{"_id":"5ddd69948ebc3e54d61e193a","slug":"others-in-pilibhit-bareilly-news-bly385614687","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंदरों से क्रूरता पर मेनका के दखल के बाद डीएम ने मांगा स्पष्टीकरण.","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंदरों से क्रूरता पर मेनका के दखल के बाद डीएम ने मांगा स्पष्टीकरण.
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पीलीभीत। मझोला में बंदरों को पकड़कर क्रूरतापूर्वक उन्हें बोरी में बंद करने के मामले ने तूल पकड़ लिया। इस मामले में सुल्तानपुर की सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने डीएम को सख्त कार्रवाई के लिए कहे जाने के बाद डीएम ने सामाजिक वानिकी रेंजर सतेंद्र सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया है। टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन से भी मामले को गंभीरता से लेने को कहा गया है।
मझोला में उत्पाती बंदरों से निजात पाने के लिए कस्बावासियों की मांग पर सामाजिक वानिकी प्रभाग ने नगर पंचायत को बंदरों को पकड़ने की अनुमति दी थी। अनुमति मिलने के बाद रविवार को रेंजर सतेंद्र सिंह के निर्देशन में बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई। वनकर्मियों के साथ कुछ माहिर लोगों ने मिलकर 20 बंदरों को पकड़कर बोरों में बंद कर दिया था। इसके बाद बंदरों से भरे बोरों को नगर पंचायत के एक कचरा वाहन मेें लादकर उन्हें 50 किलोमीटर दूर घुंघचाई क्षेत्र की खन्नौत नदी के समीप ले जाकर छोड़ दिया गया। इस मामले को अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। इसके बाद सुल्तानपुर की सांसद एवं पूर्व केेंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सोमवार शाम डीएम वैभव श्रीवास्तव को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डीएम ने सामाजिक वानिकी के रेंजर सतेंद्र सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया है। इस मामले को टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन को भी देखने को कहा गया है।
माहिरों के आने से पहले ही पकड़ लिए थे बंदर
बताते हैं कि बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से एक्सपर्ट (माहिर) को बुलाया गया था, लेकिन रविवार को उनके आने से पहले ही कुछ लोगों ने इसका श्रेय लेने के लिए आनन फानन में बंदरों को पकड़कर बोरों में बंद कर लिया। जबकि नियमानुसार बंदरों को पकड़कर उन्हें पिंजरे में बंद करके कहीं छोड़ने के लिए ले जाया जाना चाहिए था। यह मामला सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।
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संज्ञान में आया है। सामाजिक वानिकी के रेंजर सतेंद्र सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। इस मामले को टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन से भी देखने को कहा गया है। -वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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मझोला में उत्पाती बंदरों से निजात पाने के लिए कस्बावासियों की मांग पर सामाजिक वानिकी प्रभाग ने नगर पंचायत को बंदरों को पकड़ने की अनुमति दी थी। अनुमति मिलने के बाद रविवार को रेंजर सतेंद्र सिंह के निर्देशन में बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई। वनकर्मियों के साथ कुछ माहिर लोगों ने मिलकर 20 बंदरों को पकड़कर बोरों में बंद कर दिया था। इसके बाद बंदरों से भरे बोरों को नगर पंचायत के एक कचरा वाहन मेें लादकर उन्हें 50 किलोमीटर दूर घुंघचाई क्षेत्र की खन्नौत नदी के समीप ले जाकर छोड़ दिया गया। इस मामले को अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। इसके बाद सुल्तानपुर की सांसद एवं पूर्व केेंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने मामले को संज्ञान में लेते हुए सोमवार शाम डीएम वैभव श्रीवास्तव को कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद डीएम ने सामाजिक वानिकी के रेंजर सतेंद्र सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया है। इस मामले को टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन को भी देखने को कहा गया है।
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माहिरों के आने से पहले ही पकड़ लिए थे बंदर
बताते हैं कि बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा से एक्सपर्ट (माहिर) को बुलाया गया था, लेकिन रविवार को उनके आने से पहले ही कुछ लोगों ने इसका श्रेय लेने के लिए आनन फानन में बंदरों को पकड़कर बोरों में बंद कर लिया। जबकि नियमानुसार बंदरों को पकड़कर उन्हें पिंजरे में बंद करके कहीं छोड़ने के लिए ले जाया जाना चाहिए था। यह मामला सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।
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संज्ञान में आया है। सामाजिक वानिकी के रेंजर सतेंद्र सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया गया है। इस मामले को टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एच राजा मोहन से भी देखने को कहा गया है। -वैभव श्रीवास्तव, डीएम