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बिना सत्यापन जारी हुए अध्यासी प्रमाणपत्र की फाइल ले गई थीं सिटी मजिस्ट्रेट
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पीलीभीत। नगरपालिका के टैक्स अनुभाग का ताला तोड़कर फाइलें ले जाने के मामले का रहस्य धीरे-धीरे उजागर हो रहा है। इसमें नियम विरुद्ध तरीके से एक अध्यासी प्रमाणपत्र बनने की बात सामने आई है। आरोप है कि नगरपालिका के राजस्व निरीक्षक (आरआई) ने वसीयत का बगैर सत्यापन कराए ही अध्यासी प्रमाणपत्र जारी कर दिया। जारी करने से पहले राजस्व निरीक्षक (आरआई) द्वारा नोटिस भी जारी नहीं किया गया। अब मामले की गंभीरता समझ में आई तो ईओ निशा मिश्रा ने आरआई को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
शहर निवासी एक व्यापारी ने दो करोड़ की हैसियत का प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कलक्ट्रेट में आवेदन किया था। इसमें आवेदक ने वर्ष 2013 में अपनी स्वर्गवासी बुआ की वसीयत लगाई थी। जब यह मामला डीएम वैभव श्रीवास्तव के समक्ष पहुंचा तो उनको इसमें कुछ गड़बड़ी की आशंका हुई। इसमें पाया गया कि नगर पालिका कर्मचारियों ने वसीयत का बिना सत्यापन कराए ही व्यापारी को अध्याशी प्रमाण पत्र जारी कर दिया। खास बात यह रही कि अध्यासी प्रमाणपत्र जारी करने से पहले 30 दिन का नोटिस जारी किया जाता है, मगर नगरपालिका ने व्यापारी को वह नोटिस भी जारी नहीं किया। प्रशासन को इसमें गड़बड़ी का संदेह होने पर बुधवार रात एसडीएम सदर और सिटी मजिस्ट्रेट ने नगरपालिका पहुंचकर ताले तोड़े और इससे संबंधित फाइलें जब्त कर ली। ईओ निशा मिश्रा ने अध्यासी प्रमाणपत्र जारी करने वाले राजस्व निरीक्षक करनपाल सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अध्यासी प्रमाण पत्र बताता है संपत्ति पर कब्जा किसका
नगरपालिका द्वारा अध्यासी प्रमाण पत्र केवल करों के निर्धारण एवं वसूली के लिए जारी किया जाता है। इस प्रमाणपत्र का भवन के स्वामित्व का कोई संबंध नहीं है। अध्यासी प्रमाण पत्र जारी करने से पूर्व 30 दिन का नोटिस जारी किया जाता है। यदि किसी को आपत्ति है तो वह नगरपालिका में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। अध्यासी प्रमाण पत्र यह दर्शाता है कि अमुक संपत्ति पर कब्जा किसका है।
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आरआई करनपाल सिंह द्वारा बिना नोटिस जारी किए ही अध्यासी प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इसको लेकर आरआई को कारण बताओ नोटिस दिया है। जवाब असंतोषजनक होने की स्थिति में उन पर कार्रवाई होगी। -निशा मिश्रा, ईओ, नगर पालिका
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शहर निवासी एक व्यापारी ने दो करोड़ की हैसियत का प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कलक्ट्रेट में आवेदन किया था। इसमें आवेदक ने वर्ष 2013 में अपनी स्वर्गवासी बुआ की वसीयत लगाई थी। जब यह मामला डीएम वैभव श्रीवास्तव के समक्ष पहुंचा तो उनको इसमें कुछ गड़बड़ी की आशंका हुई। इसमें पाया गया कि नगर पालिका कर्मचारियों ने वसीयत का बिना सत्यापन कराए ही व्यापारी को अध्याशी प्रमाण पत्र जारी कर दिया। खास बात यह रही कि अध्यासी प्रमाणपत्र जारी करने से पहले 30 दिन का नोटिस जारी किया जाता है, मगर नगरपालिका ने व्यापारी को वह नोटिस भी जारी नहीं किया। प्रशासन को इसमें गड़बड़ी का संदेह होने पर बुधवार रात एसडीएम सदर और सिटी मजिस्ट्रेट ने नगरपालिका पहुंचकर ताले तोड़े और इससे संबंधित फाइलें जब्त कर ली। ईओ निशा मिश्रा ने अध्यासी प्रमाणपत्र जारी करने वाले राजस्व निरीक्षक करनपाल सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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अध्यासी प्रमाण पत्र बताता है संपत्ति पर कब्जा किसका
नगरपालिका द्वारा अध्यासी प्रमाण पत्र केवल करों के निर्धारण एवं वसूली के लिए जारी किया जाता है। इस प्रमाणपत्र का भवन के स्वामित्व का कोई संबंध नहीं है। अध्यासी प्रमाण पत्र जारी करने से पूर्व 30 दिन का नोटिस जारी किया जाता है। यदि किसी को आपत्ति है तो वह नगरपालिका में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। अध्यासी प्रमाण पत्र यह दर्शाता है कि अमुक संपत्ति पर कब्जा किसका है।
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आरआई करनपाल सिंह द्वारा बिना नोटिस जारी किए ही अध्यासी प्रमाणपत्र जारी किया गया है। इसको लेकर आरआई को कारण बताओ नोटिस दिया है। जवाब असंतोषजनक होने की स्थिति में उन पर कार्रवाई होगी। -निशा मिश्रा, ईओ, नगर पालिका