UP News: रामलीला में अरशद निभाते हैं परशुराम का किरदार, राजा जनक बनेंगे सुहेल, पैट्रिक भी करते हैं मंचन
शाहजहांपुर में ओसीएफ रामलीला गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल है। रामलीला में हर धर्म के कलाकार मंचन करते हैं। अरशद आजाद परशुराम की भूमिका निभाते हैं, तो मोहम्मद सुहेल इस बार राजा जनक का किरदार निभाएंगे। सभी कलाकार पूर्वाभ्यास में जुटे हैं।
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शाहजहांपुर की ऑर्डनेंस क्लोदिंग फैक्टरी (ओसीएफ) की अनूठी श्री रामलीला सद्भाव का संदेश देती है। हर धर्म के कलाकार रामलीला के प्रमुख किरदार निभाते हैं। उनके व्यक्तिगत जीवन में भी इसकी छाप परिलक्षित होती है। पूर्वाभ्यास शुरू होने से लेकर मंचन की समाप्ति तक सभी कलाकार पूर्ण सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं।
वर्ष 1965 से ओसीएफ मैदान पर ऑर्डनेंस ड्रॉमेटिक क्लब समिति के कलाकारों द्वारा श्री रामलीला का मंचन किया जा रहा है। मंचन में छह बाल, 16 महिला और लगभग 45 पुरुष कलाकार विभिन्न भूमिकाएं निभाते हैं। करीब 20 दिन के अभ्यास के बाद दस दिन तक कलाकार प्रभु की लीला का मंचन करते हैं।
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समुदाय से आने वाले सभी कलाकार पूरे महीने आध्यात्मिक माहौल में रहते हैं। सभी कलाकार पूर्वाभ्यास से पूर्व गणेश वंदना में शामिल होते हैं। श्री रामलीला के मंचन के विश्राम के बाद शांति मंगल यज्ञ होता है। इसमें सभी कलाकार अपने किरदार को विदाई देते हैं और पूर्व दिनचर्या में लौट आते हैं।
रामलीला के लिए टाल दिया निकाह
रामलीला में 1997 से भगवान परशुराम का किरदार निभा रहे रंगकर्मी अरशद आजाद कहते हैं कि पूर्वाभ्यास से लेकर मंचन समाप्ति तक पूर्ण सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं। वह बताते हैं कि शुरुआत में कुछ लोगों ने रामलीला मंचन करने पर आपत्ति भी जताई। इसके बावजूद परिवार का पूरा समर्थन मिलता रहा। 2001 में उनका निकाह अक्तूबर के महीने में तय किया गया। इस पर उनकी मां ने आपत्ति जताई। कहा कि बेटे को रामलीला मंचन करना है। इसके बाद फरवरी में निकाह हुआ।
जब बीमार दादी ने कहा- मंचन मत छोड़ो
श्रीरामलीला के सहायक निर्देशक और मंच संचालक मोहम्मद सुहेल इस बार राजा जनक का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वाभ्यास शुरू होने से लेकर शांति मंगल यज्ञ तक जीवन पूर्ण सात्विक रहता है। 2019 में पहली बार विश्वामित्र का किरदार निभाया था।
किरदार को जीवन में उतारने के लिए धर्म ग्रंथों का अध्ययन करते रहते हैं। गत वर्ष दादी के बीमार होने पर किरदार निभाने से मना कर दिया। दादी को पता चला तो उन्होंने कहा कि मंचन मत छोड़ो। श्रीरामलीला में किरदार निभाने से परिवार वाले भी खुश रहते हैं।
सात्विक बनने के लिए मांसाहार छोड़ा
ओसीएफ कर्मचारी पैट्रिक दास 1991 से रामलीला में विभिन्न किरदार निभाते आ रहे हैं। वह गत वर्ष तक रामलीला का निर्देशन भी करते रहे। विभीषण, जनक, रावण, मारीच, मेघनाद आदि की भूमिका निभा चुके पैट्रिक दास कहते हैं कि उनके जीवन में भी राम के आदर्शों का पूरा असर पड़ा। सात्विक बने रहने के लिए मांसाहार छोड़ दिया। सामान्य जीवन में होने वाली मानवीय गलतियों से भी बचने का प्रयास करते हैं। एक महीने तो पूरे आध्यात्मिक माहौल में रहते हैं।
असली नाम भूले...रिश्तेदार तक बुलाते हैं राम
रोहित सक्सेना 2014 से श्री राम का किरदार निभा रहे हैं। पेशे से टेलर रोहित कहते हैं कि श्रीराम के किरदार में आने के बाद जीवन पर बड़ा असर पड़ा और नई पहचान मिली। अब तो रिश्तेदार भी असली नाम की जगह राम ही बुलाते हैं। खानपान से लेकर आचार-विचार तक पूर्ण सात्विक हो गए हैं। मंचन के एक महीने के अलावा शेष समय भी भगवान राम के आदर्शों के पालन का प्रयास करने में बीतता है। उनकी बेटी का नाम सिया है तो बेटे का शिवाय।