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मस्जिद का ताला 15 को नहीं खुलेगा
बरेली
Updated Fri, 12 Jun 2015 01:21 AM IST
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इमाम को लेकर विवादित हुई कुतुबखाना मस्जिद का ताला अब 15 जून को नहीं खुलेगा। खानदाने आला हजरत की अहम मीटिंग में मौलाना तसलीम मियां के फैसले को डीएम गौरव दयाल के अनुरोध पर आगे बढ़ा दिया है। प्रशासन से मांग की गई है कि रमजान से पहले मस्जिद उनके हवाले की जाए।
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मगरिब की नमाज के बाद रात करीब साढ़े आठ बजे पूर्व सज्जादानशीन सुब्हानी मियां के आवास पर खानदाने आला हजरत की अहम मीटिंग शुरू ही होने को थी। इस बीच मौलाना तसलीम मियां, शहर काजी असजद मियां के प्रतिनिधि खलील कादरी, नुसरत खां, काजी उवैश मियां समेत पांच लोग डीएम के बुलावे पर कैंप कार्यालय पहुंच गए।
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गुरुवार रात करीब 10 बजे डीएम के साथ बातचीत में तसलीम मियां ने कहा कि हमें हर हाल में मस्जिद चाहिए। कागजों में मस्जिद हमारी है तो फिर फैसले में देरी क्यों हो रही है। डीएम का कहना था कि हमें फैसले के लिए कुछ वक्त और चाहिए। वहीं से तसलीम मियां के फोन पर डीएम ने सुब्हानी मियां से बात करके फैसले के लिए थोड़ा समय मांगा। इस पर सुब्हानी मियां ने कहा कि हमें रमजान से पहले मस्जिद चाहिए। मौलाना तसलीम मियां के लौटने तक खानदान के लोग सुब्हानी मियां के आवास पर ही बैठे हुए थे। तसलीम मियां जब वहां डीएम से वार्ता के बाद पहुंचे तो फिर यह तय हुआ कि 15 को नमाज पढ़ाने का फैसला आगे बढ़ा दिया जाए। बैठक में दरगाह आला हजरत के पूर्व सज्जादानशीन मौलाना सुब्हान रजा खां(सुब्हान मियां), सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां, मौलाना सिराज रजा खां, मौलाना अदनान मियां, मोअज्जम मियां, अनस मियां, हमदाद रजा कादरी, अब्दुल्ला मियां, उस्मान रजा खां, आमिर रजा खा, फैज रजा खां, सैयद तलत कादरी, मोहसिन रजा खां, शुएब रजा खां आदि मौजूद रहे। इससे पहले
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दोपहर में दरगाह आला हजरत के पूर्व सज्जादानशीन ने परवेज नूरी, औरंगजेब नूरी, शाहिद नूरी तथा हाजी जावेद खां की अगुवाई में प्रतिनिधि मंडल डीएम के वार्ता करने के लिए भेजा था।
‘कुतुबखाना मस्जिद प्रकरण में दोनों पक्षों से बात की जा रही है। शहर में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से दोनों पक्षों से वार्ता करके सहमति के प्रयास किए जा रहे है। जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जाएगा’- गौरव दयाल, डीएम
मुख्य सचिव से मिलने कोई नहीं गया
-शहर काजी के प्रतिनिधि खलील कादरी समेत चार लोगों को मुख्य सचिव आलोक रंजन से मिलने के लिए जाना था। लेकिन वह कहीं बाहर चले गए, इसकी वजह से कोई उनसे मिलने के लिए नहीं गया।