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Bareilly News: ऑस्ट्रेलिया और तंजानिया की लकड़ियों से निखर रहा प्लाईवुड उद्योग

Thu, 29 May 2025 02:37 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 29 May 2025 02:37 AM IST
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Plywood industry is flourishing due to wood from Australia and Tanzania
बरेली। जिले की औद्योगिक पहचान को पुख्ता करने वाले प्लाईवुड उद्योग को इस समय पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय स्तर पर लकड़ियों का टोटा है। ऐसे में उद्यमी ऑस्ट्रेलिया, तंजानिया और इंडोनेशिया से लकड़ियां मंगवा रहे हैं। इससे जहां प्लाईवुड उद्योग रफ्तार भर रहा है, वहीं 10-12 हजार लोगों को रोजगार भी मिल रहा है।
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जिले के परसाखेडा, फरीदपुर समेत अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में प्लाईवुड के करीब 40 उद्यम संचालित हो रहे हैं। यहां की बनी प्लाईवुड उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, केरल, गुजरात, असम आदि राज्यों को भेजी जाती है। प्लाईवुड के निर्माण में यूकेलिप्टस, पापुलर आदि की लकड़ियों का इस्तेमाल होता है। यह दोनों लकड़ियां प्रदेश के कई जिलों से यहां आती हैं। कारोबारियों के मुताबिक, अब ये लकड़ियां मिलनी कम हो गई हैं। हालत यह है कि इन कारखानों में जहां 60 फीसदी स्थानीय लकड़ियों का इस्तेमाल हो रहा है, वहीं 40 फीसदी विदेश से मंगाई जा रही है। संवाद
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रेट में नहीं आया अंतर
विदेश से लकड़ियों का आयात होने के बावजूद प्लाईवुड की कीमतों पर असर नहीं पड़ा है। कारोबारी बताते है कि विदेश में लकड़िया करीब 75 फीसदी सस्ती मिल जाती हैं, पर कीमत से ज्यादा भाड़ा चुकाना पड़ता है। कारखाने तक आकर विदेशी लकड़ियों की कीमत स्थानीय लकड़ी के बराबर ही बैठती है। इस वजह से उत्पादन लागत प्रभावित नहीं होती। इसी लिए प्लाईवुड की कीमत भी स्थिर है।
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किसानों को किया जा रहा जागरूक
प्लाईवुड कारोबारी, सरकारी विभाग के साथ मिलकर किसानों को पापुलर और यूकेलिप्टस के पौधे लगाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। दो माह पूर्व आयोजित कार्यशाला में जिलेभर के किसानों को बुलाया गया था। उन्हें पापुलर के पौधे लगाने व उससे होने वाले लाभ के बारे में बताया गया था।

अफ्रीकी देशों में सस्ती है लकड़ी
अफ्रीकी देशों में लकड़ी बहुत सस्ती है। इस वजह से वहां से लकड़ी मंगवाई जा रही है। - सलिल बंसल, कोषाध्यक्ष, विनियर प्लाईवुड एसोसिएशन
जिले में लकड़ियां नहीं मिलने से परेशानी हो रही है। 40 फीसदी लकड़ी विदेश से मंगा रहे हैं। - शेखर अग्रवाल, अध्यक्ष, विनियर प्लाईवुड एसोसिएशन
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नकदी पौधों को लगाने के लिए किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। पापुलर व यूकेलिप्टस के पौधे कम जगह में रोपे जा सकते हैं। इससे खेती भी प्रभावित नहीं होती है। - कमल पटेल, एसडीओ प्रथम, वन विभाग
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