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अफसरों का मैला नहीं होगा दामन.. प्रधानों-सचिवों पर ही लगेंगे ‘दाग’
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शौचालय निर्माण में मिल रही आपत्तियों पर कराया जा रहा सत्यापन, मांग रहे प्रमाण पत्र
बरेली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा हो चुका है। बावजूद इसके करीब डेढ सौ ग्राम पंचायतों से पात्रता की शर्त पूरी करने के बाद भी लोगों को लाभ न देने के अफसरों पर आरोप लग रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर जिला पंचायत राज विभाग ने शौचालयों के सत्यापन समेत संबंधित पंचायत में सर्वे कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अफसर अपनी गर्दन बचाने के लिए प्रधानों और सचिवों पर निशाना साध रहे हैं। सर्वे और सत्यापन के साथ ही, प्रधानों और सचिवों से प्रमाण पत्र भी ले रहे हैं, ताकि भविष्य में अगर कोई खामी मिले तो उनका दामन मैला न हो।
पिछले दिनों प्रमुख सचिव और पंचायत राज मंत्री के निरीक्षण में शौचालय निर्माण संबंधी तमाम शिकायतें मिलीं थीं। इससे ‘सब कु छ बेहतर’ होने का दावा कर रहे अफसरों की खासी फजीहत हुई थी। ऐसे में अब एक बार फिर जिला पंचायत राज विभाग ने बड़े अफसरों और मंत्रियों के भविष्य में होने वाले दौरे को देखते हुए जिले की 1193 ग्राम पंचायतों में शौचालयों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। इस सत्यापन में गांव में बन चुके शौचालयों की दशा और छूटे हुए पात्र लाभार्थियों का डाटा तैयार होगा। इसके बाद छूटे हुए पात्रों को शौचालय का लाभ देने के बाद अंतिम रूप से प्रधान और सचिवों से प्रमाण पत्र लिया जाएगा। इसमें प्रधानों, सचिवों को यह लिखकर देना होगा कि ‘ग्राम पंचायत के सभी पात्र लाभार्थियों को लाभ मिलने का सत्यापन हो गया है। भविष्य में अगर उच्चाधिक ारी के निरीक्षण, जांच और थर्ड पार्टी सत्यापन में कोई खामी पाई गई तो इसके जिम्मेदार खुद प्रधान और सचिव होंगे।’ संबंधित प्रमाण पत्र पर प्रधान, सचिव, ग्राम विकास अधिकारी, खंड प्रेरक के हस्ताक्षर होंगे। सीडीओ के हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र का सत्यापन होगा। जिला पंचायत राज अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि प्रधान और सचिव सत्यापन में सहयोग नहीं करते, इसलिए शिकायतें मिलती हैं। लिहाजा उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए अब उनसे प्रमाण पत्र लिए जा रहे हैं। अगर फिर भी खामी मिली तो वह खुद जिम्मेदार होंगे।
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बरेली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में शौचालय निर्माण का लक्ष्य पूरा हो चुका है। बावजूद इसके करीब डेढ सौ ग्राम पंचायतों से पात्रता की शर्त पूरी करने के बाद भी लोगों को लाभ न देने के अफसरों पर आरोप लग रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर जिला पंचायत राज विभाग ने शौचालयों के सत्यापन समेत संबंधित पंचायत में सर्वे कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अफसर अपनी गर्दन बचाने के लिए प्रधानों और सचिवों पर निशाना साध रहे हैं। सर्वे और सत्यापन के साथ ही, प्रधानों और सचिवों से प्रमाण पत्र भी ले रहे हैं, ताकि भविष्य में अगर कोई खामी मिले तो उनका दामन मैला न हो।
पिछले दिनों प्रमुख सचिव और पंचायत राज मंत्री के निरीक्षण में शौचालय निर्माण संबंधी तमाम शिकायतें मिलीं थीं। इससे ‘सब कु छ बेहतर’ होने का दावा कर रहे अफसरों की खासी फजीहत हुई थी। ऐसे में अब एक बार फिर जिला पंचायत राज विभाग ने बड़े अफसरों और मंत्रियों के भविष्य में होने वाले दौरे को देखते हुए जिले की 1193 ग्राम पंचायतों में शौचालयों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। इस सत्यापन में गांव में बन चुके शौचालयों की दशा और छूटे हुए पात्र लाभार्थियों का डाटा तैयार होगा। इसके बाद छूटे हुए पात्रों को शौचालय का लाभ देने के बाद अंतिम रूप से प्रधान और सचिवों से प्रमाण पत्र लिया जाएगा। इसमें प्रधानों, सचिवों को यह लिखकर देना होगा कि ‘ग्राम पंचायत के सभी पात्र लाभार्थियों को लाभ मिलने का सत्यापन हो गया है। भविष्य में अगर उच्चाधिक ारी के निरीक्षण, जांच और थर्ड पार्टी सत्यापन में कोई खामी पाई गई तो इसके जिम्मेदार खुद प्रधान और सचिव होंगे।’ संबंधित प्रमाण पत्र पर प्रधान, सचिव, ग्राम विकास अधिकारी, खंड प्रेरक के हस्ताक्षर होंगे। सीडीओ के हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र का सत्यापन होगा। जिला पंचायत राज अधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि प्रधान और सचिव सत्यापन में सहयोग नहीं करते, इसलिए शिकायतें मिलती हैं। लिहाजा उनकी जिम्मेदारी तय करते हुए अब उनसे प्रमाण पत्र लिए जा रहे हैं। अगर फिर भी खामी मिली तो वह खुद जिम्मेदार होंगे।
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