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Bareilly News: फैक्टरियों के दूषित जल से बर्बाद हो रहे पौधे
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बरेली। फैक्टरियों से निकलने वाले दूषित जल का पौधों पर होने वाले प्रभाव का बरेली कॉलेज के शोधार्थी ने अध्ययन किया। शुक्रवार को शोधपत्र की प्रस्तुति हुई। इसमें पौधे और उनके सेवन से मनुष्यों पर होने वाले दुष्प्रभाव और इससे बचाव के तरीके सुझाए गए हैं। शोधार्थी हृदेश कुमार यादव के मुताबिक फैक्टरियों से निकले दूषित जल से पौधे बर्बाद हो रहे है। दूषित जल का उचित निस्तारण न होने की वजह से यह प्रदूषण का अहम कारक बन रहा है।
जीव विज्ञान के शोधार्थी हृदेश ने प्रो. राजेंद्र सिंह के निर्देशन में पर्यावरण विज्ञान विषय में पीएचडी पूरी की है। विषय ''''कुछ आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों और संभावित जैव उपचारात्मक उपायों पर पर्यावरण प्रदूषकों का प्रभाव'''' रहा। शोध के तहत पांच पौधे प्याज, मूंग, मेथी, बैंगन और तंबाकू पर अध्ययन किया। पता चला कि उद्योगों से निकले अपशिष्टों का उन पौधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
इसमें अकार्बनिक और कार्बनिक घटक भी मिले। जिनके सेवन से मानव शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई है। साथ ही, लगातार सेवन से मानव जीवन के प्रभावित होने की संभावना जताई। उन्होंने दूषित जल से सिंचाई से पहले पौधों की संवदेनशीलता की जांच और औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग के प्रभाव का आकलन करने का सुझाव दिया है।
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जीव विज्ञान के शोधार्थी हृदेश ने प्रो. राजेंद्र सिंह के निर्देशन में पर्यावरण विज्ञान विषय में पीएचडी पूरी की है। विषय ''''कुछ आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों और संभावित जैव उपचारात्मक उपायों पर पर्यावरण प्रदूषकों का प्रभाव'''' रहा। शोध के तहत पांच पौधे प्याज, मूंग, मेथी, बैंगन और तंबाकू पर अध्ययन किया। पता चला कि उद्योगों से निकले अपशिष्टों का उन पौधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
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इसमें अकार्बनिक और कार्बनिक घटक भी मिले। जिनके सेवन से मानव शरीर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई है। साथ ही, लगातार सेवन से मानव जीवन के प्रभावित होने की संभावना जताई। उन्होंने दूषित जल से सिंचाई से पहले पौधों की संवदेनशीलता की जांच और औद्योगिक अपशिष्ट के उपयोग के प्रभाव का आकलन करने का सुझाव दिया है।
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