{"_id":"1bef054856d1c052dad488a833fa1e66","slug":"piggy-bank-for-the-life-of-the-muslim-children-go-to-mahesh-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महेश के लिए गुल्लक से जिंदगी देने चले मुस्लिम बच्चे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महेश के लिए गुल्लक से जिंदगी देने चले मुस्लिम बच्चे
बरेली
Updated Fri, 19 Feb 2016 02:09 AM IST
विज्ञापन
बरेली। इंसानियत का पैगाम देने में जसोली के जैद, शहजुल और मिक्दाम ने छोटी सी उम्र में बड़ी भूमिका निभाई है। अपनी पॉकेट मनी से एक-दो रुपये बचाकर गुल्लक में जमा रकम से उन्होंने सीबीगंज के महेश को 637 रुपये की मासूम राहत दी। बच्चे जानते हैं कि इतने पैसे से महेश के इलाज का खर्च निकलना मुश्किल है, फिर भी उनकी पहल ने महेश को जीने की ख्वाहिश दे दी।
जसोली में रहने वाले खालिद रजा सुर्मे का व्यापार करते हैं। उनके तीन बेटे हैं जो हार्टमैन में पढ़ते हैं। शहजुल इस्लाम कक्षा आठ, मो. जैद छह और मो. मिक्दाम कक्षा तीन में हैं। खालिद रजा ने बताया कि सुबह से आने के बाद बच्चों ने ‘अमर उजाला’ पढ़ा तो महेश की खबर पढ़कर चिंतित हो गए। तीनों भाईयों ने एक राय बनाई और सीधे पिता खालिद के पास पहुंच गए। खालिद बताते हैं कि उन्होंने ने गुल्लक से मदद करने की बात मुझसे कही तो मै अपने आप को रोक नहीं पाया। जबकि बच्चों को रोजाना खालिद चार से पांच रुपये देते हैं। इसमें से एक या दो रुपये बच्चे गुल्लक में जमा करते हैं। उन्होंने महेश के बारे में और लोगों से भी मदद करने की बात कही है। बता दें कि बीकॉम कर रहे महेश की किडनी खराब है। उसका भाई एक किडनी दे रहा है लेकिन सब कुछ बिक चुके महेश के पास आपरेशन के लिए भी पैसे नहीं है।
बरेली कालेज के शिक्षक ने की सहायता
बरेली कालेज में लॉ के एक शिक्षक ने भी करीब दस हजार रुपये की सहायता महेश को दी है। शिक्षक गुरुवार को महेश से मिलने गए थे।
विज्ञापन
जसोली में रहने वाले खालिद रजा सुर्मे का व्यापार करते हैं। उनके तीन बेटे हैं जो हार्टमैन में पढ़ते हैं। शहजुल इस्लाम कक्षा आठ, मो. जैद छह और मो. मिक्दाम कक्षा तीन में हैं। खालिद रजा ने बताया कि सुबह से आने के बाद बच्चों ने ‘अमर उजाला’ पढ़ा तो महेश की खबर पढ़कर चिंतित हो गए। तीनों भाईयों ने एक राय बनाई और सीधे पिता खालिद के पास पहुंच गए। खालिद बताते हैं कि उन्होंने ने गुल्लक से मदद करने की बात मुझसे कही तो मै अपने आप को रोक नहीं पाया। जबकि बच्चों को रोजाना खालिद चार से पांच रुपये देते हैं। इसमें से एक या दो रुपये बच्चे गुल्लक में जमा करते हैं। उन्होंने महेश के बारे में और लोगों से भी मदद करने की बात कही है। बता दें कि बीकॉम कर रहे महेश की किडनी खराब है। उसका भाई एक किडनी दे रहा है लेकिन सब कुछ बिक चुके महेश के पास आपरेशन के लिए भी पैसे नहीं है।
विज्ञापन
बरेली कालेज के शिक्षक ने की सहायता
बरेली कालेज में लॉ के एक शिक्षक ने भी करीब दस हजार रुपये की सहायता महेश को दी है। शिक्षक गुरुवार को महेश से मिलने गए थे।