UP: पीलीभीत से जीते कोई भी... तीन दशक में पहली बार वरुण-मेनका के अलावा कोई दूसरा बनेगा सांसद
Lok Sabha Election 2024 Results : पीलीभीत लोकसभा सीट पर सपा और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। वहीं बसपा प्रत्याशी भी दलित-मुस्लिम गठजोड़ के जरिये चुनौती दे रहे हैं। कौन सांसद बनेगा, इसका फैसला मंगलवार को आएगा।खास बात यह है कि तीन दशक में पहली बार वरुण और मेनका गांधी के अलावा कोई दूसरा पीलीभीत का प्रतिनिधित्व करेगा।
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पीलीभीत में लोकसभा चुनाव के प्रत्याशियों की किस्मत का पिटारा खुलने में कुछ ही समय शेष है। इस संसदीय सीट पर वैसे तो सन 2004 के बाद से लगातार भाजपा का कब्जा रहा है, लेकिन इस बार भाजपा और इंडी गठबंधन का हिस्सा सपा के बीच कांटे की टक्कर बताई जा रही है।
कौन सांसद बनेगा, इसको लेकर सोमवार को चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। इस बार 10 प्रत्याशियों ने यहां से चुनाव लड़ा, लेकिन सीधी टक्कर भाजपा और सपा के बीच है। भाजपा के लिए नए चेहरे के माध्यम से सियासी गढ़ बचाने की चुनौती है तो सपा मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के सहारे जीत के सपने संजोए है। इसके साथ बसपा प्रत्याशी भी दलित-मुस्लिम गठजोड़ के जरिये चुनौती दे रहे हैं।
तीन दशक में यह पहला मौका है कि जब मेनका और वरुण गांधी की गैरमौजूदगी में चुनाव हुआ है। एक तरफ वर्ष 2004 में शाहजहांपुर से संसदीय सीट जीतकर सियासत में कदम रखने वाले भाजपा सरकार में मंत्री जितिन प्रसाद हैं तो दूसरी ओर सपा सरकार में तीन बार विधायक और एक बार मंत्री रहे भगवत सरन गंगवार हैं।
जितिन प्रसाद दो बार रहे चुके हैं सांसद
शाहजहांपुर के निवासी वर्तमान में भाजपा सरकार में लोक निर्माण विभाग मंत्री जितिन प्रसाद पहली बार कांग्रेस सरकार में वर्ष 2004 में शाहजहांपुर और फिर सन 2009 में धौरहरा (लखीमपुर खीरी) से सांसद और फिर मंत्री बने थे। उनके पास सड़क, परिवहन व पेट्रोलियम जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय रहे। वर्ष 2014 व 2019 के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, जबकि वर्ष 2017 में भी तिलहर विधानसभा क्षेत्र से भी जीतने में विफल रहे।
पीलीभीत में भाजपा की पकड़ रही मजबूत
पीलीभीत लोकसभा सीट पर भाजपा की पकड़ मजबूत रही है। यहां सन 2009 में 50 फीसदी मत हासिल करने वाली भाजपा ने 2019 तक नौ फीसदी मतों का इजाफा किया। हालांकि सपा भी इस दौरान मतदाताओं के बीच पैठ मजबूत करने में सफल हुई। वर्ष 2009 में आठ फीसदी मत पाने वाली सपा ने वर्ष 2019 में बसपा के साथ गठबंधन कर 37 फीसदी मतदाताओं तक पहुंच बनाई।
इससे पहले वर्ष 2014 में सपा ने अपने पुराने प्रदर्शन को सुधारते हुए 22 फीसदी मतदाताओं का समर्थन हासिल किया था। यहां सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ और वर्ष 2009 में 16 फीसदी मतदाताओं का समर्थन पाने वाली कांग्रेस 2019 में पूरी तरह से जनाधार विहीन हो गई। इससे पहले वर्ष 2014 में पार्टी 2.78 फीसदी मत पाने में सफल हुई थी।
सपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं भगवत सरन
सपा के भगवत सरन गंगवार बरेली की नवाबगंज विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहने के साथ वर्ष 2003 की तत्कालीन सपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री भी रहे हैं तो बरेली लोकसभा सीट पर वर्ष 2019 में पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं।
बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र से चार बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं फूलबाबू
बसपा के अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू पीलीभीत के बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू तीसरी बार पीलीभीत लोकसभा सीट पर भाग्य आजमा रहे हैं। वह बसपा सरकार में मंत्री भी रहे हैं।