। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कुछ मंत्री अपने बचाव के लिए अंत तक कोशिश करते रहे। दिल्ली तक दौड़ भी लगाई मगर सबकुछ व्यर्थ गया।
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धर्मपाल सिंह के इस्तीफे के बाद सिंचाई विभाग में अफरातफरी का माहौल है। धर्मपाल के बूते पोस्टिंग पाने वाले बेचैन हैं कि नया मंत्री न जाने उनका बिस्तर कहां लाद दे। इस फेरबदल का असर यह भी दिखा कि अक्सर नदारद रहने वाले चर्चित एक्सईएन सुरेंद्र यादव और सीपी सिंह भी बुधवार को अपने कार्यालय में नजर आए। बिजनौर ट्रांसफर होने के बाद भी यही चीफ इंजीनियर पद पर जमे बैठे प्रवीण कुमार भी बेचैन दिखे। प्रवीण का मूलपद अधीक्षण अभियंता का है। नहरों की फर्जी सफाई करने वाले ठेकेदार भी परेशान दिखे क्योंकि नहरों की सफाई पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च के बावजूद किसी नहर में पानी नहीं पहुंचा है। बारिश कम होने के कारण किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं।