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फर्जी लोकतंत्र सेनानियों की जांच करेंगे पीलीभीत डीएम, हाईकोर्ट ने दिया आदेश

Fri, 02 Nov 2018 04:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली Updated Fri, 02 Nov 2018 04:23 PM IST
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Pilibhit DM will investigate fake democracy fighters, High Court ordered
इलाहाबाद हाईकोर्ट
सजायाफ्ता अपराधियों को भी लोकतंत्र रक्षक सेनानी की सुविधाएं दिए जाने पर जिले के 22 लोकतंत्र सेनानियों की ओर से एक जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने बुधवार को पीलीभीत के डीएम को छह सप्ताह में जांच कर व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश दिए हैं। यह भी चेतावनी दी है कि कार्रवाई न करने पर हाईकोर्ट मामले को गंभीरता से लेगा।
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पीलीभीत जिले में कई ऐसे लोक लोकतंत्र सेनानी बना दिए गए जो चेन स्नैचिंग और हत्या के प्रयास जैसे मामले में जेल गए थे। इसका खुलासा अमर उजाला ने चार जनवरी 2017 को किया था। इसके बाद से फर्जी लोकतंत्र सेनानियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार शासन व प्रशासन से कुछ लोकतंत्र सेनानी पत्राचार कर रहे थे, लेकिन शासन-प्रशासन चुप्पी साधे बैठा था। इसके बाद स्वतंत्रता सेनानियों ने कोर्ट की शरण ली।
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उच्च न्यायालय में 22 लोकतंत्र सेनानियों ने याचिका दायर की। इसमें राज्य सरकार सहित नौ व्यक्तियों को प्रतिवादी बनाया गया। याचिका में कहा गया कि बीते तीन साल में शासन-प्रशासन से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की गई। कार्रवाई के बजाए प्रशासन ने डीआईआर में बंद रहे अपराधियों की सम्मान राशि स्वीकृत कर उनकी संख्या दोगुनी कर दी है।
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तीन जून 2015 को डीएम से इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अगस्त 2016 में अरविंद सिंह और सर्वजीत सिंह ने शिकायत की। अप्रैल 2017 में 18 फर्जी लोकतंत्र सेनानियों का नाम-पता बताकर कार्रवाई की बात कही गई। आपातकाल में पीलीभीत जेल में बंद रहे मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने 30 जून 2017 को मुख्यमंत्री को पत्र देकर फर्जी लोकतंत्र सेनानियों द्वारा राजकोष को हानि पहुंचाने की शिकायत की।

यह भी कहा कि एलआईयू से जांच कराकर फर्जी लोगों को पेंशन रोकी जाए। 11 जुलाई 2017 को लोकतंत्र सेनानी एवं केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने भी मुख्यमंत्री से कार्रवाई को कहा। उनके पोर्टल पर भी शिकायत की गई, लेकिन प्रशासन लीपापोती करता रहा। दस मई 2018 को मौजूदा डीएम को भी ज्ञापन दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। मजबूरन हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई।

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अमरेश्वर प्रताप साही और न्यायमूर्ति अजित कुमार ने याचिका को गंभीरता से लिया। पारित आदेश में कहा कि याचिका में अपराधियों द्वारा राजनीतिक पेंशन पाने का मुद्दा उठाया गया है। जिला मजिस्ट्रेट को आदेश दिया गया है कि वे मामले में जांच कराएंगे और छह सप्ताह के अंदर व्यक्तिगत शपथ पत्र हाईकोर्ट में दाखिल करेंगे।

स्टैंडिंग काउंसिल को भी आदेशित किया गया है कि वह डीएम को आदेश की जानकारी दें। चेतावनी भी दी गई है कि अनुपालन न होने पर हाईकोर्ट मामले को गंभीरता से लेगा। प्रतिवादी संख्या छह से दस तक को भी आदेश दिया गया है कि वे व्यक्तिगत शपथ दाखिल कर आपराधिक मामलों की जानकारी दें। हाईकोर्ट के इस आदेश पर लोकतंत्र सेनानियों में हर्ष जताया है। 

कई जाने माने लोग हैं याचिकाकर्ता
फर्जी लोकतंत्र सेनानियों का मामला उठाने वाले और हाईकोर्ट में याचिका करने वालों में लोकतंत्र रक्षक सेनानी के अध्यक्ष अशोक शम्सा, महामंत्री तौसीफ अहमद, वरिष्ठ पत्रकार विश्वमित्र टंडन, आयुर्वेदिक कॉलेज बरेली के पूर्व प्राचार्य डॉ. योगेश चंद्र मिश्रा, रिटायर्ड क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. वीरेंद्र, सेवानिवृत राजकीय चिकित्सक डॉ. धीरेंद्र सिंह चौहान, राम इंटर कॉलेज के पूर्व प्रबंधक अश्वनी गंगवार, पूर्व प्रधानाचार्य करुणाशंकर शुक्ला, पूर्व प्रवक्ता दामोदार दास गुप्ता, जमायते इस्लाम के मोहम्मद रजा खां, अजय शम्सा, वरिष्ठ भाजपा नेता सरदार सर्वजीत सिंह, बीसलपुर के बुजुर्ग नेता राजीव अग्रवाल, विद्यार्थी परिषद के पूर्व संगठन मंत्री अरविंद सिंह आदि शामिल हैं।
 

बिना जेल जाने वाला भी बन गया लोकतंत्र सेनानी

जिले में करीब 150 लोकतंत्र सेनानी है। इनमें से 23 लोकतंत्र सेनानी फर्जी हैं। खास बात यह है कि इसमें एक व्यक्ति ऐसा भी है जिसे लोकतंत्र सेनानी बना दिया गया जो कभी किसी भी आरोप में जेल नहीं गया है। इमरजेंसी के दौर में वह जिले की एक गन्ना विकास समिति में तौल लिपिक था। अमर उजाला के खुलासे के बाद कुछ समय तक इस व्यक्ति के साथ-साथ पांच लोगों की प्रशासन ने कुछ माह तक पेंशन भी रोकी, लेकिन बाद में राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन ने फिर उसकी पेंशन बहाल कर दी।
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