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Bareilly News: रुपए लेते बहेड़ी चिकित्सा अधीक्षक का फाेटो वायरल, जांच शुरू
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बरेली। स्वास्थ्य विभाग में बजट आवंटन और परफार्मेंस इंसेटिव के नाम पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) से वसूली हो रही है। मुख्यमंत्री को इस संबंध में भेजा गया चिकित्सा अधीक्षक का रुपए लेते हुए फोटो वायरल हो रहा है। शासन के निर्देश पर अब सीएमओ ने जांच शुरू कराई है।
मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) ने आरोप लगाया है कि चिकित्सा अधीक्षक अजमेर सिंह प्रत्येक कार्य का कमीशन लेते हैं। बीते छह माह से परफार्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (पीबीआई) नहीं दिया। क्योंकि इसके बदले उन्होंने प्रत्येक सीएचओ से रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत देने से मना करने पर उन्होंने कुछ सीएचओ को जनवरी का 8,500 पीबीआई दे दिया। शेष बजट वापस भेज दिया। फरवरी से जून तक पीबीआई, टीए, डीए भी नहीं दिया। सवाल उठाने पर अभद्र व्यवहार करते हुए उच्चाधिकारियों का हाथ उनपर होने की भी बात कही।
आरोप है कि प्रत्येक सीएचओ को पीबीआई के तौर पर 15 हजार रुपए शासन से दिए जाते हैं। किस सीएचओ को कितना पीबीआई मिलेगा, यह चिकित्सा अधीक्षक तय करते हैं। इंसेंटिव देने के बदले वे प्रत्येक से 20 फीसदी कमीशन मांगते हैं। इन्कार करने पर बजट लौटा देते हैं।
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सीएचओ का आरोप है कि प्रत्येक सीएचओ को व्यवस्थाओं के लिए 18 हजार रुपए का बजट मिलता है। चिकित्सा अधीक्षक ने सभी से संसाधन खरीदारी के लिए 18 हजार रुपए का बजट चेक से लिया, लेकिन जब सामान भिजवाया तो वह महज चार से पांच हजार रुपए का था। सवाल उठाने पर उन्होंने कुछ सीएचओ को रुपए लौटाए, लेकिन ज्यादातर को संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
सीएचओ ने सौंपे गए पत्र में कहा है कि रुपए लेनदेन के आरोप चिकित्सा अधीक्षक खारिज न कर सकें इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के साथ हर बार किसी न किसी बहाने से ली गई रिश्वत के कुछ फोटो भी संलग्न किए हैं। साथ ही सीएचओ का उत्पीड़न और कमीशनखोरी न होने देने और पीबीआई, टीए, डीए नियमानुसार भुगतान कराने की मांग की है।
नियमानुसार विभाग में किसी भी संसाधन सामग्री की खरीदारी के लिए टेंडर किया जाता है, लेकिन चिकित्सा अधीक्षक ने बगैर टेंडर सीएचसी के अधीन 35 सीएचओ से 18 हजार रुपए चेक से लिए। चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि जो फोटो दिखाकर रुपए लेने का आरोप लग रहा है, वह खरीदारी के बाद बचे हुए रुपए सीएचओ को लौटा रहे थे। पर कैश से लेनदेन चिकित्सा अधीक्षक को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
मैंने किसी को न अपशब्द कहे, न रुपए लिए हैं। आरोप निराधार हैं। यह साजिश के तहत मेरे खिलाफ षडयंत्र है। अधिकारी बिंदुवार मामले में जांच कर लें। अगर मेरे खिलाफ कुछ भी साबित होता है तो मैं खुद छोड़कर चला जाऊंगा। - डाॅ. अजमेर सिंह, चिकित्सा अधीक्षक बहेड़ी।
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प्राप्त शिकायती पत्र में लगे आरोपों की जांच कराने के लिए टीम गठित कर दी है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विश्राम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) ने आरोप लगाया है कि चिकित्सा अधीक्षक अजमेर सिंह प्रत्येक कार्य का कमीशन लेते हैं। बीते छह माह से परफार्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (पीबीआई) नहीं दिया। क्योंकि इसके बदले उन्होंने प्रत्येक सीएचओ से रिश्वत की मांग की थी। रिश्वत देने से मना करने पर उन्होंने कुछ सीएचओ को जनवरी का 8,500 पीबीआई दे दिया। शेष बजट वापस भेज दिया। फरवरी से जून तक पीबीआई, टीए, डीए भी नहीं दिया। सवाल उठाने पर अभद्र व्यवहार करते हुए उच्चाधिकारियों का हाथ उनपर होने की भी बात कही।
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आरोप है कि प्रत्येक सीएचओ को पीबीआई के तौर पर 15 हजार रुपए शासन से दिए जाते हैं। किस सीएचओ को कितना पीबीआई मिलेगा, यह चिकित्सा अधीक्षक तय करते हैं। इंसेंटिव देने के बदले वे प्रत्येक से 20 फीसदी कमीशन मांगते हैं। इन्कार करने पर बजट लौटा देते हैं।
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सीएचओ का आरोप है कि प्रत्येक सीएचओ को व्यवस्थाओं के लिए 18 हजार रुपए का बजट मिलता है। चिकित्सा अधीक्षक ने सभी से संसाधन खरीदारी के लिए 18 हजार रुपए का बजट चेक से लिया, लेकिन जब सामान भिजवाया तो वह महज चार से पांच हजार रुपए का था। सवाल उठाने पर उन्होंने कुछ सीएचओ को रुपए लौटाए, लेकिन ज्यादातर को संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
सीएचओ ने सौंपे गए पत्र में कहा है कि रुपए लेनदेन के आरोप चिकित्सा अधीक्षक खारिज न कर सकें इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के साथ हर बार किसी न किसी बहाने से ली गई रिश्वत के कुछ फोटो भी संलग्न किए हैं। साथ ही सीएचओ का उत्पीड़न और कमीशनखोरी न होने देने और पीबीआई, टीए, डीए नियमानुसार भुगतान कराने की मांग की है।
नियमानुसार विभाग में किसी भी संसाधन सामग्री की खरीदारी के लिए टेंडर किया जाता है, लेकिन चिकित्सा अधीक्षक ने बगैर टेंडर सीएचसी के अधीन 35 सीएचओ से 18 हजार रुपए चेक से लिए। चिकित्सा अधीक्षक का कहना है कि जो फोटो दिखाकर रुपए लेने का आरोप लग रहा है, वह खरीदारी के बाद बचे हुए रुपए सीएचओ को लौटा रहे थे। पर कैश से लेनदेन चिकित्सा अधीक्षक को कटघरे में खड़ा कर रहा है।
मैंने किसी को न अपशब्द कहे, न रुपए लिए हैं। आरोप निराधार हैं। यह साजिश के तहत मेरे खिलाफ षडयंत्र है। अधिकारी बिंदुवार मामले में जांच कर लें। अगर मेरे खिलाफ कुछ भी साबित होता है तो मैं खुद छोड़कर चला जाऊंगा। - डाॅ. अजमेर सिंह, चिकित्सा अधीक्षक बहेड़ी।
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प्राप्त शिकायती पत्र में लगे आरोपों की जांच कराने के लिए टीम गठित कर दी है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विश्राम सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी