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Bareilly News: परसाखेड़ा आवासीय योजना अटकी, किसानों के सामने गहराया आर्थिक संकट

Mon, 05 Oct 2026 12:00 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Updated Mon, 05 Oct 2026 12:00 AM IST
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Parsakheda housing scheme stalled; farmers face deepening financial crisis.
बरेली। सीबीगंज क्षेत्र में आवास एवं विकास परिषद की प्रस्तावित परसाखेड़ा आवासीय योजना ने ट्यूलिया गांव के किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में गन्ने का रकबा तेजी से घट रहा है। इससे किसानों के परिवार तंगहाली के दौर से गुजर रहे हैं।
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वर्ष 2011 में ट्यूलिया, धंतिया, हमीरपुर, वोहित, मिलक इमामगंज, बल्लिया और फरीदापुर रामचरण गांवों की 522 हेक्टेयर जमीन पर इस योजना का खाका खींचा गया था। इसमें करीब 250 हेक्टेयर जमीन ट्यूलिया के किसानों की है। जमीन के अधिग्रहण और मुआवजे की आस में किसानों ने धीरे-धीरे गन्ने की खेती करना बंद कर दिया। हालांकि, लंबे अरसे बाद भी योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। अब स्थानीय किसान इसका खामियाजा भुगत रहे हैं।
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क्षेत्र के किसान बाबू राम गंगवार, वीरेंद्र कुमार, शांति पाल, तुला राम और संजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने योजना के जल्द शुरू होने की उम्मीद में गन्ने की फसल से मुंह मोड़ लिया था। गन्ना ही एकमात्र ऐसी फसल है, जिस पर मौसम की मार का असर सबसे कम पड़ता है और किसानों को ज्यादा आय होती है। अब खेती बंद होने से उनके सामने आजीविका का संकट पैदा हो गया है।
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गन्ने का गिर रहा रकबा
मीरगंज शुगर मिल के गन्ना सुपरवाइजर ओमपाल गंगवार ने बताया कि वर्ष 2022-23 में ट्यूलिया गांव में गन्ने का रकबा 130 हेक्टेयर था। वर्ष 2023-24 में यह घटकर 80 हेक्टेयर, वर्ष 2024-25 में 60 हेक्टेयर और वर्ष 2025-26 में 44 हेक्टेयर रह गया। वर्ष 2026-27 में यह सिमटकर मात्र 30 हेक्टेयर ही रह गया है।

वर्जन
लैंड पूलिंग स्कीम में जमीन देने वाले किसानों को नक्शे पर प्लॉट आवंटित किए जा रहे हैं। जिन किसानों ने लैंड पूलिंग स्कीम में जमीन नहीं दी है, दर निर्धारण के बाद उनको मुआवजा देकर भूमि ली जाएगी। - राजेंद्रनाथ राम, अधिशासी अभियंता, आवास एवं विकास परिषद
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