ओपीडी तो खुली मगर व्यवस्थाएं न होने से भटकते रहे मरीज
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करीब दो माह से ज्यादा समय तक कोरोना संक्रमण के चलते बंद रही ओपीडी मंगलवार को शासन के निर्देश पर खुल गई। मगर, पहले दिन अस्पतालों में मरीजों की उपस्थिति बेहद कम रही, जो आए भी उन्हें भी ठीक से इलाज नहीं मिल पाया। जिला अस्पताल में भीड़ न लगे इसके लिए की गई व्यवस्था पहले दिन ही पचरमरा गई। कौन डॉक्टर कहां है, इस बाबत कोई जानकारी न होने से मरीज भटकते रहे।
प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद के निर्देश मिलते ही जिला अस्पताल की ओपीडी बुधवार से शुरू हो गई। पहले दिन 35 मरीज ही जनरल ओपीडी में परामर्श के लिए पहुंचे। इनमें से ज्यादातर आंख और मनोविकार के मरीज थे। ओपीडी के बाहर तीमारदारों को रोक दिया गया था। अंदर सिर्फ ऑर्थोपेडिक और चेस्ट स्पेशलिस्ट ही मौजूद थे।
लिहाजा नेत्र, मनोविकार और फ्लू पीड़ित ओपीडी में पर्चा लेकर भटकते रहे मगर उन्हें कोई मदद नहीं मिली। कटरा चांद खां, पुराना शहर और शाहाबाद से आंख की समस्या लेकर आए बुजुर्ग परेशान रहे। उनका आरोप था कि काउंटर पर पर्चा तो बना दिया गया लेकिन डॉक्टर ओपीडी में हैं ही नहीं। उनके तीमारदार मौजूद स्टाफ से पूछताछ करते रहे तो उन्होंने जानकारी होने से इनकार कर दिया।
सीएमएस डॉ. टीएस आर्या का कहना है कि डॉक्टरों को अपने-अपने कक्ष में ही मरीजों को देखने के निर्देश दिए गए थे। ताकि ओपीडी में भीड़ न हो सके। लिहाजा, पहला दिन होने की वजह से मरीजों को दिक्कत हुई है। गुरुवार से व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी। जगह-जगह नोटिस बोर्ड लगा दिए जाएंगे।
निजी अस्पतालों में भी कम रही उपस्थिति
सरकारी अस्पताल के जैसा ही नजारा निजी अस्पतालों में भी रहा। चौकी चौराहा से सेटेलाइट जाने वाले मार्ग पर स्थित अस्पतालों में पिछले दिनों की तरह ही मरीजों की उपस्थिति दर्ज हुई। ओपीडी पहुंच रहे मरीजों की थर्मल स्क्रीनिंग के साथ ही उनके हाथ सैनिटाइज कराने के बाद मास्क लगवाकर ही प्रवेश दिया जा रहा था। डॉक्टर और मरीज के बीच पारदर्शी प्लास्टिक शीट का पर्दा था।