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Bareilly News: फर्जी स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी चलाने वाले को पकड़ने बरेली आएगी पुलिस
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बरेली। नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थानों को को फर्जी ढंग से मान्यता देने वाली संस्था स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी का संचालक बरेली का रहने वाला है। कर्मचारियों से हुई पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह बरेली का निवासी है। पुलिस को अभी तक उसका नाम और पता नहीं मिल सका है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस अब जल्द ही बरेली में उसकी तलाश को आएगी। अब तक 120 संस्थानों को फर्जी ढंग से मान्यता दी गई थी।
एडीसीपी पूर्वी अली अब्बास ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद विभूति खंड पुलिस ने साइबर हाइट्स बिल्डिंग स्थित स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी के दफ्तर पर छापेमारी की। पुलिस को संचालक नहीं मिला। वहां मौजूद कई कर्मचारियों से पुलिस ने पूछताछ की। पूछताछ में कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि उन लोगों को संचालक ने वेतन पर रखा था। पुलिस जांच में काम करने वाले कर्मचारियों को इस फर्जीवाड़े में कोई भूमिका नहीं मिली है। एडीसीपी ने बताया कि मान्यता देने के एवज में प्राइवेट संस्थानों से 10 से लेकर 20 हजार रुपये वसूले जाते थे। मान्यता हासिल करने वालों से सेटिंग के हिसाब से रुपये वसूले जाते थे। अभी पुलिस की पहली प्राथमिकता संचालक को पकड़ने की है। उन्होंने बताया कि जल्द ही उसकी तलाश में पुलिस की एक टीम बरेली भेजी जाएगी। संचालक के पकड़े जाने के बाद ही फर्जी मान्यता के इस खेल का पूरा राज सामने आ सकेगा।
बता दें कि उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी के नाम से मिलती जुलती संस्था स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी बनाकर जालसाजों ने फर्जी ढंग से मान्यता जारी कर दी। अब इस संबंध में विभूति खंड थाने में उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी के सचिव की तरफ से केस दर्ज कराया गया था।
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एडीसीपी पूर्वी अली अब्बास ने बताया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद विभूति खंड पुलिस ने साइबर हाइट्स बिल्डिंग स्थित स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी के दफ्तर पर छापेमारी की। पुलिस को संचालक नहीं मिला। वहां मौजूद कई कर्मचारियों से पुलिस ने पूछताछ की। पूछताछ में कर्मचारियों ने पुलिस को बताया कि उन लोगों को संचालक ने वेतन पर रखा था। पुलिस जांच में काम करने वाले कर्मचारियों को इस फर्जीवाड़े में कोई भूमिका नहीं मिली है। एडीसीपी ने बताया कि मान्यता देने के एवज में प्राइवेट संस्थानों से 10 से लेकर 20 हजार रुपये वसूले जाते थे। मान्यता हासिल करने वालों से सेटिंग के हिसाब से रुपये वसूले जाते थे। अभी पुलिस की पहली प्राथमिकता संचालक को पकड़ने की है। उन्होंने बताया कि जल्द ही उसकी तलाश में पुलिस की एक टीम बरेली भेजी जाएगी। संचालक के पकड़े जाने के बाद ही फर्जी मान्यता के इस खेल का पूरा राज सामने आ सकेगा।
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बता दें कि उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी के नाम से मिलती जुलती संस्था स्टेट पैरामेडिकल फैकल्टी बनाकर जालसाजों ने फर्जी ढंग से मान्यता जारी कर दी। अब इस संबंध में विभूति खंड थाने में उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी के सचिव की तरफ से केस दर्ज कराया गया था।
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