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पीलीभीत से ग्राउंड रिपोर्ट: जातीय समीकरणों में दबकर रह जाता है मानव-वन्यजीव संघर्ष का बड़ा मुद्दा

Sat, 06 Apr 2024 12:36 PM IST
मुकेश कुमार केके सक्सेना, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत
केके सक्सेना, संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 06 Apr 2024 12:36 PM IST
सार

पीलीभीत में पहले चरण में लोकसभा चुनाव होना है। इसको लेकर चुनावी सरगर्मी तेज है। यहां सबसे बड़ा मुद्दा मानव-वन्यजीव संघर्ष का है, जो हर बार जातीय समीकरणों में दबकर रह जाता है। पिछले कई वर्षों से जंगल से सटे इलाकों में रहने वाले लोग इस दंश को झेल रहे हैं। पढ़िए पीलीभीत से ग्राउंड रिपोर्ट... 

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Pilibhit Lok sabha big issue of human-wildlife conflict remains buried in caste equations in elections
पीलीभीत में मानव-वन्यजीव संघर्ष है बड़ा मुद्दा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पीलीभीत में पांच साल में मानव-वन्यजीव संघर्ष में 21 लोगों को जान गंवानी पड़ी। इनमें अधिकतर किसान व मजदूर तबके के लोग शामिल रहे। जिले की करीब एक लाख की आबादी इससे प्रभावित है। इसके बावजूद यह कभी चुनावी मुद्दा नहीं बन सका। एक बार फिर लोकसभा चुनाव आया तो दावों और वादों का दौर शुरू हो गया। जातीय समीकरण साधने के लिए लालायित नेताओं व राजनीतिक दलों की फेहरिस्त से यह मुद्दा ही गायब है।

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72 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले पीलीभीत टाइगर रिजर्व में वन विभाग 72 बाघों के होने का दावा करता है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां 100 से अधिक बाघ हैं। वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने के बाद से ही यहां हालात बिगड़ते चले गए। बाघों ने जंगल से बाहर निकलकर लोगों को मारना शुरू कर दिया। 
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रोकथाम के बजाय वन विभाग भी उल्टा राग अलापता रहता है। उनका कहना है कि लोग लकड़ियां बीनने के लिए जंगल में जाते हैं और बाघ का शिकार हो जाते हैं। हालात इस कदर गंभीर हो चुके हैं कि इस साल के शुरुआती तीन महीने में ही बाघ के हमलों में चार लोगों की जान जा चुकी है। 
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जिले की 720 ग्राम पंचायतों में 160 गांव जंगल के किनारे बसे हैं। इनमें 50 गांव बाघों के हमले के लिहाज से संवेदनशील हैं। इन गांव की एक लाख से ज्यादा की आबादी बीते पांच साल से सरकार की तरफ टकटकी लगाए हुए है। लोगों ने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक के दरवाजे खटखटाए। हालात बद से बदतर होते चले गए लेकिन तंत्र खामोश बैठा रहा। 

बेटे को बाघ ने मार दिया साहब... बहू कर रही मजदूरी
शहर से 20 किलोमीटर दूर बंगाली समाज की माला कॉलोनी में दोपहर में सन्नाटा पसरा था। एक घर में घुसे। पूछा कि घर में कोई आदमी है क्या, या सब काम पर गए हैं? जवाब देने से पहले बूढ़ी अम्मा की आंखों से आंसू छलक आए। बोलीं-अब कोई मर्द नहीं इस घर में। 70 साल की मंजू विश्वास ने बताया कि सामने जिस तस्वीर पर हार टंगा है, वह हमारे पति की है। अंदर दीवार पर टंगी तस्वीर बेटे की है। 

पति की बीमारी से मौत हो गई। बेटे रघुनाथ को छह महीने पहले बाघ ने मार डाला। घर में उसकी पत्नी लक्ष्मी, पांच साल की बेटी माही व चार साल का बेटा राज है। खेती है नहीं सो बहू मजदूरी करने गई है। बताती हैं कि 20 साल से यहां रह रहे हैं। नेता बस वोट मांगने आते हैं। इसके बाद कोई नहीं आता। बेटा मर गया, लेकिन कोई हाल पूछने तक नहीं आया।

सबसे ज्यादा घटनाएं कलीनगर तहसील क्षेत्र में
जमुनिया के सियाराम ने बताया कि बेटे गंगाराम को 30 जून को बाघ ने मार दिया। आज तक कोई नेता झांकने तक नहीं आया। बाघ के हमले की घटनाएं अब रोजमर्रा की बात है। रानी कॉलोनी की गीता विश्वास ने कहा कि बाघों के हमलों में हमने अपनों को खोया है पर अब बहुत हो चुका। अब इस तरह काम नहीं चलेगा। जो प्रत्याशी हमारी समस्याओं के लिए खड़ा होगा, उसे ही हम वोट देंगे। 

अधिकारियों पर लगते रहे भ्रष्टाचार के आरोप
बाघ के हमलों से ग्रामीणों को बचाने के लिए जाल फेंसिंग कराई जानी थी। इसके लिए टेंडर हुए पर इसमें पूर्व डिप्टी डायरेक्टर पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लग गए। दुधवा व पीटीआर का ठेका एक ही ठेकेदार को दे दिया गया। इस कारण दूसरा ठेकेदार हाईकोर्ट चला गया। 

बीते पांच साल में मानव-वन्यजीव संघर्ष में मारे गए लोग
वर्ष 2019
11 अप्रैल    -    हेमंत खैराती  -  गोयल कॉलोनी

वर्ष 2020
01 फरवरी    -   फूलचंद  -  बैजू नगर
05 फरवरी    -  रूपलाल  -  विधिनपुर
21 मार्च        - रमोनी देवी  -  माला कॉलोनी
30 मार्च        - कृष्णा राय  -  माला कॉलोनी
03 अप्रैल      - निंदर सिंह  -  रिछौला 
03 अप्रैल      - डोरीलाल   -  ढेरम मंडरिया 
08 मई         -  शिवेंदु       -  गोयल कॉलोनी

वर्ष 2021
11 जुलाई    -   सोन  -  दियोरिया 
11 जुलाई    -  कंधई  -   दियोरिया 

वर्ष 2022
08 जनवरी   -  गोकुल मलिक  -  टंडोला विजेसी न्यूरिया 

वर्ष 2023
30 मई  -  अशोक कुमार  -  अलीगंज न्यूरिया 
28 जून   - लालता प्रसाद -  रानीगंज माधोटांडा 
16 अगस्त  -  राममूर्ति   -  रानीगंज
21 सितंबर  -   रघुनाथ विश्वास -   माला कॉलोनी 
26 सितंबर  -   तोताराम  -  जमुनिया
11 नवंबर  -  ओमप्रकाश -   जमुनिया

वर्ष 2024
5 जनवरी   -  स्वरूप सिंह उर्फ मट्टू  -  पुरैनी दीपनगर
31 जनवरी  -  गंगाराम   -     जमुनिया
19 फरवरी  -  पंकज   -     पंडरी
19 मार्च    - धर्मेंद्र    -    मल्लपुर खजुरिया
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