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खिलाड़ियो ! इस सीजन घर बैठो.. स्टेडियम में चल रहा ‘सियासी अखाड़ा’

Thu, 26 Oct 2017 02:16 AM IST
बरेली
बरेली Updated Thu, 26 Oct 2017 02:16 AM IST
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डोरीलाल अग्रवाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में खेलों की गतिविधियां तो करीब-करीब ठप हैं, काफी समय से यह स्टेडियम सियासी अखाड़ा बना हुआ है। प्रबंधन की आपसी लड़ाई यहां खेलने आने वाले बच्चों के भविष्य बर्बाद कर रही है। क्रिकेट, जिम्नास्टिक समेत कई खेलों के कोच ही नहीं है। जिन खेलों के कोच हैं, उनमें भी सालों से कोई ऐसा खिलाड़ी तैयार नहीं हो पाया, जिसने देश-प्रदेश तो क्या बरेली का ही नाम रोशन किया हो। जिन कोच पर खिलाड़ियों को तैयार करने का जिम्मा है, वे नौकरी बचाने के लिए लॉबिंग में उलझे हुए हैं। दूसरी ओर, सचिन तेंदुलकर, पीवी सिंधु और मेजर ध्यानचंद बनने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले खिलाड़ियों के सपने टूट रहे हैं। स्टेडियम का माहौल इस कदर निराशाजनक हो चला है कि कई खिलाड़ियों ने खेल को ही अलविदा कह दिया है। बरेली में खेलों को लेकर अफसरों का यही नजरिया रहा तो आगे भी कोई खिलाड़ी तैयार नहीं हो पाएगा। 
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क्रिकेट में सीनियर्स ही गुरु
कोच न होने की वजह से क्रिकेट की प्रैक्टिस करने वाले नन्हे खिलाड़ियों को स्टेडियम आने वाले सीनियर्स के टिप्स से ही काम चलाना पड़ रहा है। रामगंगा पार वाहनपुर गांव में रहने वाले ओमनारायण सिंह शर्मा ने दो साल पहले क्रि केट के प्रशिक्षण के लिए स्पोर्ट्स स्टेडियम में आना शुरू किया था। तब यहां क्रिकेट कोच ओपी कोहली थे, लेकिन उनका ट्रांसफर होने के बाद अब कोई कोच उपलब्ध नहीं है। ओमनारायण अब खुद ही प्रैक्टिस करके लौट जाते हैं। सीनियर खिलाड़ी अब्दुल जीशान और यूसुफ कभी-कभी बच्चों को क्रि केट के टिप्स दे देते हैं। 
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नन्हें यश और देव भी मायूस
संजयनगर में रहने वाले ट्रक ड्राइवर के 13 वर्षीय बेटे यश सक्सेना और यहीं के एक शिक्षक के बेटे 10 वर्षीय देव पाठक का सपना है कि वे भी देश के लिए क्रिकेट खेलें, लेकिन स्टेडियम में प्रशिक्षण लेने की उनकी ख्वाहिश पूरी नहीं हो पा रही है। दोनों यहां रोजाना प्रैक्टिस करने आते हैं लेकिन प्रशिक्षण न मिलने की वजह से निराश होकर लौट जाते हैं।
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दौड़ने वालों की मदद करते हैं आरिफ
जोगी नवादा के मजदूर का बेटा आरिफ हुसैन 100 मीटर दौड़ की कई स्पर्धाएं जीत चुके हैं। सीना कम होने और लिखित परीक्षा में फेल हो जाने की वजह से खुद आरिफ की तो सेना में एंट्री तो नहीं हो पाई, लेकिन वह कुछ दिनों से स्टेडियम आकर सेना भर्ती के लिए दौड़ की तैयारी करने वाले अन्य लड़कों की दौड़ने मेें मदद करते हैं। आरिफ ने बताया कि सेना भर्ती के दौरान हुई दौड़ में चार सौ लड़कों में उसका पहला स्थान रहा है। एथलेटिक्स का कोच न होने की वजह से उसकी तरह कई दूसरे खिलाड़ी भी परेशान हैं। संवाददाता जब स्टेडियम पहुंचा तो आरिफ सैनिक कालोनी के संदीप यादव को दौड़ की प्रैक्टिस कराने स्टेडियम आए हुए थे। 

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खेल अधिकारी करें कोच का इंतजाम
डेलापीर इलाके के प्रकाश श्रोत्रिय रेलवे की तरफ से अंडर 19 क्रिकेट खेल चुके हैं। उनके साथ सैनिक कालोनी निवासी मनी स्टेडियम की ओर से भी खेलते हैं। दोनों का कहना है कि कभी-कभार ही उनका स्टेडियम में आना होता है। उन्होंने बताया कि अक्सर कहीं न कहीं खेलने की वजह से बाहर ही रहते है। खेल अधिकारियों को बच्चों के कोच की व्यवस्था करनी चाहिए।    

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घुटन की शिकार प्रतिभाएं
स्टेडियम में हॉकी और बैडमिंटन के प्रशिक्षण के लिए आने वाले 150 से ज्यादा बच्चे हैं। हॉकी खिलाड़ी सद्दाम हुसैन और बैडमिंटन के शुभ, युवराज, देवांश, देवराज, अग्रज आदि स्टेडियम के माहौल से संतुष्ट नहीं हैं। फुटबाल में संजयनगर के कबीर और उसके भाई सीखने आते हैं। एथलेटिक्स में शाहदाना के हसीन खान ने फिर स्टेडियम में आना शुरू कर दिया है। ये सभी कहते हैं कि स्टेडियम में प्रतिभाओं को निखारने पर गंभीरता से काम नहीं हो रहा है।

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सियासत: मंजोत और सूरज ने कहा खेल को अलविदा
2011 में यूनिवर्सिटी से क्रिकेट की इंटर यूनिवर्सिटी टीम की सूची में शामिल नाम कट जाने से मंजोत सिंह का दिल टूट गया। मंजोत सिंह कहते हैं कि उनका तजुर्बा यह है कि खेल में आगे बढ़ने में ईमानदारी मदद नहीं करती। भेदभाव हो जाता है। कोच भी सपोर्ट नहीं करते हैं। इसलिए मैने खेलना ही छोड़ दिया। शीशगढ़ के बल्ली गांव निवासी उसके दोस्त सूरज ने भी खेल को अलविदा कह दिया। सूरज बंगाल, आसाम और कोलकाता में प्रदेश की अगुवाई कर चुके हैं।   



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मैं तो हाल ही में आया हूं। कोच तो अगले सत्र में ही मिल पाएंगे। स्टेडियम में आने वाले खिलाड़ियों की समस्याएं समझकर उनका समाधान कराने की कोशिश कर रहा हूं। -लक्ष्मी शंकर सिंह, आरएसओ

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खेल               कोच का नाम
हैंडबाल             हेमंत कुमार 
बास्केटबाल         सोनेंद्र श्रोतिया
हाकी              मुजाहिद हुसैन
क्रि केट              कोई नहीं
फुटबाल            शमीम अहमद
एथलेटिक्स            कोई नहीं
जिम्नास्टिक          कोई नहीं
वेट लिफ्टिंग         हरीशंकर
स्वीमिंग             सतेंद्र कुमार
बैडमिंटन           दीपमाला
लॉन टेनिस         कोई नहीं
बाक्सिंग              कोई 
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