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Bareilly News: आंखों की सेहत से आंख मिचौली

Sat, 08 Aug 2026 01:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 01:22 AM IST
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Playing hide-and-seek with eye health
बरेली। शहर के कई चश्माघरों में अप्रशिक्षित स्टाफ द्वारा आंखों की गलत जांच की जा रही है। इससे लोगों की आंखों की तकलीफ बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को शहर के कई चश्माघरों का स्टिंग ऑपरेशन किया तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर मामले पर आंखें मूंदे हुए है।
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स्टिंग ऑपरेशन के दौरान पाया गया कि कई दुकानों पर आंखें सही होने पर भी 0.25 डायोप्टर का चश्मा लगाने का सुझाव दिया गया। कुछ जगहों पर तो आंखों को ठीक करने की दवाएं भी बताई गईं। नगर निगम के पास इलेक्ट्रॉनिक मार्केट स्थित भारत ऑप्टिकल्स में एक महिला कर्मचारी ने आंखों की जांच के बाद 0.5 डायोप्टर नंबर बढ़ने की बात कही, लेकिन ऑप्टोमेट्रिस्ट की डिग्री के बारे में पूछने पर कोई जवाब नहीं मिला।
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घंटाघर के पास एक चश्मा विक्रेता ने मून ऑप्टिकल्स का पता बताया। वहां एक युवक ने मात्र 45 सेकंड में आंखों की जांच कर 0.25 डायोप्टर नंबर बढ़ने का परामर्श दिया और नया चश्मा बनवाने के लिए कहा। कुतुबखाना के एक अन्य चश्मा विक्रेता ने भी मून ऑप्टिकल्स का ही नाम लिया। क्वॉलिटी ऑप्टिकल्स में एक युवक ने पहले से लगे चश्मे का नंबर बताए बिना जांच करने से मना कर दिया। पास के एक अन्य स्टोर पर युवक ने नंबर बदलने के बजाय सिर्फ चश्मा बदलने का परामर्श दिया।
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कोई डिग्री या अनुभव नहीं
चश्माघरों में ऑटो-रिफ्रैक्टोमीटर, रिफ्रैक्शन ट्रॉयल बॉक्स और स्नेलन्स चार्ट जैसे नेत्र जांच उपकरण उपलब्ध थे। एक चश्मा विक्रेता ने बताया कि यहां मशीनों से जांच का भरोसा दिलाकर चश्मे का कारोबार किया जा रहा है। इन लोगों के पास कोई डिग्री या अनुभव नहीं होता है। यदि किसी को पहले से चश्मा नहीं लगा है तो उसे 0.25 डायोप्टर का चश्मा बताकर बेच दिया जाता है। यह नेत्र जांच की शुरुआती रेंज होती है।



विशेषज्ञ से परामर्श जरूरी
जिला अस्पताल के पूर्व वरिष्ठ ऑप्टोमेट्रिस्ट विशाल सक्सेना के अनुसार, 0.25 डायोप्टर चश्मे का सबसे छोटा और शुरुआती पावर मानक है। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप चलाने, नींद पूरी न होने जैसी वजहों से आंखों की नसें फोकस बनाने में अतिरिक्त जोर लगाती हैं। इससे आंखों में थकान, सिरदर्द या पानी आने पर जांच में 0.25 (+या-) अंतर का मतलब यह नहीं है कि स्थायी चश्मा लगाने की जरूरत है। 0.5 डायोप्टर से कम नंबर के चश्मे की जरूरत तब तक नहीं होती, जब तक देखने में ज्यादा परेशानी न हो। हर स्थिति में विशेषज्ञ से परामर्श जरूरी है। दृष्टि जांच के लिए उपकरण का सही उपयोग और जांच के समय मरीज और चार्ट के बीच छह मीटर (20 फीट) की दूरी होनी चाहिए। मरीज के टेढ़ा बैठने या आंखें मिचकाने पर भी मशीन गलत रीडिंग दे सकती है।


वर्जन
चश्माघरों में अगर अप्रशिक्षित स्टाफ आंखों की जांच समेत अन्य चिकित्सा संबंधी कार्य कर रहे हैं तो यह अवैध गतिविधि है। चश्माघरों का निरीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. लईक अहमद अंसारी, डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अधिकारी
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