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पीएम आवास के 80 लाख हड़पने वालों को मनाने में लगे ग्राम पंचायत सचिव
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पूरनपुर (पीलीभीत)। गांव बमनपुर भागीरथ, बैल्हा, सिघाड़ा उर्फ टाटरगंज में प्रधानमंत्री आवास के नाम पर किस्तों में मिले 80 लाख रुपये हड़पने वाले 79 लाभार्थियों से आरसी जारी होने के बावजूद अब तक रकम की वसूली नहीं हो सकी। लाभार्थी किसी तरह आवास निर्माण करवा लें, इसके प्रयास किए जा रहे है। इसी प्रयास में शुक्रवार को इन गांव में पहुंची ग्राम पंचायत सचिवों की टीम पहुंची, मगर पहले ही सूचना लीक होने के कारण लाभार्थी और उनके परिवार के सदस्य घरों से गायब हो गए। पीएम आवास निर्माण न होने पर लाभार्थियों से सरकारी रकम की वसूली कैसे होगी, इसे लेकर अफसर चिंतित है।
शारदापार के आधा दर्जन गांव में 450 पीएम आवास लाभार्थियों को वर्ष 2016-17, 2017-18 में स्वीकृत किए गए थे। पहली किस्त के रूप में 40 हजार रुपये उनके खातों में भेज दिए गए। अधिकांश लाभार्थियों ने नींव का निर्माण करवाकर तीनों किस्तों में मिलने वाली धनराशि में दूसरी किस्त के रूप में 70 हजार रुपये भी हासिल कर लिए। दूसरी किस्त मिलते ही आवासों का निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। तमाम प्रयास के बाद अफसरों ने किसी तरह 371 आवासों का निर्माण पूरा करवा दिया, लेकिन गांव बमनपुर भागीरथ में स्वीकृत 37, बैल्हा में 25 और सिघाड़ा उर्फ टाटरगंज में 17 आवासों का निर्माण अब तक नहीं कराया गया। 79 लाभार्थियों के आवास निर्माण न होने पर अफसरों में खलबली मची है। आवास निर्माण हो या फिर सरकारी रकम की वसूली, इसे लेकर अफसरों ने आवास स्वीकृत के समय लिए गए शपथ पत्र को आधार मानकर लाभार्थियों की आरसी जारी करवा दी। आरसी जारी होने के बाद भी 80 लाख की सरकारी रकम वसूली नहीं हो सकी। पंचायत सचिवों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। बुधवार को इन तीनों गांव में बारह ग्राम पंचायत सचिवों की बारह सदस्यीय टीम को गांवों में भेजा गया, ताकि लाभार्थियों पर आवास निर्माण का दबाव बनाया जा सके। टीम गांवों में पहुंचने की सूचना पहले ही लीक हो गई, ऐसे में ये लाभार्थी गांवों से परिवार सहित खिसक गए।
प्रत्येक लाभार्थी को दिए गए 1.10 लाख
प्रधानमंत्री आवास निर्माण निर्माण के लिए लाभार्थियों को तीन किस्तों में 1.20 लाख रुपये दिया जाना था। पहली किस्त 40 रुपये की जारी होने पर नींव तक भवन निर्माण के बाद 70 हजार प्रत्येक लाभार्थी को दिए गए। तीसरी किस्त भवन तैयार होने के बाद फिनिशिंग के लिए 10 हजार रुपये दिए जाना थे। लेकिन आवास निर्माण पूरा न होने पर लाभार्थियों को तीसरी किस्त जारी नहीं की गई।
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दो किस्तें जारी होने के बाद लाभार्थी आवास निर्माण नहीं करवा रहे है। आरसी जारी करवाई गई, लेकिन वसूली नहीं हो सकी। बुधवार को भेजी गई टीम को मात्र एक लाभार्थी ही गांव में मिला। उसने शीघ्र ही आवास निर्माण पूरा करवा लेने का आश्वासन दिया है। -नीरज दुबे, खंड विकास अधिकारी।
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शारदापार के आधा दर्जन गांव में 450 पीएम आवास लाभार्थियों को वर्ष 2016-17, 2017-18 में स्वीकृत किए गए थे। पहली किस्त के रूप में 40 हजार रुपये उनके खातों में भेज दिए गए। अधिकांश लाभार्थियों ने नींव का निर्माण करवाकर तीनों किस्तों में मिलने वाली धनराशि में दूसरी किस्त के रूप में 70 हजार रुपये भी हासिल कर लिए। दूसरी किस्त मिलते ही आवासों का निर्माण कार्य रुकवा दिया गया। तमाम प्रयास के बाद अफसरों ने किसी तरह 371 आवासों का निर्माण पूरा करवा दिया, लेकिन गांव बमनपुर भागीरथ में स्वीकृत 37, बैल्हा में 25 और सिघाड़ा उर्फ टाटरगंज में 17 आवासों का निर्माण अब तक नहीं कराया गया। 79 लाभार्थियों के आवास निर्माण न होने पर अफसरों में खलबली मची है। आवास निर्माण हो या फिर सरकारी रकम की वसूली, इसे लेकर अफसरों ने आवास स्वीकृत के समय लिए गए शपथ पत्र को आधार मानकर लाभार्थियों की आरसी जारी करवा दी। आरसी जारी होने के बाद भी 80 लाख की सरकारी रकम वसूली नहीं हो सकी। पंचायत सचिवों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है। बुधवार को इन तीनों गांव में बारह ग्राम पंचायत सचिवों की बारह सदस्यीय टीम को गांवों में भेजा गया, ताकि लाभार्थियों पर आवास निर्माण का दबाव बनाया जा सके। टीम गांवों में पहुंचने की सूचना पहले ही लीक हो गई, ऐसे में ये लाभार्थी गांवों से परिवार सहित खिसक गए।
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प्रत्येक लाभार्थी को दिए गए 1.10 लाख
प्रधानमंत्री आवास निर्माण निर्माण के लिए लाभार्थियों को तीन किस्तों में 1.20 लाख रुपये दिया जाना था। पहली किस्त 40 रुपये की जारी होने पर नींव तक भवन निर्माण के बाद 70 हजार प्रत्येक लाभार्थी को दिए गए। तीसरी किस्त भवन तैयार होने के बाद फिनिशिंग के लिए 10 हजार रुपये दिए जाना थे। लेकिन आवास निर्माण पूरा न होने पर लाभार्थियों को तीसरी किस्त जारी नहीं की गई।
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दो किस्तें जारी होने के बाद लाभार्थी आवास निर्माण नहीं करवा रहे है। आरसी जारी करवाई गई, लेकिन वसूली नहीं हो सकी। बुधवार को भेजी गई टीम को मात्र एक लाभार्थी ही गांव में मिला। उसने शीघ्र ही आवास निर्माण पूरा करवा लेने का आश्वासन दिया है। -नीरज दुबे, खंड विकास अधिकारी।