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UP: 'एक चिराग कई आंधियों पे भारी है...', प्रो. वसीम बरेलवी बोले- अमर उजाला ने कायम रखी पत्रकारिता की खूबसूरती

Fri, 17 Jan 2025 01:23 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 17 Jan 2025 01:23 PM IST
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Poet Wasim Barelvi said Amar Ujala maintained the beauty of journalism
शायर प्रो. वसीम बरेलवी ने अमर उजाला को दीं शुभकामनाएं। - फोटो : अमर उजाला

'दुआ करो के सलामत रहे मेरी हिम्मत, यह एक चिराग कई आंधियों पे भारी है।' बात उस वक्त की बात है जब क्षेत्रीय अखबार का चलन नहीं था। रीजनल अखबार के रूप में पहली आवाज बरेली में अमर उजाला की उभरी। उस जमाने में बरेली में बाहर के अखबार आया करते थे। उस वक्त मुरारीलाल माहेश्वरी और डोरी लाल अग्रवाल के प्रयास से बरेली में अखबार शुरू हुआ। डॉ. दिनेश जौहरी और अशोक अग्रवाल का काफी साथ रहा। अंतरराष्ट्रीय शायर प्रो. वसीम बरेलवी ने अमर उजाला बरेली के 56वें स्थापना दिवस पर संस्मरण साझा किए। 

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उन्होंने बताया कि डॉ. दिनेश जौहरी (पूर्व मंत्री) का क्लीनिक कोहाड़ापीर में नैनीताल रोड पर था, जहां हमारा उठना-बैठना था। वह बरेली कॉलेज में पढ़ाते थे। अमर उजाला में क्षेत्रीय खबरें शामिल होते ही अखबार घर-घर से जुड़ गया। उस दौर में बरेली से कुछ और अखबार भी निकले, मगर वह वक्त की रफ्तार के साथ दौड़ नहीं पाए और अमर उजाला बढ़ता रहा।
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80 के दशक में अशोक अग्रवाल ने हम लोगों को साथ लेकर अमर नाम से संस्था बनाई। इस बैनर तले एक मुशायरा कवि सम्मेलन आयोजित किया। इसमें नामवर शायर और कवि शामिल हुए थे और वह मुशायरा बहुत कामयाब हुआ था। उसके बाद से तमाम लोग अमर उजाला से परिवार की तरह जुड़ गए। तब पत्रकारिता भी आला दर्जे की थी, जिसको अमर उजाला ने आज भी कायम रखा है। पत्रकारिता बहुत हौसले का काम है। तमाम दबाव में पत्रकारिता की खूबसूरती को कायम रखना अहम है। 

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मेरी दुआ है कि पत्रकारिता अपने आदर्श हौसले के साथ बरकरार रहे, कलम मजबूत हो। अमर उजाला को मेरी शुभकामनाएं। - प्रो. वसीम बरेलवी, अंतरराष्ट्रीय शायर

सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देना अमर उजाला की खूबी

अमर उजाला ने हमेशा खेल और सामाजिक कार्यों को तरजीह दी है। सामाजिक सरोकार से जुड़ी खबरों को प्राथमिकता से छापा है। बचपन से ही हम अमर उजाला पढ़ रहे हैं। अतुल माहेश्वरी जी से मेरी काफी निकटता रही। वर्ष 1991 में उन्होंने एमएल माहेश्वरी मेमोरियल ऑल इंडिया रैंकिंग प्राइज मनी बैडमिंटन टूर्नामेंट कराया। इसमें 50 हजार रुपये का पुरस्कार था। यह प्रतियोगिता 1995 तक चली और प्राइस मनी ढाई लाख तक पहुंच गई थी। फिर अतुल जी बरेली से बाहर चले गए। ऐसी कई बातें स्मृति में हैं। अमर उजाला को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं। - अनिल कुमार मल्होत्रा, अध्यक्ष, जिला बैडमिंटन संघ व पूर्व अध्यक्ष रोटरी क्लब मेट्रो

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