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अधिग्रहण बगैर किसानों की जमीन पर बांध बनाने की शुरू हुई जांच
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बरेली। पंजाब के कई किसानों की भूमि यहां सदर तहसील में भी है। उनका आरोप है कि बाढ़ खंड के अधिकारियों ने जमीन अधिग्रहण की विधिक प्रक्रिया पूरी किए बगैर ही मनमाने ढंग से उनकी भूमि पर बांध का निर्माण करा लिया गया है। किसान कई साल से क्षतिपूर्ति व मुआवजा के लिए दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। इस प्रकरण की शासन में भेजी गई शिकायत के बाद भूमि अध्याप्ति निदेशक ने डीएम को जांच कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।
कपूरथला (पंजाब) निवासी किसान नवरूप सिंह, सरदार हरबंश सिंह ने भूमि अध्यापित निदेशालय को शिकायत भेजी थी कि बरेली सदर तहसील के गांव गुरऊ और फतेहपुर ठाकुरान में उनकी कृषि योग्य जमीन है। उनकी शिकायत है कि उनकी भूमि पर बाढ़ खंड सिंचाई विभाग के कुछ कर्मचारियों ने बिना किसी नोटिस एवं अधिग्रहण की विधिक प्रक्रिया को पूरा कराए बगैर ही मनमाने ढंग से वर्ष 2014 मेें उनकी जमीन खोदकर बांध बनाने के लिए खड़ी फसल पर मिट्टी डाल दी। ऐसे में लगभग पूरी जमीन ऐसी हो गई है, जिस पर अब कृषि कार्य भी नहीं हो सकता। किसानों का कहना है कि मुआवजा व क्षतिपूर्ति पाने के लिए वे सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। वे इस संबंध में अधिकारियों को मार्च 2017 के साथ ही जनवरी व जून 2018 में भी प्रार्थनापत्र दे चुके हैं। शासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए भूमि अध्याप्ति निदेशालय के निदेशक ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को प्रकरण की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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कपूरथला (पंजाब) निवासी किसान नवरूप सिंह, सरदार हरबंश सिंह ने भूमि अध्यापित निदेशालय को शिकायत भेजी थी कि बरेली सदर तहसील के गांव गुरऊ और फतेहपुर ठाकुरान में उनकी कृषि योग्य जमीन है। उनकी शिकायत है कि उनकी भूमि पर बाढ़ खंड सिंचाई विभाग के कुछ कर्मचारियों ने बिना किसी नोटिस एवं अधिग्रहण की विधिक प्रक्रिया को पूरा कराए बगैर ही मनमाने ढंग से वर्ष 2014 मेें उनकी जमीन खोदकर बांध बनाने के लिए खड़ी फसल पर मिट्टी डाल दी। ऐसे में लगभग पूरी जमीन ऐसी हो गई है, जिस पर अब कृषि कार्य भी नहीं हो सकता। किसानों का कहना है कि मुआवजा व क्षतिपूर्ति पाने के लिए वे सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। वे इस संबंध में अधिकारियों को मार्च 2017 के साथ ही जनवरी व जून 2018 में भी प्रार्थनापत्र दे चुके हैं। शासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए भूमि अध्याप्ति निदेशालय के निदेशक ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को प्रकरण की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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